अटल बिहारी वाजपेयी से झारखंड का क्या है रिश्ता? 8वीं पुण्यतिथि पर जानिए कैसे अलग राज्य का सपना हुआ साकार
झारखंड में सभा को संबोधित करते अटल बिहारी वाजपेयी की फाइल फोटो| प्रभात खबर
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर झारखंड के गठन में उनकी भूमिका को याद किया जा रहा है. दशकों से चले आ रहे अलग राज्य के आंदोलन को वाजपेयी सरकार ने कैसे संवैधानिक रूप दिया, यह जानना महत्वपूर्ण है.
Atal Bihari Vajpayee and Jharkhand: पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज आठवीं पुण्यतिथि है. 16 अगस्त 2018 को उनके निधन के बाद हर साल इस दिन देश उन्हें याद करता है. इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया.
झारखंड के लिए अटल बिहारी वाजपेयी का नाम केवल एक पूर्व प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि अलग राज्य के गठन की निर्णायक राजनीतिक प्रक्रिया से भी जुड़ा है. जिस झारखंड के लिए दशकों तक आंदोलन चला, वह 15 नवंबर 2000 को देश के 28वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार थी.
दशकों पुराना था अलग झारखंड का आंदोलन
झारखंड को अलग राज्य बनाने की मांग अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले से चल रही थी. आदिवासी पहचान, क्षेत्रीय विकास और राजनीतिक स्वायत्तता को लेकर अलग राज्य का आंदोलन लंबे समय तक चलता रहा. झारखंड आंदोलन में अलग-अलग दौर में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भूमिका निभायी.
यानी झारखंड का गठन किसी एक नेता या एक राजनीतिक दल के प्रयास का परिणाम नहीं था. इसके पीछे लंबे समय का जनआंदोलन था. हालांकि, वर्ष 2000 में इस मांग को संवैधानिक रूप से राज्य का दर्जा दिलाने की प्रक्रिया में केंद्र की तत्कालीन वाजपेयी सरकार की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
अटल सरकार ने कैसे आगे बढ़ायी राज्य गठन की प्रक्रिया?
अलग राज्य की मांग को लेकर भाजपा ने भी 1990 के दशक में क्षेत्र में राजनीतिक समर्थन जताया था. वर्ष 1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अलग राज्य के गठन को अपने राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता दी.
केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद बिहार के पुनर्गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी. इसका सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव बिहार पुनर्गठन विधेयक, 2000 था.
लोकसभा ने इस विधेयक को 2 अगस्त 2000 को पारित किया, जबकि राज्यसभा ने 11 अगस्त को इसे मंजूरी दी. इसके बाद बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत बिहार के दक्षिणी हिस्से से अलग झारखंड के गठन का रास्ता साफ हुआ.
15 नवंबर 2000 को बना झारखंड
वह ऐतिहासिक दिन था 15 नवंबर 2000. इसी दिन बिहार से अलग होकर झारखंड देश का 28वां राज्य बना. यह तारीख भगवान बिरसा मुंडा की जयंती भी है, इसलिए राज्य गठन के लिए इस दिन को चुना गया.
झारखंड सरकार के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, राज्य का गठन बिहार के तत्कालीन दक्षिणी हिस्से से हुआ और रांची को राजधानी बनाया गया.
इस तरह दशकों से चली आ रही अलग राज्य की मांग को संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के जरिए मंजिल मिली. उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली सरकार थी.
इसलिए झारखंड की सियासत में याद किये जाते हैं अटल
झारखंड के गठन को लेकर अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका को याद करते हुए यह समझना जरूरी है कि राज्य का निर्माण लंबे जनसंघर्ष का परिणाम था, जबकि 2000 में इसे कानूनी रूप देने का काम संसद और तत्कालीन केंद्र सरकार की प्रक्रिया से हुआ.
यही वजह है कि झारखंड में अटल बिहारी वाजपेयी की राजनीतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा राज्य गठन से जुड़ा माना जाता है. उनकी पुण्यतिथि पर जब देश उन्हें याद कर रहा है, तब झारखंड के संदर्भ में उनके योगदान की चर्चा एक बार फिर स्वाभाविक हो जाती है.
अटल की पुण्यतिथि और झारखंड की कहानी
16 अगस्त 2026 को अटल बिहारी वाजपेयी की आठवीं पुण्यतिथि पर देश उन्हें उनके राजनीतिक जीवन, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र निर्माण में योगदान के लिए याद कर रहा है. वहीं झारखंड के लिए उनकी विरासत की एक खास कड़ी 15 नवंबर 2000 का राज्य गठन है.
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए संसद ने बिहार पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी की और उसी वर्ष झारखंड का जन्म हुआ. इसलिए अटल और झारखंड का रिश्ता आज भी राज्य की राजनीतिक स्मृतियों में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है.
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लेखक के बारे में
By वैभव विक्रम
वैभव विक्रम डिजिटल पत्रकार हैं. बीते 5 सालों से झारखंड की सामाचार, खेल, लाइफस्टाइल, एजुकेशन, धर्म में रुचि है और इसी विषय पर अपने विचार प्रकट करना पसंद है. वर्तमान में प्रभात खबर के झारखंड डेस्क के रांची एडिशन के जिलों की खबरों को कवर कर रहे हैं. इससे पहले वह साल 2023-24 में प्रभात खबर के खेल डेस्क की खबरें लिखा करते थे.
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