स्वास्थ्य के क्षेत्र में झारखंड ने कितना किया सुधार? कई मामलों में पायी तरक्की तो इन चीजों की अब भी कमी
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 28 Dec 2022 9:57 AM
स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य उप केंद्र की नयी बिल्डिंग करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की है, लेकिन यह शुरू नहीं हो पायी है. डॉक्टर और मैनपावर की कमी के कारण अस्पतालों का संचालन नहीं हो पा रहा है.
Jharkhand News: कोरोना काल में राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं दुरुस्त तो हुईं, लेकिन डॉक्टर और मैनपावर की कमी अभी भी बरकरार है. शहर से लेकर ग्रामीण अस्पतालों में बेड व जांच की सुविधा और उपकरण की संख्या बढ़ी है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मरीजों को जितना मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है. हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने बजट 16 फीसदी बढ़ा दिया है. इससे यह उम्मीद जगी है कि आनेवाले समय में आम आदमी तक बेहतर स्वास्थ्य सेवा पहुंच पायेगी. सरकारी अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़कर 19,535 हो गयी है. यानी 11,356 ऑक्सीजन सपोर्टेट बेड और 5,276 नॉन-ऑक्सीजन बेड हैं. वहीं, 1,447 आइसीयू और 1,456 वेंटिलेटर हैं. बच्चों के लिए आइसीयू बेड की संख्या 510 तक पहुंच गयी है.
हालांकि ग्रामीण इलाकों में बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्वास्थ्य उप केंद्र की नयी बिल्डिंग करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की है, लेकिन यह शुरू नहीं हो पायी है. डॉक्टर और मैनपावर की कमी के कारण अस्पतालों का संचालन नहीं हो पा रहा है. जिलों में करोड़ों की बिल्डिंग बेकार है.
कोरोना काल के समय अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के बाद राज्य में 122 पीएसए प्लांट लगाये गये. पांच सरकारी और छह निजी अस्पताल में कुल 11 लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन प्लांट को भी स्थापित किया गया. इसके अलावा मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में 27 लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन को स्थापित करने की तैयारी की जा रही है.
आयुष्मान भारत योजना में राज्य को फ्रॉड प्रीवेंशन एंड ऑडिट में बेस्ट परफॉर्मर का पुरस्कार मिला है. यह पुरस्कार झारखंड में आयुष्मान भारत योजना के तहत धोखाधड़ी पर सख्ती के साथ अंकुश लगाने के लिए दिया गया. वहीं, करीब 95 लाख लोगों को इस योजना से अभी तक जोड़ा गया है.
सरकार का दावा है कि वह स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के प्रयास में जुट गयी है. चिकित्सकों और मैनपावर की कमी का प्रयास शुरू हो गया है. 1,900 पदों पर चिकित्सकों के बहाली की प्रक्रिया चल रही है. वहीं, जिला अस्पताल में भी मैनपावर की कमी को दूर किया जा रहा है.
कांके के सुकुरहुट्टू में संचालित टाटा केंसर हॉस्पिटल के शुरू होने और श्रीसत्य साई हॉस्पिटल के साथ राज्य सरकार का एमओयू होने से बेहतर चिकित्सा की उम्मीद भी बढ़ी है. 400 करोड़ की लागत से बने इस अस्पताल में ओपीडी शुरू होने से कैंसर मरीजों को अब इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. वहीं, श्रीसत्य साई हॉस्पिटल के साथ एमओयू होने से राज्य के हृदय रोगियों को लाभ मिलेगा. इसके तहत हर वर्ष झारखंड के एक हजार हृदय रोगियों को मुफ्त इलाज इलाज मिलेगा. वहीं, मरीजों की यात्रा के लिए एक मरीज पर 10 हजार रुपये सरकार खर्च करेगी.
237 एकड़ भूमि में फैले देवघर एम्स से स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्य की पहचान अलग बनी है. उम्मीद यह जतायी जा रही है कि राज्य की साढ़े तीन करोड़ जनता को बेहतर इलाज मिलेगा. यह 750 बेड का अस्पताल है. चिकित्सा के अलावा शैक्षणिक और शोध का कार्य भी शुरू हो गया है. एमबीबीएस में 100 बढ़ गयी है. वहीं, पीजी की पढ़ाई भी शुरू हो गयी है. वर्तमान समय में ओपीडी में 400 से ज्यादा मरीज को परामर्श दिया जा रहा है. राज्य के मरीजों को महानगरों में नहीं जाना पड़ेगा.
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