10 किमी दूर पैदल चल ग्रामीण लाते हैं अनाज

Updated at : 14 Nov 2016 11:47 PM (IST)
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10 किमी दूर पैदल चल ग्रामीण लाते हैं अनाज

मनोहरपुर. सारंडा में विकास योजनाओं का हाल बुरा मनोहरपुर/चिरिया : सारंडा के जंगल में बसे छोटानागरा पंचायत अंतर्गत बाहदा गांव के ग्रामीण जंगल की ओर सड़क बनाने से नाराज हैं. ग्रामीणों की मांग थी की मनोहरपुर से जामदा जाने वाली मुख्य सड़क से तेतलीघाट होते हुए बाहदा गांव की सड़क का पक्कीकरण की जाये. ग्रामीणों […]

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मनोहरपुर. सारंडा में विकास योजनाओं का हाल बुरा

मनोहरपुर/चिरिया : सारंडा के जंगल में बसे छोटानागरा पंचायत अंतर्गत बाहदा गांव के ग्रामीण जंगल की ओर सड़क बनाने से नाराज हैं. ग्रामीणों की मांग थी की मनोहरपुर से जामदा जाने वाली मुख्य सड़क से तेतलीघाट होते हुए बाहदा गांव की सड़क का पक्कीकरण की जाये. ग्रामीणों का कहना है कि बाहदा गांव से जंगल की ओर जाने वाली सड़क को पक्कीकरण किया जा रहा है,
जो ग्रामीणों के लिये अनुपयोगी साबित होगी. मालूम हो की मुख्य सड़क से बाहदा गांव जाने वाली सड़क को सात किलोमीटर तक पक्कीकरण किया गया है. बाकी सड़क जर्जर है. बारिश के दिनों में उक्त सड़क पर ग्रामीणों को आवागमन करने में काफी परेशानियों क सामना करना पड़ता है.
हाल ही में मनोहरपुर में आयोजित जनता दरबार में ग्रामीणों ने एक मांग पत्र सौंप कर उपायुक्त से कहा था बहदा के अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शुमार होने के कारण यहां सरकारी महकमे के पदाधिकारी व कर्मचारी नहीं आते. जिसके कारण ग्रामीणो ंको जन वितरण प्रणाली के खाद्यान्न उठाव के लिए 10 किमी बाईहातू जाना पड़ता है.
बहदा में लगे सभी चापानल खराब: 480 जनसंख्या वाले इस गांव मे पेयजल की सुविधा नहीं है. सिर्फ स्कूल में बना चापाकल ठीक है, बाकी सभी खराब पड़े हैं. यहां के लोगों को नाले-नदी के पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता है. इन लोगों जीविका का साधन खेती है. हाथियों द्वारा फसल नष्ट कर दिये जाने से यहां भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.
स्वास्थ सुविधा का है अभाव:स्वास्थ सेवा के नाम पर यहां सिर्फ एक आंगनबाड़ी ही है. गांव में प्रसूता समेत कई बच्चे कुपोषण से ग्रसित हैं. सेल विगत दो -तीन वर्षों से स्वास्थ सेवा के नाम पर आधा दर्जन गाडियां सारंडा में चलायी जा रही है. ग्रामीणों की माने तो विगत चार वर्षों में सेल की स्वास्थ सेवा के वाहन गांव नहीं आये हैं.
बाहदा का विकास नहीं, तो वोट नहीं:बाहदा के ग्रामीण सरकारी उपेक्षा के कारण अब गोलबंद होने लगे हैं. ग्रामीणों ने कहा कि कि सड़क व गांव विकास नहीं होगा, तो हमलोग अब वोट का बहिष्कार करेंगे.
जंगल की ओर सड़क निर्माण का विरोध करते बहदा के ग्रामीण.
जंगली जनवरों के लिए सड़क बनायी जा रही है. ग्रामीणों की परवाह सरकार को नहीं है.मुख्य मार्ग से गांव तक पहुंच पथ का पक्कीकरण नहीं किया गया,तो ग्रामीण आने वाले चुनाव का बहिष्कार करेंगे.मंगल सिंह मांझी, ग्रामीण
सड़क बननी चाहिये,पहले मुख्य सड़क से गांव पहुंचने वाली सड़क बनानी चाहिये थी, जंगल की ओर जाने वाली सड़क निर्माण करने के पीछे सरकार की मंशा समझ से परे है.
कामेश्वर माझी, ग्रामीण
हमलोग अधिकारी के पास सड़क की समस्या को लेकर गये थे, कि्तुं अाश्वासन के सिवा कुछ हासिल नहीं हुआ. प्रखंड प्रमुख हमारे पंचायत की है, बावजूद ग्रामीणो की मांगों को दरकिनार किया जा रहा है.
मुंडा रोया सिदु, ग्रामीण
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