Rourkela News: आरएसपी में एसटीपी उपचारित जल के पुन: उपयोग की पहल का उद्घाटन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 07 Sep 2024 11:33 PM
Rourkela News: आरएसपी ने एसटीपी में उपचारित जल का बागवानी और सड़क की सफाई में पुन: उपयोग करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया है. इस पहल से जल संसाधनों का संरक्षण हो सकेगा.
Rourkela News: जल संसाधनों के संरक्षण की प्रतिबद्धता के तहत राउरकेला इस्पात संयंत्र (आरएसपी) ने सीवेज उपचार संयंत्र (एसटीपी) में उपचारित जल को संयंत्र के अंदर बागवानी और सड़क की सफाई के लिए पुनः उपयोग करने की पहल के उद्घाटन के साथ एक कदम आगे बढ़ाया है. इस सुविधा का उद्घाटन 4 सितंबर को कार्यपालक निदेशक (वर्क्स) एसआर सूर्यवंशी ने मुख्य महाप्रबंधक (इएमडी) पीएस कानन, मुख्य महाप्रबंधक (डिजाइन और शोपस) रवि रंजन, मुख्य महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) राजकिशोर मुदुली, मुख्य महाप्रबंधक (सेवाएं) एमएनवीएस प्रभाकर, मुख्य महाप्रबंधक (विद्युत वितरण) डीके भंज, (सुरक्षा और अग्निशमन सेवाएं) आशा कार्था, मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिताएं और पर्यावरण) हीरालाल महापात्र, महाप्रबंधक प्रभारी (डब्ल्यूएमडी) देबजीत राभा सहित वरिष्ठ अधिकारियों, विभाग के अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में किया.
4 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया
यह पहल संयंत्र के भीतर जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (जेडएलडी) हासिल करने के प्रयास का हिस्सा है. जेडएलडी परियोजना के तहत आरएसपी परिसर के अंदर 4 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किया गया है. वर्तमान में इस एसटीपी से उपचारित अपशिष्ट ब्राह्मणी नदी में छोड़े जाने से पहले प्राकृतिक ऑक्सीकरण के लिए एक लैगून में बहता है. उपचारित जल का आगे उपयोग करने और वैधानिक दिशानिर्देशों का अनुपालन करने के लिए, जल प्रबंधन विभाग ने इस पानी को विभिन्न उद्यानों में और आरएसपी के भीतर सड़क की सफाई के लिए उपयोग करने की योजना की अवधारणा की.
2.44 करोड़ की लागत से चार माह में पूरी हुई परियोजना
इस परियोजना के तहत, एसटीपी उपचारित जल को लगभग 3 किमी तक फैले 200 मिमी व्यास की पाइपलाइन के माध्यम से सबमर्सिबल पंपों का उपयोग करके एसटीपी से ट्रीटमेंट सिस्टम-1 में पंप किया जाता है. मार्ग के सभी प्रमुख उद्यानों को उपचारित जल का उपयोग करने के लिए उपयुक्त टैपिंग से सुसज्जित किया गया है. जल प्रबंधन विभाग द्वारा क्रियान्वित यह परियोजना 2.44 करोड़ रुपये की लागत से लगभग चार महीने में पूरी हुई.
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