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Published at :20 Dec 2015 11:13 PM (IST)
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ओके:::: शिक्षा और जागरूकता से मिटेगा डायन प्रथा डायन प्रथा को मिटाने व उसके खिलाफ जागरूकता को लेकर कार्यक्रम का आयोजनफांेटों नं 20 एसबीजी 6 हैं.कैप्सन: रविवार को कार्यक्रम को द्वीप प्रज्जवलित करते डीजे, डीसी, व अन्य पदाधिकारीसंवाददाता, साहिबगंज शहर के टाउन हॉल में रविवार को आइसीएसएसआर व एनजीओ कौशल्या ज्योति द्वारा डायन प्रथा को मिटाने व उसके खिलाफ जागरूकता को लेकर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उदघाटन डीसी उमेश प्रसाद सिंह व प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश पांडे ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर कार्यक्रम का उदघाटन किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि मामले से संबंधित कई केस उनके जीवन में आये, जिसे देखने से साफ पता चलता है कि इसके पीछे अंधविश्वास ही सबसे बड़ा कारण है. अगर इस प्रथा को समूल रूप से समाप्त करना है तो जागरूकता जरूरी है. वहीं मौके पर डीसी उमेश प्रसाद सिंह कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि लोग जागरूक हो रहे हैं लेकिन पूर्णरूपेण जागरूकता जरूरी है. जिला प्रशासन ऐसे कार्यक्रमों में हमेशा सहयोग करता है. कार्यक्रम में स्थायी लोक अदालत के चेयरमैन कुमार विजय सिंह ने कहा कि आज भी हमारे समाज में कई प्रकार की कुरीतियां हैं. उसे दूर करना और कड़े कानून बनाने की जरूरत है. एडीजे वन रामबच्चन सिंह ने कहा कि कानून को और कड़ाई से लागू किया जान चाहिए. तभी इस कुप्रथा पर काबू पाया जा सकता है. वहीं आइटीडीए निदेशक शाहिद अख्तर ने कहा कि गरीबी के कारण आज हर धर्म में डायन बिसाही का कार्य हो रहा है. शिक्षा का अलख जगाकर की इसे दूर किया जा सकता है. सदर एसडीओ जितेन्द्र देव ने कहा कि आज पूरे संथाल परगना के साहिबगंज, पाकुड़ व दुमका में ऐसी घटनाएं होती रहती है. इसके खिलाफ हमलोगों को एक साथ खड़े होने की जरूरत है. मौके पर सभी अतिथियों को कौशल्या ज्योति के अध्यक्ष सुरेन्द्र नाथ तिवारी द्वारा बूके व शॉल देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन भगवती पांडे तथा धन्यवाद ज्ञापन दीपक कुमार दिनकर ने की. डायन प्रथा को लेकर जागरूकता पर लिखी पुस्तक का हुआ विमोचनफांेटों नं 20 एसबीजी 7 हैं.कैप्सन: रविवार को पुस्तक का विमोचन करते पदाधिकारीगण झारखंड में डायन प्रथा के खिलाफ महिलाओं में कानूनी अधिकार के प्रति जागरूक करने को लेकर डायन प्रथा पर एक पुस्तक का विमोचन डीजे, डीसी व सभी पदाधिकारियों द्वारा किया गया. जिसमें आलेख पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर के चीफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर एमके माथुर, डीजे ओमप्रकाश पांडे, बिहार के खेल प्राधिकरण के महानिदेशक आइपीएस अरविंद पांडे, डॉ उग्र मोहन झा, झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो नंद कुमार यादव, एसपी राय, मो मोसफिक आलम, अमित गोयल, योगेन्द्र प्रसाद राय सहित 60 विद्वानों के आलेख डायन प्रथा पर प्रकाशित की गयी है. विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले 10 लोग पुरस्कृतफांेटों नं 20 एसबीजी 8 हैं.कैप्सन: रविवार को विष्णु खेतान को पुरस्कृत करते डीजे व डीसी समाज में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ठ योगदान देने वाले 10 लोगों को संस्था की ओर से कौशल्या तिवारी स्मृति सम्मान प्रदान किया गया. जिसमें पुरस्कार इतिहास विभाग के प्रो योगेन्द्र प्रसाद राय, साहित्य के क्षेत्र में प्रो श्याम किशोर सिंह, चिकित्सा क्षेत्र में डॉ विजय कुमार, अध्यात्म के क्षेत्र में पीके घोष, कंप्यूटर शिक्षा में अमित कुमार, जनजातीय इलाका में सेवा फादर टोम, व्यावसायिक क्षेत्र में अमर कुमार यादव को पुरस्कृत किया गया. ये थे उपस्थितफांेटों नं 20 एसबीजी 9 हैं.कैप्सन: रविवार को उपस्थित लोग कार्यक्रम में प्रो एस नाथ, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता बजरंगी प्रसाद यादव, वरीय नेता अनुकूल मिश्रा, प्रो रंजीत कुमार सिंह, सीआइटी विजय कुमार, अनवर अली, वार्ड पार्षद प्रेमलता टुडू, पारस राय, बद्री पांडे, लाली कुमार, अरविंद , अमरेन्द्र ठाकुर, सरफराज आलम, संतोष कुमार, कई न्यायिक पदाधिकारी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रेमनाथ तिवारी, बोदी सिन्हा, कमल महावर, चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रदीप कुमार, अशोक साह, जनमजय झा सहित दर्जनों महिलाएं, पुरुष व छात्र-छात्राएं उपस्थिति थे. कार्यक्रम में बुद्धिजीवियों ने रखे अपने-अपने विचारफांेटों नं 20 एसबीजी 10 हैं.कैप्सन: रविवार को सुरेश्वर प्रसादझारखंड के 22 प्रखंडों में डायन प्रथा हावी है. लोगों को इस प्रथा से निकालने के लिए शिक्षा के साथ जागरूकता जरूरी है. प्रो सुरेश्वर प्रसाद, भागलपुरफांेटों नं 20 एसबीजी 11 हैं.कैप्सन: रविवार को एस नाथआधी आबादी के लिए डायन प्रथा कलंक है. आज लोगों को आगे आकर इस प्रथा को मिटाने के लिये कदम से कदम मिलना होगा. -एस नाथ, सेवानिवृत प्रोफेसरफांेटों नं 20 एसबीजी 13 हैं.कैप्सन: रविवार को सीमा आनंदमहिलाओं को केन्द्र में रखकर लोग प्रताड़ित करने का कार्य करते हैं. सती प्रथा, दहेज प्रथा, डायन प्रथा, सभी में महिलाओं को ही सामना करना पड़ता है. इसे दूर करने के लिए एक मात्र लोगों को जागरूक करना ही रास्ता है. -सीमा आनंद, शिक्षिका जवाहर नवोदय विद्यालय.शोधपत्र पढ़ा गयाकार्यशाला के दूसरे सत्र में डायन प्रथा पर बिहार, झारखंड व बंगाल से आये प्रो एसपी राय, सिदो कान्हू विश्वविद्यालय के डीन प्रो वाइपी राय, दीपक कुमार दिनकर, ममता कुमारी मालदा, नटवर कुमार, प्रवीण कुमार, जानू सुल्तान, दिलकश, स्वीटी कुमारी, दिव्य, विकास, सुरेन्द्र कुमार सहित कई सदस्यों ने डायन प्रथा पर अपना शोध पत्र पढ़ा.

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