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संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, अलग है पौराणिक महत्व

Updated at : 16 Oct 2022 3:47 PM (IST)
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संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी पर राधा कुंड में श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, अलग है पौराणिक महत्व

अहोई अष्टमी के पर्व के दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं और शाम को पूजा पाठ करती हैं. ऐसे में जो महिलाएं संतान प्राप्ति से वंचित है उनके लिए यह दिन काफी खास होता है. क्योंकि इस दिन मथुरा के राधा कुंड में स्नान करने से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है.

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Mathura News: कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने वाले अहोई अष्टमी पर्व 17 अक्टूबर सोमवार को मनाया जाएगा. इस दौरान महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. लेकिन मथुरा में इसका एक अलग ही महत्व है जो महिलाएं संतान प्राप्ति से वंचित है उनके राधा कुंड में नहाने से पुत्र प्राप्ति की कामना पूर्ण होती है. ऐसे में अहोई अष्टमी के दिन मथुरा के राधा कुंड पर सैकड़ों की संख्या में दंपति पहुंचते हैं.

पीछे एक पौराणिक महत्व

अहोई अष्टमी के पर्व के दिन महिलाएं अपने बच्चों की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखती हैं और शाम को पूजा पाठ करती हैं. ऐसे में जो महिलाएं संतान प्राप्ति से वंचित है उनके लिए यह दिन काफी खास होता है. क्योंकि इस दिन मथुरा के राधा कुंड में स्नान करने से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. बताया जाता है कि पौराणिक मान्यता के अनुसार जो महिला बांझ है या उसे संतान प्राप्ति नहीं हुई है अगर वह कार्तिक कृष्ण अष्टमी पर रात 12:00 बजे राधा कुंड में जोड़े के साथ स्नान करते हैं तो उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति अवश्य होती है. व उनकी अन्य कामनाएं भी पूरी होती है इसके पीछे एक पौराणिक महत्व है.

श्रीकृष्ण पर गोवंश हत्या का पाप

बताया जाता है कि राधा कुंड का नाम पहले अधीर वन था और यह अरिष्टा सुर की नगरी थी. अरिष्टा सुर के अत्याचारों से बृजवासी काफी दुखी हो चुके थे. ऐसे में श्रीकृष्ण ने अरिष्टासुर नामक राक्षस का वध कर दिया. वहीं दूसरी तरफ जब श्री कृष्ण ने अरिष्टासुर का वध किया तो उसने गाय का रूप धारण कर लिया. ऐसे में श्रीकृष्ण पर गोवंश हत्या का पाप भी लग गया.

राधा कुंड पुकारा जाने लगा

इसके बाद श्री कृष्ण ने प्रायश्चित करने के लिए अपने बांसुरी से एक कुंड खोदा और उसमें स्नान किया और इसी के बगल में राधा जी ने भी अपने कंगन से एक कुंड खोदा और उसमें स्नान किया. इसके बाद से ही श्रीकृष्ण के इस कुंड को श्याम कुंड और राधा जी के कुंड को राधा कुंड के नाम से जाना जाता है. और कहते हैं कि कार्तिक कृष्ण अष्टमी को राधा कुंड में जोड़े से डुबकी लगाने पर पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है. इसीलिए यहां हर साल दूर-दूर से श्रद्धालु स्नान करने के लिए आते हैं.

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रिपोर्ट : राघवेंद्र गहलोत

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