खेती-किसानी: दलहन ने पकड़ी रफ्तार, तेलहन-मोटे अनाज अब भी लक्ष्य से दूर
खेती किसानी
सरायकेला-खरसावां जिले में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिला है, जहां दलहन और मक्का की खेती ने ज़बरदस्त रफ्तार पकड़ी है. दलहन का रकबा पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ा है, जबकि मक्का भी अपने लक्ष्य के करीब है.
खरसावां: फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच सरायकेला-खरसावां जिले में इस वर्ष दलहन और मक्का की खेती ने रफ्तार पकड़ी है. दलहन का रकबा पिछले वर्ष के मुकाबले करीब आठ हजार हेक्टेयर बढ़ा है, जबकि मक्का भी अपने निर्धारित लक्ष्य के करीब पहुंच गया है. दूसरी ओर, तेलहन और मोटे अनाज की खेती अब भी किसानों के बीच अपेक्षित पकड़ नहीं बना सकी है. खासकर ज्वार और बाजरे की खेती का रकबा इस वर्ष भी शून्य है, जो कृषि विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
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दलहन का रकबा 25 हजार हेक्टेयर के पार
कृषि विभाग की 31 अगस्त तक की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में दलहन की खेती के लिए 34,600 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. इसके मुकाबले अब तक 25,060 हेक्टेयर में दलहन की खेती हुई है. यानी 72.43 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है. पिछले वर्ष दलहन का आच्छादन 17,157 हेक्टेयर था.
इस वर्ष अरहर, उड़द और मूंग की खेती में बढ़ोतरी हुई है. जिले में कुल दलहन क्षेत्र का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं तीन फसलों का है. अरहर का आच्छादन 6,012 हेक्टेयर से बढ़कर 9,599 हेक्टेयर, उड़द 6,124 से बढ़कर 9,720 हेक्टेयर और मूंग 3,521 से बढ़कर 5,140 हेक्टेयर हो गया है.
तेलहन में सिर्फ मूंगफली और तिल की खेती
तेलहन की स्थिति अब भी कमजोर बनी हुई है. 1,390 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक सिर्फ 373 हेक्टेयर में तेलहन की खेती हुई है. यह निर्धारित लक्ष्य का 26.83 प्रतिशत है.
इसमें 352 हेक्टेयर में मूंगफली और 21 हेक्टेयर में तिल की खेती हुई है. वहीं सूर्यमुखी, सोयाबीन, सरगुजा और अंडी की खेती का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इन फसलों का आच्छादन नहीं हो सका. हालांकि, मूंगफली की खेती में पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है. 2025 में 265 हेक्टेयर के मुकाबले इस वर्ष इसका रकबा बढ़कर 352 हेक्टेयर हो गया है.
मडुआ की खेती में बढ़ोतरी, ज्वार-बाजरा अब भी शून्य
मोटे अनाज में मडुआ की खेती ने जरूर उम्मीद जगायी है. 990 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले इस वर्ष 281 हेक्टेयर में मडुआ की खेती हुई है. पिछले वर्ष मडुआ का आच्छादन महज 65 हेक्टेयर था. यानी एक साल में इसका रकबा 216 हेक्टेयर बढ़ा है.
इसके बावजूद ज्वार और बाजरे की खेती को लेकर किसानों का रुझान नहीं बदला है. इन दोनों फसलों का आच्छादन इस वर्ष भी नहीं हो सका.
मक्का की खेती लक्ष्य के 88 प्रतिशत तक पहुंची
मक्का की खेती जिले में बेहतर स्थिति में है. 6,900 हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले 6,076 हेक्टेयर में मक्का लगाया गया है. यह निर्धारित लक्ष्य का करीब 88 प्रतिशत है. पिछले वर्ष मक्का का आच्छादन 5,176 हेक्टेयर था.
आंकड़ों से साफ है कि जिले में किसान दलहन और मक्का जैसी फसलों को अपनाने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं. वहीं तेलहन की अन्य फसलों के साथ ज्वार और बाजरे की खेती को बढ़ावा देना कृषि विभाग के लिए अब भी चुनौती बना हुआ है.
सरायकेला-खरसावां में फसलों का आच्छादन
दलहन:
- अरहर: लक्ष्य 12,000 हेक्टेयर, 2025 में 6,012 हेक्टेयर, 2026 में 9,599 हेक्टेयर
- उड़द: लक्ष्य 12,000 हेक्टेयर, 2025 में 6,124 हेक्टेयर, 2026 में 9,720 हेक्टेयर
- मूंग: लक्ष्य 6,500 हेक्टेयर, 2025 में 3,521 हेक्टेयर, 2026 में 5,140 हेक्टेयर
- कुल्थी: लक्ष्य 2,000 हेक्टेयर, 2025 में 648 हेक्टेयर, 2026 में शून्य
- अन्य दलहन: लक्ष्य 2,100 हेक्टेयर, 2025 में 852 हेक्टेयर, 2026 में 601 हेक्टेयर
- कुल दलहन: लक्ष्य 34,600 हेक्टेयर, 2025 में 17,157 हेक्टेयर, 2026 में 25,060 हेक्टेयर
तेलहन:
- मूंगफली: लक्ष्य 500 हेक्टेयर, 2025 में 265 हेक्टेयर, 2026 में 352 हेक्टेयर
- तिल: लक्ष्य 100 हेक्टेयर, 2025 में 35 हेक्टेयर, 2026 में 21 हेक्टेयर
- सूर्यमुखी: लक्ष्य 100 हेक्टेयर, आच्छादन शून्य
- सोयाबीन: लक्ष्य 250 हेक्टेयर, आच्छादन शून्य
- सरगुजा: लक्ष्य 400 हेक्टेयर, आच्छादन शून्य
- अंडी: लक्ष्य 40 हेक्टेयर, आच्छादन शून्य
- कुल तेलहन: लक्ष्य 1,390 हेक्टेयर, 2025 में 300 हेक्टेयर, 2026 में 373 हेक्टेयर
मोटा अनाज:
- लक्ष्य 990 हेक्टेयर, 2025 में 65 हेक्टेयर, 2026 में 281 हेक्टेयर
मक्का:
- लक्ष्य 6,900 हेक्टेयर, 2025 में 5,176 हेक्टेयर, 2026 में 6,076 हेक्टेयर
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