कर्मियों की कमी से जूझ रहा सहकारिता विभाग, कैसे दूर होगी समस्याएं

साहिबगंज (फाइल फोटो)
तीन वर्षों में बनीं 54 समितियां, मछुआरों की पहल रही सबसे आगे
साहिबगंज
सहकारिता विभाग किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है. यह विभाग किसानों, मछुआरों और अन्य सहकारी समूहों को मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग, ऋण, अनुदान और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराता है. यही कारण है कि सहकारिता क्षेत्र को ग्रामीण विकास की रीढ़ कहा जाता है. लेकिन साहिबगंज जिले में सहकारिता विभाग स्वयं कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है. सवाल उठता है कि जब विभाग के पास ही पर्याप्त जनशक्ति नहीं है, तो वह किसानों और समितियों की समस्याओं का समाधान कैसे करेगा. पिछले तीन वर्षों में सहकारिता विभाग ने जिले में 54 समितियों का निबंधन किया है. इनमें मछुआरों की संख्या सबसे अधिक है. मछुआरे समितियों के माध्यम से जल स्रोतों का प्रबंधन और मछली पालन जैसी गतिविधियों को संगठित ढंग से संचालित कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं.किसानों की उम्मीदें और विभाग की चुनौतियां
जिले में सहकारिता समितियों की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन कर्मचारियों की कमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आयी है. किसान और मछुआरे सहकारिता से बड़ी उम्मीदें रखते हैं, पर विभाग में पद रिक्त रहने से उनकी अपेक्षाओं पर असर पड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार समय रहते खाली पदों पर बहाली करे तो किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा, बल्कि सहकारिता समितियों का संचालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा.वर्षवार समिति गठन इस प्रकार रहा:
2022: 15 समितियां
2023: 25 समितियां2024: 11 समितियां
2025 (अब तक): 3 समितियांजिला कार्यालय की स्थिति
साहिबगंज सहकारिता विभाग के जिला कार्यालय में स्वीकृत पदों की तुलना में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति चिंताजनक है:
सहकारिता पदाधिकारी – 2 स्वीकृत, 2 कार्यरत सहायक – 3 स्वीकृत, 1 कार्यरतअनुसेवक – 2 स्वीकृत, 1 कार्यरत
चालक – 2 स्वीकृत, 0 कार्यरतसहायक निबंधक सहयोग समिति कार्यालय की स्थिति और भी खराब है:
सहायक निबंधक अधिकारी – 1 स्वीकृत, 0 कार्यरतसहरिकारिता प्रसार पदाधिकारी – 13 स्वीकृत, 4 कार्यरत
लिपिक – 3 स्वीकृत, 1 कार्यरतअनुसेवक – 3 स्वीकृत, 0 कार्यरत
कर्मचारियों की यह कमी विभाग की कार्यक्षमता पर सीधा असर डाल रही है. सहकारिता समितियों की संख्या बढ़ने के बावजूद, अगर विभाग में कर्मचारी उपलब्ध नहीं होंगे, तो किसानों को समय पर मार्गदर्शन और सहयोग मिलना मुश्किल हो जायेगा. अधिकारी का क्या कहना है इस जिले में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी है, लेकिन सरकारी कार्यों को निष्पादित करना हमारी जिम्मेदारी है. किसानों को हर संभव सहयोग देने के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है. साथ ही सहकारिता समितियों के गठन के लिए प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है. “ महादेव मुर्मू, जिला सहकारिता पदाधिकारीकिसानों की उम्मीदें और विभाग की चुनौतियां
जिले में सहकारिता समितियों की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन कर्मचारियों की कमी बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है. किसान और मछुआरे सहकारिता से बड़ी उम्मीदें रखते हैं, पर विभाग में पद रिक्त रहने से उनकी अपेक्षाओं पर असर पड़ रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार समय रहते खाली पदों पर बहाली करे, तो न केवल किसानों को आर्थिक सहयोग मिलेगा बल्कि सहकारिता समितियों का संचालन भी बेहतर तरीके से हो सकेगा.
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