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मालगाड़ी के नीचे से मरीज को पार कराया रेलवे ट्रैक, रोंगटे खड़े कर देगा झारखंड का ये Video

Updated at : 29 Nov 2024 9:25 AM (IST)
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jharkhand video

इस तरह मालगाड़ी के नीचे से मरीज को लेकर किया रेलवे ट्रैक को पार.

Prabhat Khabar Exclusive: झारखंड से एक वीडियो सामने आया है. मालगाड़ी के नीचे से स्ट्रेचर पर मरीज को रेल लाइन पार कराने वाला यह वीडियो रोंगटे खड़े कर देगा.

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Prabhat Khabar Exclusive|चाईबासा, सुनील कुमार श्रीवास्तव : झारखंड से रोंगटे खड़े कर देने वाला एक वीडियो सामने आया है. वीडियो देख आप सन्न रह जाएंगे. एक मालगाड़ी के नीचे से स्ट्रेचर पर एक व्यक्ति को रेल लाइन पार करवाया जा रहा है. उसी मालगाड़ी के नीचे से एक-एक कर एक दर्जन से अधिक लोग रेलवे लाइन को क्रॉस करके निकल रहे हैं. जानते हैं कि ये लोग कौन हैं और क्यों ऐसा कर रहे हैं?

मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए करनी पड़ी जद्दोजहद

ये सभी एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. मरीज को एंबुलेंस तक ले जाने के लिए उन्होंने बीमार व्यक्ति को एक किलोमीटर तक कंधे पर ढोया. फिर इस मालगाड़ी के नीचे से रेलवे ट्रैक पार करवाया. ठहरिए. अभी मरीज का सफर पूरा नहीं हुआ है. अभी तो वह एंबुलेंस तक भी नहीं पहुंचा है.

गांव से एक किलोमीटर पहले रुक गयी एंबुलेंस

मामला पश्चिमी सिंहभूम जिले के जैंतगढ़ का है. मुंडासाही गांव में पिछले दिनों एक व्यक्ति की तबीयत बिगड़ गई. उसे चंपुआ अनुमंडल अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को इतनी मशक्कत करनी पड़ी. अब जानिए कि इतनी मशक्कत उन्हें क्यों करनी पड़ी? दरअसल, बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों ने 108 नंबर पर फोन करके एंबुलेंस को बुलाया. हमेशा की तरह सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव से एक किमी पहले ही रुक गयी.

रेलवे ट्रैक पर देर तक खड़ी रही मालगाड़ी

परिजन स्ट्रेचर लेकर मरीज को कंधे पर लादकर एंबुलेंस तक ले जा रहे थे. रास्ते में एक रेलवे ट्रैक है, जिस पर मालगाड़ी खड़ी थी. कुछ देर इंतजार किया कि मालगाड़ी चली जाए, तो रेलवे ट्रैक पार करें. लेकिन, मालगाड़ी काफी देर तक खड़ी रही. मरीज की हालत बिगड़ने लगी, तो तय किया कि जल्दी रेलवे ट्रैक पार करते हैं. कोई रास्ता न था, सिवाय मालगाड़ी के नीचे से रेलवे लाइन को पार करने के.

मरीज को बचाने के लिए रेलवे ट्रैक पार करने का उठाया जोखिम

मरीज की जान बचाने के लिए परिजनों ने जान जोखिम में डालकर मालगाड़ी के नीचे से स्ट्रेचर को सरकाते हुए ट्रैक के पार पहुंचाया. फिर बारी-बारी से वे लोग भी रेलवे लाइन के उस पार निकले. स्ट्रेचर पर लेटे मरीज को स्ट्रेचर समेत कंधे पर उठाया और एंबुलेंस तक पहुंचाया. इसके बाद एंबुलेंस मरीज को लेकर चंपुआ अनुमंडल अस्पताल पहुंची, जहां उसका इलाज चल रहा है.

खनिज संपदा से परिपूर्ण है पश्चिमी सिंहभूम

जैंतगढ़ उस पश्चिमी सिंहभूम जिले में आता है, जो खनिज संपदा से परिपूर्ण है, लेकिन गांवों तक सड़क नहीं बनी है, जिसकी वजह से लोगों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. हर साल सरकार अरबों रुपये सड़क और स्वास्थ्य योजनाओं पर खर्च करती है, लेकिन धरातल पर ऐसी परिस्थितियां उस खर्च पर सवाल खड़े करती है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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