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UP में सपा-बसपा के बीच गहरी होती दरार, MLC चुनाव में बीजेपी या दूसरे दल का समर्थन करेगी मायावती

Updated at : 02 Nov 2020 11:49 AM (IST)
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UP में सपा-बसपा के बीच गहरी होती दरार, MLC चुनाव में बीजेपी या दूसरे दल का समर्थन करेगी मायावती

बसपा (BSP)सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने सपा (SP) के खिलाफ सख्त रूख अख्तियार कर लिया है. अब मायावती समाजवादी पार्टी को हराने के लिए किसी दूसरे समर्थन करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर, बसपा राज्य में आगामी एमएलसी चुनावों MLC Elections) में समाजवादी पार्टी (सपा) को हराने के लिए भाजपा या किसी अन्य पार्टी का समर्थन करेगी. हमने सपा के दलित विरोधी कार्यों के खिलाफ अपना कड़ा रुख दिखाने के लिए यह निर्णय लिया है.

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बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के खिलाफ सख्त रूख अख्तियार कर लिया है. अब मायावती समाजवादी पार्टी को हराने के लिए किसी दूसरे समर्थन करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर, बसपा राज्य में आगामी एमएलसी चुनावों में समाजवादी पार्टी (सपा) को हराने के लिए भाजपा या किसी अन्य पार्टी का समर्थन करेगी. हमने सपा के दलित विरोधी कार्यों के खिलाफ अपना कड़ा रुख दिखाने के लिए यह निर्णय लिया है.

गौरतलब है कि इससे पहले राज्यसभा के बीएसपी उम्मीदवार रामजी गौतम के पांच प्रस्तावकों असलम राइनी, असलम अली, मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद और हरगोविंद भार्गव ने हलफनामा दायर करके अपना प्रस्ताव वापस ले लिया था. इसके बाद इन विधायकों ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी. इन पांचों के अलावा बसपा विधायक सुषमा पटेल और वंदना सिंह ने भी अखिलेश से मुलाकात की थी. इन्हीं सात लोगों पर निलंबन की कार्रवाई की गयी है.

मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद सपा ने उनकी पार्टी से बातचीत बंद कर दी. जिस समय साथ आये थे उस समय उन्हें जान से मारने का प्रयास वाले मामले में किये गये केस को वापस लेने को कहा गया. मायावती ने कहा कि आज अफसोस होता है कि मैंने केस वापस क्यों लिया और इनके साथ गठबंधन क्यों किया.

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मायावती ने कहा कि 2019 की लोकसभा चुनाव में एनडीए को सत्ता में आने से रोकने के लिए हमने समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाया था. उनके पारिवारिक कलह की वजह से हमारे गंठबंधन को कोई विशेष फायदा नहीं हुआ. अब वे हमारी की पार्टी के विधायकों को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. हमारे सात विधायक उनके संपर्क में हैं, उन्हें निलंबित कर दिया गया है. अगर वे सपा में शामिल होते हैं तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया जायेगा.

वहीं विपक्ष को एक सीट के जाल में उलझाकर भाजपा ने एक बार फिर यह संदेश दे दिया कि उससे निपटने का एलान करने वालों की प्राथमिकता आपस में ही एक-दूसरे से निपटने और निपटाने की है. वह यह साबित करने में भी सफल रही कि विपक्ष के पास कोई सकारात्मक मुद्दा नहीं है सिवाय विरोध के लिए भाजपा का विरोध करने के. बसपा ने सपा पर अनुसूचित जाति के लोगों की तरक्की बर्दाश्त न कर पाने का आरोप लगाकर इसी संदेश को आगे बढ़ाया. सपा की हार को बसपा और भाजपा दोनों मुद्दा बनाएंगी.

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Posted By: Pawan Singh

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