बिलाइपदा: टाटा स्पंज के भूमि अधिग्रहण की जांच के आदेश

Updated at : 23 Nov 2017 7:38 AM (IST)
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बिलाइपदा: टाटा स्पंज के भूमि अधिग्रहण की जांच के आदेश

आरआइ व तहसीलदार को जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा बड़बिल : चंपुआ की सब कलेक्टर पारुल पटवारी ने बिलाइपदा स्थित टाटा स्पंज आयरन लिमिटेड और स्थानीय ग्रामीणों के बीच मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद सुलझाने की पहल की है. उन्होंने बिलाइपदा आरआइ एवं बड़बिल तहसीलदार को प्लांट से विस्थापित रैयतों के दस्तावेजों की […]

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आरआइ व तहसीलदार को जांच कर प्रतिवेदन सौंपने को कहा

बड़बिल : चंपुआ की सब कलेक्टर पारुल पटवारी ने बिलाइपदा स्थित टाटा स्पंज आयरन लिमिटेड और स्थानीय ग्रामीणों के बीच मुआवजे को लेकर चल रहा विवाद सुलझाने की पहल की है. उन्होंने बिलाइपदा आरआइ एवं बड़बिल तहसीलदार को प्लांट से विस्थापित रैयतों के दस्तावेजों की जांच का आदेश दिया है. इसके अनुसार तीन गांवों, लोहंडा, भागलपुर और बिलाइपदा के 75 रैयतों से संबंधित रेकॉर्ड के अनुसार जमीन की विस्तृत जानकारी एवं 66 के हाल रेकॉर्ड जमा करने का आदेश दिया है. जांच के बाद पता ही चलेगा कि कंपनी ने ग्रामीणों से जितनी जमीन ली,
उन्हें मुआवजा मिला या नहीं. जांच के बाद शायद
यह पता चले कि सभी जमीनदाताओं को कंपनी द्वारा मुआवजा दिया जा चुका है. कंपनी से विस्थापित ग्रामीणों के आन्दोलन की अगुवाई कर रहे आदिवासी संगठन हो सेयां मसकल आखाड़ा के अनुसार जांच से ग्रामीणों को ही लाभ मिलेगा. जांच में कंपनी ने वास्तव में कितनी जमीन ली, यह भी सामने आ जायेगा.
पूर्व सब कलेक्टर टाटा स्पंज को लगा चुके हैं फटकार
कंपनी एवं ग्रामीणों के बीच मुआवजा को लेकर चल रहे विवाद के दौरान 10 जुलाई को पूर्व चंपुआ सब कलेक्टर गौरहरि बेहरा के कार्यालय में कंपनी प्रबंधन और हो सेयां मसकल अखाड़ा के बीच बैठक हुई थी, जिसमें तत्कालीन सब कलेक्टर के साथ बड़बिल के पूर्व तहसीलदार अरुण कुमार मल्लिक और जोड़ा थाना प्रभारी सुमित कुमार सोरेन भी उपस्थित थे. बैठक में सात सूत्री मांगों में से केवल पर सहमति बनी, जिसके अनुसार 25 सितंबर तक 30 ग्रामीणों को अस्थायी नियुक्ति देने तथा छह महीने बाद उन्हें स्थायी करने पर सहमति बनी. अन्य ग्रामीणों को दूसरे चरण में कंपनी नियुक्ति देने की बात हुई.
लेकिन बैठक के दो दिन बाद ही कंपनी प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कंपनी द्वारा ग्रामीणों को सिर्फ ठेके पर नियुक्त करने की बात कही गई थी तथा स्थायी नियुक्ति की बात सब कलेक्टर कार्यालय में गलत सुनी गयी. तत्कालीन सब कलेक्टर गौरहरि बेहरा ने कंपनी को ध्यान दिलाया कि बैठक उनकी अध्यक्षता में हुई तथा सारी चर्चाएं उनकी उपस्थिति में हुई, जिसमें कंपनी ने 25 सितंबर तक 30 ग्रामीणों को अस्थायी नियुक्ति देने और 6 माह बाद उन्हें स्थायी करने की बात कही थी.
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