Seraikela Kharsawan News : अब अफीम नहीं, वैकल्पिक खेती ही समाधान : एसपी
Updated at : 04 Nov 2025 12:00 AM (IST)
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सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस ने वर्तमान फसलीय वर्ष में अफीम की अवैध खेती की संभावना को शून्य करने के उद्देश्य से प्री-कल्टीवेशन ड्राइव शुरू की है.
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खरसावां.
सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस ने वर्तमान फसलीय वर्ष में अफीम की अवैध खेती की संभावना को शून्य करने के उद्देश्य से प्री-कल्टीवेशन ड्राइव शुरू की है. इस अभियान का पहला चरण 8 से 22 सितंबर तथा दूसरा चरण 3 से 10 अक्तूबर तक चलाया गया था. अब दो नवंबर से तीसरे चरण की शुरुआत की गयी है, जो 17 नवंबर तक चलेगा. एसपी मुकेश कुमार लुणायत ने बताया कि इस दौरान पुलिस टीम विभिन्न माध्यमों से अवैध अफीम खेती की रोकथाम और वैकल्पिक कृषि को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को जागरूक करेगी. साथ ही लोगों को अफीम की खेती नहीं करने की शपथ भी दिलायी जायेगी.तीसरे चरण में क्या होगा विशेष
इस चरण का उद्देश्य केवल अफीम की खेती रोकना ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों को वैकल्पिक खेती, पशुपालन और सरकारी योजनाओं से जोड़ना भी है. इस अभियान के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गयी है, जिसके तहत विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर वृहद जागरुकता अभियान चलाया जायेगा. अफीम प्रभावित थाना क्षेत्रों के थाना प्रभारी, सीओ व बीडीओ, वन एवं कृषि विभाग कर्मियों और अन्य अधिकारियों के साथ पंचायतवार अभियान संचालित किया जायेगा. प्रत्येक सप्ताह एसपी व एसडीपीओ स्तर से स्थानीय जनप्रतिनिधियों मानकी, मुंडा, मुखिया, ग्राम प्रधान आदि के साथ बैठक कर शपथ कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. एनडीपीएस अधिनियम की धाराओं के तहत कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जायेगी और धारा 47 के तहत नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी होगी. विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सिविल सोसाइटी के सहयोग से जाुकता अभियान और शपथ कार्यक्रम चलाये जायेंगे. विनष्ट क्षेत्रों का भौतिक सत्यापन किया जायेगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन स्थानों पर पुनः अफीम की खेती की तैयारी नहीं की जा रही है.कुचाई, खरसावां, कांड्रा, चौका और ईचागढ़ क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
एसपी ने बताया कि पिछले फसलीय वर्ष 2024-25 में सरायकेला-खरसावां जिला में कुल 678.96 एकड़ क्षेत्रफल में अफीम की अवैध खेती का विनष्टीकरण किया गया था. अवैध अफीम खेती के दृष्टिकोण से कुचाई, खरसावां, कांड्रा, चौका और ईचागढ़ थाना क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं. पुलिस ने बताया कि इस बार विशेष रूप से इन प्रभावित गांवों में व्यापक जनजागरुकता अभियान चलाया जायेगा ताकि ग्रामीण अवैध खेती छोड़कर वैकल्पिक आजीविका अपनाएं और इस अवैध व्यापार की जड़ें पूरी तरह समाप्त की जा सकें.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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