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चाईबासा : फोन रिपेयरिंग सीख रोजगार का रास्ता बना रहीं 23 गरीब बेटियां

चाईबासा के कल्याण गुरुकुल में फोन असेंबल व रिपेयरिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. गुरुकुल में कोल्हान की 23 गरीब बेटियां प्रशिक्षण लेकर रोजगार का रास्ता तैयार कर रही हैं.

चाईबासा : चाईबासा में कल्याण विभाग की ओर से संचालित कल्याण गुरुकुल है. इस गुरुकुल में कोल्हान की 23 युवतियां अपना भविष्य संवार रही हैं. यहां बेटियां आई फोन-स्मार्ट फोन युवतियों का मानना है कि पढ़ाई के साथ-साथ हुनरमंद भी होना जरूरी है. यहां की ज्यादातर युवतियां किसान परवार से हैं. इनके घरों की माली स्थिति अच्छी नहीं है, जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें.

खराब आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी

मैं सदर प्रखंड के एदेल गांव की रहने वाली हूं. मैंने चक्रधरपुर के जवाहरलाल नेहरू कॉलेज से बीए किया. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण मुझे पढ़ाई छोड़ देनी पड़ी. मैं रोजगार की तलाश में थी. इसलिए प्रशिक्षण ले रही हूं. पार्वती बोदरा———————–

मैं सरायकेला- खरसावां जिले के राजनगर के जामडी गांव की रहने वाली हूं. मैंने चाईबासा के महिला कॉलेज से बीए किया. घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण अब स्मार्ट फोन एसेंबल करना सीख रही हूं, ताकि मुझे जॉब मिल सके. -मेजो हांसदा——————

मैं खूंटपानी प्रखंड के सांगाजाटा के चिरू गांव की रहने वाली हूं. मैंने कस्तूरबा से इंटर की परीक्षा पास की. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से जॉब करना चाहती हूं. लेकिन बिना हुनर के काम नहीं मिल पायेगा. स्मार्टफोन असेंबल करना सीख रही हूं. -पानो मुंडरी

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मैं सोनुआ की रहने वाली हूं. मैंने झीलरूंवा हाई स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की हूं. अब आगे की पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है. पिता किसान हैं. खेती-किसानी से घर को चलाना मुश्किल हो रहा है. मैं आगे की पढ़ाई कर सरकारी नौकरी करना चाहती हूं. -रानी बोदरा

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मैं जगन्नाथपुर के बड़ानंदा की रहने वाली हूं. मैंने 2020 में 12वीं परीक्षा पास की थी. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी. मैं जॉब करना चाहती हूं. इसलिए गुरुकुल में स्मार्ट फोन रिपेयर करना सीख रही हूं. -रेशमा बोबोंगा

———————————मैं चाकुलिया की रहने वाली हूं. मैंने पीजी प्रथम वर्ष तक की पढ़ाई की है. पिता पेशे से किसान हैं. घर की स्थिति अच्छी नहीं है. मैं जॉब कर पैसा कमाना चाहती हूं. ताकि अपना खर्च खुद वहन कर सकूं. माता-पिता को सहायता कर सकूं. मंजू कुमारी हांसदा

——————————————–मैं जमशेदपुर के बनामगुटू गांव की रहने वाली हूं. मेरे पिता किसान थे. उनकी मृत्यु 2023 में बीमारी की वजह से हो गयी थी. घर की स्थिति दयनीय है. मैं इंटर फर्स्ट सेमेस्टर तक पढ़ाई कर पायी. मां मजदूरी कर तीन बहनों का पालन- पोषण करती है. अनिता सोरेन

———————————-मैं जमशेदुपर के बनामगुटू की निवासी हूं. पिता पेशे से किसान हैं. मैं 12वीं तक की पढ़ाई कर चुकी हूं. मैं आगे भी पढ़ना चाहती हूं, लेकिन आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहने के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी. हम पांच भाई-बहन हैं. पुनिता हांसदा—————————मैं हाटगम्हरिया के सिंदरीगोरी गांव की रहने वाली हूं और कस्तूरबा से 12वीं पास हूं. मंत्री दीपक बिरुवा गांव के हिसाब से हमारे दादू लगते हैं. पिता किसान हैं. मेरे घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. घर में सहयोग करना चाहती हूं. सुनीता बिरुआ

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मैं सदर प्रखंड के पातागुईरा गांव की रहने वाली हूं. कस्तूरबा से 12वीं पास हैूं. मैं बैंक में नौकरी करना चाहती हूं. आगे पढ़ाई करनी है. घर की स्थिति ठीक नहीं रहने के कारण आगे पढ़ाई में परेशानी हो रही है. काम सीखकर जॉब करना चाहती हूं. -मनीषा सुंडी————————-

मैं सोनुआ प्रखंड के रूपापोस गांव की रहने वाली हूं. मैं 2023 में बीए पास की हूं. पिता पेशे से किसान हैं. घर हम दो भाई और दो बहने हैं. आमदनी नहीं है. मैं आगे व्यापार शुरू करना चाहती हूं. इसलिए स्मार्ट फोन असेंबल करना सीख रही हूं. -पानी दोंगो

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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