रेलवे पार्क में धूम रहे जानवर बच्चों का बचपन घरों में कैद

चक्रधरपुर : रेलवे पोर्टरखोली व लोको कॉलोनी के बीच स्थित बाल उद्यान रखरखाव के अभाव में जर्जर होने के कारण बच्चों का बचपन कैद हो गया है. पार्क में लगाये झूले समेत अन्य मनोरंजन के साधन नहीं बचे हैं. इस कारण बच्चे भी अब यहां खेलने नहीं आते हैं. स्कूल से आने के बाद बच्चों […]
चक्रधरपुर : रेलवे पोर्टरखोली व लोको कॉलोनी के बीच स्थित बाल उद्यान रखरखाव के अभाव में जर्जर होने के कारण बच्चों का बचपन कैद हो गया है. पार्क में लगाये झूले समेत अन्य मनोरंजन के साधन नहीं बचे हैं. इस कारण बच्चे भी अब यहां खेलने नहीं आते हैं. स्कूल से आने के बाद बच्चों का अधिकांश समय टीवी पर या फिर मोबाइल पर वीडियो गेम खेलने में व्यतीत होता है. ऐसे में बच्चों का मानसिक व शारीरिक विकास प्रभावित हो रहा है.
एक समय था जब उद्यान में खेल संसाधनों के अलावा फाउंटन आदि सुविधाएं थी, शाम में पार्क बच्चों से भरा रहता था. लेकिन रेलवे की उदासीनता व सुरक्षा के अभाव में बाल उद्यान का अस्तित्व अब मिटने के कगार पर है. मालूम हो कि वर्ष 2002 में तत्कालीन डीआरएम शिवचंद्र झा ने पोर्टरखोली बाल उद्यान का उदघाटन किया था. अब पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है. यहां मवेशी या तो विचरण करते हैं, या फिर उन्हें टूटे झूलों के पोल पर बांध दिया जाता है.
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