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Kanpur News: बिकरु कांड में आरोपी एसओ और हल्का इंचार्ज बर्खास्त, जानें अब क्‍या हुआ?

कानपुर पुलिस ने चौबेपुर थाने के पूर्व प्रभारी विनय तिवारी और बीट प्रभारी (हल्का इंचार्ज) केके शर्मा पर आरोप है कि दोनों ने विकास दुबे को दबिश की सूचना लीक की थी. दबिश की सूचना लीक करने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया था.

By Prabhat Khabar Digital Desk, Kanpur
Updated Date
सांकेतिक तस्‍वीर
सांकेतिक तस्‍वीर
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Kanpur News: कानपुर के चर्चित बिकरू कांड मामले में चौबेपुर थाना के तत्कालीन एसओ विनय तिवारी और बीट प्रभारी केके शर्मा को बर्खास्त कर दिया गया है. दोनों विभागीय जांच में आरोपी सिद्ध हुए हैं. इसके बाद आईजी प्रशांत कुमार ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की.

दबिश की सूचना की थी लीक

कानपुर पुलिस ने चौबेपुर थाने के पूर्व प्रभारी विनय तिवारी और बीट प्रभारी (हल्का इंचार्ज) केके शर्मा पर आरोप है कि दोनों ने विकास दुबे को दबिश की सूचना लीक की थी. दबिश की सूचना लीक करने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया था. पुलिस और विकास दुबे के साथ हुई मुठभेड़ के बाद से ही संदेह के दायरे में आए विनय तिवारी से पुलिस और एसटीएफ की टीम ने गहन पूछताछ की थी. उसके बाद तत्कालीन एसओ विनय तिवारी और बीट प्रभारी केके शर्मा को निलंबित कर दिया गया था.

चौकी छोड़ सीधे थाने का मिला था चार्ज

विनय तिवारी बिकरु कांड के एक साल पहले चंदौली से कानपुर ट्रांसफर पर आया था और कानपुर में विनय की स्वाट टीम में तैनाती थी. इसके बाद इसे पहला चार्ज चौबेपुर थाने का मिला. विनय तिवारी कानपुर में कहीं चौकी इंचार्ज तक नहीं रहा लेकिन अधिकारियों की साठ-गांठ से पहला चार्ज चौबेपुर का मिला. यही नहीं विनय तिवारी इकलौता ऐसा दरोगा है, जो सबसे ज्यादा समय तक चौबेपुर में तैनात रहा. विनय तिवारी के ऊपर मुठभेड़ में मारे गए बदमाश विकास दुबे का ही हाथ बताया जाता है. विकास का खास होने के कारण ही ये इतने दिन से चार्ज पर था. कई शिकायत के बावजूद नहीं हटाया गया था.

क्या था पूरा मामला

2-3 जुलाई 2020 को कानपुर में चौबेपुर थाना क्षेत्र में बिकरू कांड हुआ था. इसमें विकास दुबे और उसके गुर्गों को पकड़ने गई पुलिस पर बदमाशों ने हमला कर दिया था. बदमाशों ने पुलिसकर्मियों पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी. इस पर डिप्टी एसपी समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. इस घटना ने तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं. इसके बाद पुलिस ने विकास दुबे के कई साथियों को एनकाउंटर में मार गिराया था जबकि खुद विकास फरार हो गया था. पुलिस ने विकास को पकड़ने के लिए ताबड़तोड़ दबिश दी थी. मगर विकास पुलिस के हाथ नहीं आया. 8 जुलाई को विकास ने उज्जैन के महाकाल मंदिर में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया. हालांकि, यूपी लाने के दौरान रास्ते में उसकी गाड़ी पलट गई और कथित रूप से फरार होने के दौरान पुलिस ने उसको एनकाउंटर में ढेर कर दिया.

रिपोर्ट: आयुष तिवारी

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