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Agra News: कैलाश मंदिर पर मेले के लिए जिले में रहा अवकाश, रोचक है अवकाश और मंदिर का इतिहास

Updated at : 01 Aug 2022 7:13 PM (IST)
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Agra News: कैलाश मंदिर पर मेले के लिए जिले में रहा अवकाश, रोचक है अवकाश और मंदिर का इतिहास

सावन का पवित्र महीना चल रहा है. आज सावन के तीसरे सोमवार पर सुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ लगी हुई है. ऐसे में आगरा के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर कैलाश मंदिर पर मेले का आयोजन किया गया है. मेले में सैकड़ों की संख्या में भक्त जिले और आसपास के इलाकों से भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं.

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Agra News: सावन के तीसरे सोमवार पर ताजनगरी आगरा में प्राचीन महादेव मंदिर कैलाश पर मेले का आयोजन होता है सैकड़ो हजारो की संख्या में भक्तजन अपने आराध्य कैलाश महादेव के दर्शन करने आते हैं. यहां पर महादेव की दो शिवलिंग स्थित है. कैलाश मेले के दिन जिले में अवकाश रहता है. इन दोनों का ही एक अलग इतिहास है. आइए जानते हैं क्या है कैलाश महादेव का रोचक इतिहास.

नाम कैलाश मंदिर पड़ गया

सावन का पवित्र महीना चल रहा है और आज सावन का तीसरा सोमवार है. तीसरे सोमवार पर सुबह से ही शिवालयों में भक्तों की भीड़ लगी हुई है. ऐसे में आगरा के प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर कैलाश मंदिर पर मेले का आयोजन किया गया है. इस मेले में सैकड़ों की संख्या में भक्त जिले और आसपास के इलाकों से भोलेनाथ के दर्शन करने आते हैं. और इसी मेले के चलते यातायात पुलिस ने यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया है जो मेला समाप्त होने तक जारी रहेगा. कैलाश मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो बताया जाता है कि करीब 10000 साल पहले भगवान परशुराम और उनके पिता ऋषि जमदग्नि ने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव की कड़ी तपस्या की. उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा जिसके बाद भगवान परशुराम के पिता ने भोलेनाथ से कहा कि आप हमारे निज निवास पर चलें जिससे हम आपकी रोजाना पूजा अर्चना कर सकें. लेकिन भोलेनाथ ने जवाब दिया कि मैं वैरागी हूं कहीं भी नहीं जा सकता लेकिन इस कैलाश पर्वत के कण-कण में मेरा वास है यहां से जो भी चीज उठाओगे उसमें मेरा वास होगा. इसके बाद भगवान परशुराम और उनके पिता कैलाश पर्वत से एक एक शिवलिंग लेकर अपने निवास की ओर चल पड़े. संध्या पूजन का समय होने पर उन्होंने आगरा में यमुना किनारे पर शिवलिंग को रख दिया और यमुना स्नान के बाद शिवलिंग को उठाने लगे, लेकिन तभी आकाशवाणी हुई. ‘मैं अचलेश्वर हूं एक बार जहां स्थापित हो जाता हूं वहीं पर रहता हूं, अब आप पूजा अर्चना यहीं पर करें’ जिसके बाद परशुराम और उनके पिता ने दोनों शिवलिंग की स्थापना यहीं पर कर दी और उसी के बाद से इस मंदिर का नाम कैलाश मंदिर पड़ गया.

अवकाश की परंपरा चली आ रही

आगरा में वैसे तो भोलेनाथ के कई प्राचीन मंदिर हैं और सभी पर सावन के हर सोमवार को पूजा अर्चना की जाती है. लेकिन सिर्फ कैलाश मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है जहां पर तीसरे सोमवार को मिला लगता है. और इस मेले पर पूरे जिले में सरकारी छुट्टी रहती है. बताया जाता है कि कई साल पहले जब ब्रिटिशों का भारत पर आधिपत्य था. उस समय एक नि:संतान अंग्रेज कलेक्टर ने किसी को कैलाश मंदिर के बारे में बताया. वह मंदिर पहुंचा और उसने पूजा अर्चना की व संतान प्राप्ति की मन्नत मांगी. जिसके बाद कैलाश महादेव के आशीर्वाद से कलेक्टर को एक पुत्र की प्राप्ति हुई. और उसके बाद से ही उस कलेक्टर ने कैलाश मंदिर पर मेले के लिए अवकाश घोषित कर दिया. तभी से यह अवकाश की परंपरा अब भी चली आ रही है.

र‍िपोर्ट : राघवेंद्र गहलोत

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