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ताजनगरी आगरा में पर्यटक उठाएंगे मेट्रो का लुत्फ, इन जगहों पर बनेंगे स्टेशन

Updated at : 22 Oct 2020 7:44 PM (IST)
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ताजनगरी आगरा में पर्यटक उठाएंगे मेट्रो का लुत्फ, इन जगहों पर बनेंगे स्टेशन

ताजनगरी में मैट्रो के काम के लिए सेम इंडिया बिल्डवेल को जिम्मा मिला है. कंपनी दिसंबर से काम शुरू कर सकती है.

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लखनऊ: ताजमहल देखने आने वाले पर्यटक मैट्रो की भी सैर कर सकेंगे. ताजनगरी में मेट्रो योजना को गति मिल रही है. ताजनगरी में मैट्रो के काम के लिए सेम इंडिया बिल्डवेल को जिम्मा मिला है. कंपनी दिसंबर से काम शुरू कर सकती है. फरवरी 2023 तक कंपनी को काम पूरा करना है. आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा अगले सप्ताह आगरा आएंगे.

प्रोजेक्ट पर करीब 8379 करोड़ रुपये खर्च होंगे

पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 8379 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इसमें पहले कॉरीडोर के लिए तीन स्टेशन और चार किमी ट्रैक का निर्माण 273 करोड़ रुपये में होगा. केंद्रीय सचिव यूपीएमआरसी और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मेट्रो के लिए होने वाले कार्यों की समीक्षा करेंगे. आगरा में मेट्रो परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए तेजी से काम किया जा रहा है.

प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो रेल के लिए शहर में 22.3 किमी एलिवेटेड और 7.7 कि.मी भूमिगत कॉरिडोर बनेंगे.

तीस किमी लंबे दोनों ट्रैक में 29 स्टेशन बनेंगे

तीस किमी लंबे दोनों ट्रैक में 29 स्टेशन होंगे. डीपीआर बनाने वाली कंपनी राइट्स ने पूरे ट्रैक में 25 प्रतिशत भूमिगत और 75 प्रतिशत एलिवेटेड ट्रैक निर्माण का प्रावधान किया है. भूमिगत ट्रैक केवल सिकंदरा से ताजमहल के पूर्वी गेट तक प्रस्तावित पहले कॉरिडोर में बनेगा. 14.25 किमी इस ट्रैक में 14 स्टेशन बनेंगे. इनमें पांच स्टेशन भूमिगत होंगे बाकी सभी एलिवेटेड रहेंगे.

कालिंदी विहार से आगरा कैंट रेलवे स्टेशन तक प्रस्तावित दूसरे 15.4 कि.मी लंबे कॉरीडोर में सभी 15 स्टेशन एलिवेटेड होंगे. इस कॉरीडोर में कोई भूमिगत स्टेशन नहीं बनेगा.

स्टेशन निर्माण के लिए निजी भूमि लेने से परहेज

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) ताजनगरी में मेट्रो ट्रैक और स्टेशन निर्माण के लिए निजी भूमि लेने से परहेज करेगा. सिर्फ सरकारी विभागों और नोडल तथा राजकीय आस्थान भूमि चिह्नित की गई है. 2017 में बनी डीपीआर में निजी भूमि का प्रावधान था लेकिन 2019 में केंद्रीय शहरी मंत्रालय से स्वीकृत डीपीआर में प्रोजेक्ट की लागत कम करने के लिए सिर्फ सरकारी भूमि के अधिग्रहण का प्रावधान है.

Posted By- Suraj Thakur

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