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बोले चीफ जस्टिस खेहर-दिल की बात सुनें पीएम, मोदी ने कहा-मन से सुन रहा हूं

Updated at : 03 Apr 2017 10:02 AM (IST)
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बोले चीफ जस्टिस खेहर-दिल की बात सुनें पीएम, मोदी ने कहा-मन से सुन रहा हूं

इलाहाबाद : नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने रविवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में शि‍रकत की. इस मौके पर चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि पीएम मुझे दिल की बात करने दें. उनके संबोधन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि "मैं मन से सुन रहा था." प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने […]

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इलाहाबाद : नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने रविवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 150वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम में शि‍रकत की. इस मौके पर चीफ जस्टिस खेहर ने कहा कि पीएम मुझे दिल की बात करने दें. उनके संबोधन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि "मैं मन से सुन रहा था."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इलाहाबाद हाइकोर्ट की 150वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में न्यायपालिका की समस्याओं और चुनौतियों का जिक्र करते हुए नयी तकनीक अपनाने पर जोर दिया. सुझाव दिया कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये यदि अदालत को कनेक्ट कर दें, तो काफी पैसा बचेगा. वहीं एसएमएस से मुकदमों की तारीख मिले, इसकी भी कोशिश होनी चाहिए.

अदालती कार्यों में तकनीक के प्रयोग पर जोर देते हुए मोदी ने कहा कि तारीख लेने के लिए विवेक की जरूरत नहीं होती, मसले सुलझाने के लिए ही इसकी जरूरत पड़ती है. इसलिए अदालत में आने के बजाय मोबाइल पर तारीख लेने की परंपरा क्यों न शुरू की जाये. पूर्व राष्ट्रपति के भाषण को उद्धत करते हुए मोदी ने कहा कि इस हाइकोर्ट की 100 वीं वर्षगांठ के दौरान डॉ राधाकृष्णन ने कहा था कि कानून एक ऐसी चीज है, जो लगातार बदलती है, लेकिन यह लोगों के स्वभाव, मूल्यों के अनुकूल होना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार कानूनों के जंजाल को कम करने के लिए हर रोज कोई न कोई पुराने कानून खत्म कर रही है. अब तक हम 1200 कानून खत्म कर चुके हैं.

जजों की कमी पर चिंता, पांच दिनों के त्याग से जज घटा सकते हैं कोर्ट का बोझ : चीफ जस्टिस

पीएम मोदी के सामने चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने ‘दिल की बात’ की. जजों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों के जजों पर भारी बोझ है. पीएम ‘मन की बात’ करते हैं, देश सुनता है. अब मुझे मेरे दिल की बात करने दें. चीफ जस्टिस ने जजों को छुट्टी में भी मामले निपटाने का सुझाव दिया. जस्टिस खेहर ने कहा कि यदि एक जज सप्ताह में सिर्फ पांच दिन अवकाश पीठ में बैठे, तो वह प्रतिदिन छोटे-मोटे 20-25 मामले निबटा लेगा. इस त्याग से अदालत का बोझ काफी घटेगा. उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में हमने सुप्रीम कोर्ट में तीन विशेष पीठें गठित की हैं, जो लंबित मामलों का बोझ घटाने के उद्देश्य के लिए अतिरिक्त घंटे काम करेगी और अवकाश के दौरान बैठेंगी. संविधान पीठ 11 मई से तीन तलाक पर सुनवाई करेगी. आधार व व्हाट्सएप से संबंधित मामलों की भी सुनवाई करेगी. 67 साल में ऐसा पहली बार होगा.

योगी बोले : कानून से बड़ा कोई नहीं

यूपी के मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं होता है. इस समारोह में शामिल होना सौभाग्य की बात. कानून का स्थान शासकों से ऊपर होता है. कानून शासकों का शासक है. वादियों को निष्पक्ष न्याय देना सरकार का कर्तव्य है. कानून से ही समाज चलता है. न्याय व विधि एक-दूसरे के पूरक हैं.

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