सिकल सेल एनिमिया की गिरफ्त में आये एक ही परिवार के तीन बच्चे
Updated at : 26 Nov 2017 5:44 AM (IST)
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शिकारी मुखी के परिवार को हर माह जरूरत पड़ती है 4 यूनिट रक्त चक्रधरपुर : बंदगांव प्रखंड के कराइकेला पंचायत अंतर्गत डुकसुरी हरिजन बस्ती में एक ही परिवार के तीन बच्चे सिकलसेल एनिमिया बीमारी से ग्रसित है. इस परिवार को प्रत्येक माह चार यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है. डुकसुरी गांव निवासी शिकारी मुखी के […]
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शिकारी मुखी के परिवार को हर माह जरूरत पड़ती है 4 यूनिट रक्त
चक्रधरपुर : बंदगांव प्रखंड के कराइकेला पंचायत अंतर्गत डुकसुरी हरिजन बस्ती में एक ही परिवार के तीन बच्चे सिकलसेल एनिमिया बीमारी से ग्रसित है. इस परिवार को प्रत्येक माह चार यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है. डुकसुरी गांव निवासी शिकारी मुखी के तीन बच्चे छह वर्षीय सत्या मुखी, आठ वर्षीय पूनम मुखी व दस वर्षीय स्वीटी मुखी सिकल सेल एनिमिया के शिकार है. पिछले नौ वर्षों से यह परिवार बीमारी को लेकर परेशान है. तीनों बच्चों को जन्म के एक साल बाद ही बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया.
सरकारी मदद दिलाने की हो रही है कोशिश : तिरथ जामुदा: कराइकेला गोपालपुर निवासी समाजसेवी तिरथ जामुदा ने कहा कि परिवार की स्थिति दयनीय है. बीमारी से तीन बच्चे ग्रसित होने की सूचना भाजपा जिलाध्यक्ष दिनेश चंद्र चंदी को दिया गया. श्री नंदी के प्रयास से तीनों बच्चों का चाईबासा सदर अस्पताल में इलाज कराया गया. सिविल सर्जन ने प्रत्येक माह तीन यूनिट रक्त नि:शुल्क देने की बात कही. वहीं कल्याण विभाग से 10-10 हजार रुपये अनुदान दिलाने के लिए आवेदन दिया गया है. सरकारी मदद दिलाने को कोशिश हो रही है.
हमेशा बीमार रहने से नहीं पढ़ाई कर पा रही है पूनम : शिकारी मुखी की पुत्री पूनम मुखी की तबीयत सिकलसेल एनिमिया बीमारी होने से हमेशा खराब रहती है. जिस कारण वह पढ़ाई नहीं कर पा रही. गांव में संचालित डुकसुरी उत्क्रमित मवि में बेटा सत्या मुखी कक्षा एक व स्वीटी मुखी कक्षा पांच में पढ़ाई कर रही है. तीनों बच्चे का स्वास्थ्य काफी कमजोर है.
सिकलसेल एनिमिया आनुवांशिक है: डॉ आर एन सोरेन
अनुमंडल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी आरएन सोरेन ने कहा कि सिकल सेल एनिमिया बीमारी अनुवांशिक है. यह रोग पीढ़ी दर पीढ़ी रहता है. यह रक्त से संबंधित बीमारी है. जांच के बाद ही इस बीमारी का खुलासा होता है.
मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता हूं : शिकारी
शिकारी मुखी ने कहा कि मैं काफी गरीब हूं. प्रत्येक दिन मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता हूं. तीनों बच्चे भयावह बीमारी के शिकार है. परिवार में इससे पूर्व यह बीमारी किसी को नहीं थी. इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र जाता हूं. जहां बच्चों में रक्त की कमी बतायी जाती है.
पति की आय से नहीं होता गुजारा : सरस्वती
बच्चों की मां सरस्वती मुखी ने कहा कि पति शिकारी मुखी की आय से घर का गुजारा ठीक से नहीं होता. बच्चों का इलाज कैसे कराये. प्रत्येक दिन बच्चों की बिगड़ती तबीयत को लेकर चिंतित रहती हूं. सबसे ज्यादा पूनम मुखी की तबीयत खराब रहती है. उसे 15 दिनों में एक यूनिट जबकि सत्या व स्वीटी को महीने में एक-एक यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है.
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