Varanasi News: रंगभरी एकादशी पर गौने के लिए ससुराल जाएंगे बाबा विश्वनाथ, गौरा मैया के घर स्वागत की तैयारी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 12 Mar 2022 9:22 AM
काशी में 14 मार्च को रंगभरी एकादशी पर शहर में बाजा, बारात और भूतनाथ के साथ काशी विश्वनाथ का गौना निकलेगा. बाबा विश्वनाथ अपने गणों के साथ अपनी ससुराल पहुंचेंगे. इसके साथ ही 14 मार्च को ससुराल से मां गौरा की विदाई कराएंगे.
Varanasi News: वाराणसी में बाबा काशी विश्वनाथ के गौने की रस्म का उत्सव गौरा माता को तेल-हल्दी लगाने के साथ ही शुरू हो गया. काशी विश्वनाथ मंदिर के पास टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर यह रस्म निभाई गई. 14 मार्च को रंगभरी एकादशी पर शहर भर में बाजा, बारात और भूतनाथ के साथ काशी विश्वनाथ का गौना निकलेगा. बाबा विश्वनाथ अपने गणों के साथ अपनी ससुराल पहुंचेंगे तो 14 मार्च को ससुराल से मां गौरा की विदाई कराएंगे.
इस दिन स्वयं शंकर भगवान भक्तों के साथ होली खेलेंगे. इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर समेत पूरी काशी चिता भस्म की होली खेलेगी. गौना की रस्म को पूरा करने के लिए पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी के आवास पर शाम तक गौरा के रजत विग्रह को तेल-हल्दी लगाने के लिए सुहागिनों और गवनहरियों की टोली पहुंची. इसके बाद महिलाओं ने कई मंगल गीत गाए.
काशी में यह रस्म पिछले 364 साल से निभाई जा रही है. इसे देखने के लिए देश के दूर दराज हिस्सों से शिवभक्त काशी आते हैं. गौरा के गौना के लिए मंहत आवास को माता गौरा का मायका बनाकर यहीं पर रस्म अदा कि जाएगी. अब ये उत्सव रंगभरी एकादशी तक जारी रहेगा. सारी रस्में टेढी नीम स्थित महंत आवास पर होनी है. इसकी शुरूआत गौरा को हल्दी-तेल लगाने की रस्म के साथ हुई. इस मौके पर महिलाओं ने मंगल गीत गाए.
इस दौरान ‘गौरा के हरदी लगावा, गोरी के सुंदर बनावा’…, ‘सुकुमारी गौरा कइसे कैलास चढ़िहें’…, ‘गौरा गोदी में लेके गणेश, विदा हाेइ हैं ससुरारी… आदि गीतों पर महिलाओं ने खूब नृत्य किया. वहीं बाबा के गौना में दिखने वाले दृश्यों को अपने शब्दों में बखान किया. मंगलगीतों का कार्यक्रम आज देर रात तक चलेगा. इसके साथ ही दूल्हे यानि भगवान शंकर के लिए पकवान तैयार किए जा रहे हैं. सखियां पार्वती का साज-ऋृंगार करने के लिए चुन-चुनकर फूल ला रहीं हैं.
गौरा के तेल-हल्दी की रस्म के लिए महंत डा. कुलपति तिवारी सानिध्य मे संजीव रत्न मिश्र ने माता गौरा का श्रृंगार किया और अंकशास्त्री पं. वाचस्पति तिवारी के संयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रम “शिवांजली” के अंतर्गत अराधना सिंह, पुनीत पागल, सजय दूबे, प्रियंका पांडेय और रीता शर्मा ने शिव भजनों की प्रस्तुति की. चौदह मार्च को रंगभरी (अमला) एकादशी पर बाबा विश्वनाथ, माता पार्वती संग प्रथमेश की चल प्रतिमा की पालकी यात्रा को लेकर लोकाचार के लिए महंत आवास पर पालकी की मरम्मत से लेकर बाबा के राजसी स्वरूप और पुजन परंपरा के साथ गौरा के गौना के सामानो को सूची बद्ध कर लिया गया है.
इस लोकोत्सव में भीड़ प्रबंधन के लिए इस वर्ष विशेष व्यवस्था की गई है. भगवान शिव की चल प्रतिभा के दर्शन के लिए प्रवेश और निकास अलग-अलग रास्ते से होंगे. यह निर्णय डॉ. तिवारी की अध्यक्षता में हुई क्षेत्रीय नागरिकों की बैठक में लिया गया. डॉ. कुलपति तिवारी ने बताया कि 14 मार्च को रंगभरी एकादशी के उत्सव में शामिल होने वालों को कन्हैया चित्र मंदिर और सेंट्रल होटल के सामने वाली गली से प्रवेश दिया जाएगा.
रिपोर्ट- विपिन सिंह
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