Supreme Court ने प्रदर्शनकारियों की FIR की रद्द, Jharkhand के छात्रों पर दर्ज केस का क्या होगा? जानें कितने लोगों पर हुई कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट, फोटो एक्स
सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से देशभर के छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है, लेकिन झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलनकारियों के मामले में स्थिति अलग है. जानें आपके खिलाफ दर्ज FIR का क्या होगा.
रांची: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर एक अहम फ़ैसला सुनाया है. इस फ़ैसले के बाद झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन से संबंधित दर्ज FIR पर भी चर्चा शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR को बंद करने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि इन मामलों में आगे जांच या कार्रवाई नहीं की जाएगी और संबंधित FIR को बंद माना जाएगा. हालांकि झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा के ख़िलाफ़ हुए आंदोलन से जुड़े मामले इस आदेश के दायरे में सीधे नहीं आते हैं.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर संविधान की अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए कहा कि 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR को आगे नहीं बढ़ाया जाए और उन्हें बंद माना जाए. कोर्ट ने यह आदेश देशभर के मामलों पर लागू किया है. यह ताक़त सुप्रीम कोर्ट को ऐसे आदेश देने की इजाज़त देती है जो इंसाफ़ पक्का करने के लिए ज़रूरी हों.
हालांकि दिल्ली में प्रदर्शन स्थल पर मौजूद ऐसे 2,873 लोगों के ख़िलाफ़ एक अलग FIR दर्ज करने की इजाज़त दी गयी है, जिनके गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात सामने आयी है. यह कार्रवाई सिर्फ़ प्रदर्शन में शामिल होने के कारण नहीं, बल्कि दूसरे गंभीर आरोपों से संबंधित होगी.
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झारखंड में JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान 950 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों पर दर्ज हुईं FIR
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ चले आंदोलन के दौरान रांची में अलग-अलग चरणों में प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज हुई.
10 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के टकराव के बाद, लगभग 600 लोगों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की गई. इसमें 100 नामजद और क़रीब 500 अज्ञात प्रदर्शनकारी शामिल बताए गए थे.
इसके बाद 21 अगस्त को रांची में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद भी कई FIR दर्ज की गईं. एक रिपोर्ट के मुताबिक़ तीन मामलों में 14 नामजद और 200 से ज़्यादा अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया.
इसी घटनाक्रम से जुड़े दूसरे मामलों को मिलाकर रांची और हज़ारीबाग़ में 950 से ज़्यादा लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज होने की रिपोर्ट सामने आयी थी. इसमें अलग-अलग FIR में नामजद और अज्ञात आरोपी शामिल हैं.
क्या 950 से ज़्यादा छात्रों की FIR भी रद्द होगी?
अभी ऐसा नहीं कहा जा सकता. यह ख़बर झारखंड के 950 से ज़्यादा आंदोलनकारियों के लिए यक़ीनन अनिश्चितता भरी है, क्योंकि वे चिंतित हैं कि क्या उनके मामले भी तुरंत बंद नहीं होंगे और आगे की कानूनी कार्रवाई की क्या उम्मीद है.
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है. सुप्रीम कोर्ट का मंगलवार का आदेश 20 से 25 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से संबंधित FIR पर है. झारखंड का JPSC-JSSC आंदोलन 25 जुलाई से शुरू हुआ था और 10 अगस्त तथा 21 अगस्त को हुए प्रदर्शनों के बाद राज्य में अलग-अलग FIR दर्ज हुईं. इसलिए सिर्फ़ सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश के आधार पर झारखंड के इन मामलों को अपने-आप ख़त्म मानना सही नहीं होगा.
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झारखंड के छात्रों के लिए अब क्या रास्ता?
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद झारखंड के आंदोलनकारियों के सामने अब यह सवाल ज़रूर उठेगा कि क्या उनके ख़िलाफ़ दर्ज FIR को भी इसी तरह ख़त्म कराया जा सकता है.
इसके लिए संबंधित मामलों में अलग क़ानूनी प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है. अगर झारखंड सरकार या पुलिस इन मामलों को वापस लेने का फ़ैसला करती है, तो उसके लिए संबंधित क़ानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी. वहीं आरोपी बनाए गए प्रदर्शनकारी अदालत का दरवाज़ा भी खटखटा सकते हैं.
10 अगस्त की FIR बनी थी आंदोलन का बड़ा मोड़
JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा की ओर मार्च किया था. पुलिस के साथ टकराव के बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था. इसके बाद क़रीब 600 प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज होने की बात सामने आयी थी.
इसके बाद आंदोलन और तेज़ हुआ और 21 अगस्त को रांची तथा हज़ारीबाग़ में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के बाद बड़ी संख्या में लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए गए. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक़ इन मामलों को मिलाकर 950 से ज़्यादा लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई.
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अब झारखंड के आंदोलनकारियों की नज़र अगले क़ानूनी क़दम पर
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से देशभर के उन छात्र प्रदर्शनकारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनके ख़िलाफ़ 20 से 25 जुलाई के प्रदर्शनों को लेकर FIR दर्ज हुई थी. लेकिन झारखंड के JPSC-JSSC आंदोलनकारियों के लिए स्थिति अलग है.
यानी फ़िलहाल 950 से ज़्यादा लोगों के ख़िलाफ़ दर्ज झारखंड की FIR सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश से अपने-आप रद्द नहीं हुई है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से सीधे तौर पर झारखंड के मामले अपने-आप रद्द नहीं हुए हैं, फिर भी आंदोलनकारियों के पास इंसाफ़ पाने के क़ानूनी रास्ते खुले हैं, जहाँ सरकार और अदालतें अहम भूमिका निभाएंगी.
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