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Supaul News : किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा पीला सोना

Updated at : 15 May 2024 9:24 PM (IST)
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Supaul News : किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा पीला सोना

सुपौल में मक्का सुखाते किसान.

सुपौल के किसान मक्के की खेती कर आर्थिक रूप से उन्नत हो रहे हैं. सरकार व प्रशासन सहयोग बढ़ाये, तो किसानों की आय में और वृद्धि होगी.

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Supaul News : शंकर/अनुज, सुपौल /बलुआ बाजार. जिले के बसंतपुर प्रखंड इलाके में बड़े पैमाने पर किसान मक्के की खेती करते हैं. इस वर्ष भी किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्के की खेती की है. यह फसल अब तैयार हो रही है. इलाके के किसानों के लिए मक्का पीले सोना की तरह है. किसान इस पीले सोना को बेचकर अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करते हैं. मक्के की डिमांड बाहरी प्रदेश में बहुत ज्यादा है. लिहाजा बाहर के व्यापारी किसानों के खेत तक पहुंच कर उनसे मक्के की खरीदारी करते हैं और किसानों को तत्काल ही उसका दाम भी मिल जाता है. इसलिए मक्के को अपने पास रखने के लिए किसानों को विवशता भी नहीं होती. बसंतपुर प्रखंड क्षेत्र के तुलसीपट्टी, बलुआ, विशनपुर, निर्मली, लक्ष्मीनियां, बलभद्रपुर आदि जगहों पर मक्के की बेहतर पैदावार से किसान खुश दिखायी दे रहे हैं. बताया जा रहा है कि जिले में मक्के की खेती में प्रथम स्थान बसंतपुर प्रखंड है. जहां 60 प्रतिशत से अधिक खेती मक्के की खेती की जाती है. इसके अलावे सभी प्रखंडों में अपेक्षाकृत किसान मक्के की फसल उगाते हैं.

उत्पादन में बलभद्रपुर प्रथम व विशनपुर शिवराम पंचायत दूसरे स्थान पर

बसंतपुर प्रखंड के कृषि निरीक्षक राजीव रंजन ने बताया कि बलभद्रपुर पंचायत मक्के की खेती में प्रथम व विशनपुर शिवराम पंचायत दूसरे स्थान पर है. हर साल यहां पर सर्वाधिक खेती मक्के की ही की जाती है. 60 प्रतिशत से अधिक मक्के का उत्पादन इस प्रखंड में है और जिले में बसंतपुर प्रखंड इसमें अव्वल है.

बड़ी मंडी तक पहुंचने लगा है इलाके की मक्का

तुलसीपट्टी, विशनपुर, निर्मली, बलुआ, बलभद्रपुर, कुशहर आदि जगहों के मक्का अब पंजाब, यूपी, राजस्थान, पूर्णिया के गुलाबबाग व देश के अन्य राज्य तक के व्यापारी यहां से सीधे अपने मालवाहक गाड़ी लेकर पहुंचते हैं. छोटे किसान अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थानीय व्यापारी के हाथों मक्का बेच देते हैं. जिस कारण उन्हें कुछ हानि सहनीपड़तीहै. वर्तमान सीजन में प्रत्येक दिन 15 से 20 ट्रक इलाके में पहुंच रहे हैं. जो मक्का लोड कर मंडी ले जाते हैं.

मक्का की मिल रही कम कीमत

किसानों ने बताया कि मक्का पर एमएसपी लागू है, बावजूद सरकारी दर किसान अपने मक्के को नहीं बेच पाते हैं. हर दो से चार दिनों में 50 से 100 रुपये तक दाम नीचे लुढ़क जाता है. जिससे किसान औने-पौने भाव में मक्के की बिक्री करते हैं. यही एकमात्र फसल है जो किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाती है. लेकिन कम दाम होने से किसानों को मुनाफा नहीं मिल रहा है. बताया कि एक कट्ठा में न्यूनतम तीन क्वींटल का उत्पादन होता है. अभी मक्के का बाजार भाव 2150 रुपये प्रति क्वींटलहै. हालांकि किसानों को अपने खेत में ही इस भाव से मक्के की कीमत मिल जाती है.

किसानों ने कहा, एक कट्ठे में 6600 की होती है बचत

सुपौल के छातापुर प्रखंड के टेंगरी गांव निवासी किसान सुरेंद्र कुमार ने बताया कि मक्के की फसल किसानों के लिए नकदी फसल होती है. एक कट्ठा मक्के की फसल लगाने में 15-15 किलो यूरिया, डीएपी एवं 05 किलो पोटाश व 750 ग्राम बीज लगता है. इसके बाद चार बार पटवन करना होता है. एक कट्ठा में लगी फसल के पटवन में एक बार में 200 रुपये खर्च होता है. वहीं एक क्विंटल मक्के फसल के दौनी में 08 किलो थ्रेसर वाला ले लेता है. इसके साथ ही मक्का तोड़ने वाले मजदूर मक्का का डंढल लेता है. इस प्रकार एक कट्ठा की खेती में किसानों को 02 हजार रुपये खर्च होता है. जबकि एक कट्ठा में किसानों 04 क्विंटल ही मक्के का उत्पादन होता है. मक्का का रेट अभी 2150 रुपये क्विंटल है. इस प्रकार किसानों को एक कट्ठा में 8600 रुपये मूल्य का मक्का प्राप्त होता है. खर्च काटकर किसानों को एक कट्ठा में 6600 रुपये की बचत होती है.तुलसीपट्टी निवासी किसान अभिराम चौधरी ने कहा कि हम सब किसानों के लिए साल में सिर्फ एक बार मक्के की ही एक ऐसे खेती है, जिससे किसान के जीवकोपार्जन में सहायता मिलती है. इस क्षेत्र में सबसे अधिक मक्के की खेती की जाती है. मक्के की कीमत कम से कम 2500 तक होनी चाहिए. बसीर चौक निवासी अफ़रोज ने कहा कि सरकार एमएसपी पर मक्के की खरीद करें, तो किसानों को अधिक मुनाफा होगा. बताया कि राज्य में एमएसपी पर किसानों से मक्के की खरीद की जानी चाहिए.

कहते हैं अनुमंडल कृषि पदाधिकारी

वीरपुर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी कुंदन कुमार ने बताया कि बसंतपुर प्रखंड में लगभग 08 हजार हेक्टेयर से अधिक मक्के की खेती इस बार हुई है.एमएसपी की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है. उम्मीद है कि खरीफ फसल से मक्के की अधिप्राप्ति अन्य फसल गेहूं, धान के तरह शुरू हो जायेगी.

दो सीजन में होती है मक्के की खेती : डीएओ

जिला कृषि पदाधिकारी अजीत कुमार यादव ने कहा कि इलाके में दो सीजन में मक्के की खेती की जाती है. रबी फसल के मौसम में जिले में 40 हजार हेक्टेयर में मक्के की खेती की गयी थी. जिसमें 400 क्विंटल मक्के का बीज अनुदानित दर पर किसानों को उपलब्ध कराया गया था. खरीफ सीजन में जिले में 1155 हेक्टेयर भूमि में मक्के की फसल लगाने का लक्ष्य है. जिसमें किसानों के बीच 194 क्विंटल मक्का बीज अनुदान पर उपलब्ध कराया जायेगा.

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