रांची. कैथोलिक विश्वासी शुक्रवार को क्रूस रास्ता की आराधना में शामिल हुए. संत मरिया महागिरजाघर पुरुलिया रोड, होली एंजिल्स चर्च कोकर, ख्रीस्त राजा चर्च कांके, ऑल सेंट्स चर्च डोरंडा सहित अन्य चर्चों में हुई आराधना के दौरान यीशु के दुखभोग का स्मरण किया गया. संत मरिया महागिरजाघर में दोपहर 12 बजे पहली आराधना हुई, जिसका संचालन युवा समूह की सीमा खोया ने किया. बाइबल से पाठ पढ़े गये.
विश्वासियों ने 14 स्थानों का स्मरण किया
विश्वासियों ने उन 14 स्थानों का स्मरण किया, जो प्रभु यीशु को गवर्नर पिलातुस द्वारा क्रूस मृत्यु की सजा सुनाने और फिर क्रूसित किए जाने के दौरान आये थे. इनमें पहला स्थान वह था, जहां यीशु को प्राणदंड की सजा सुनायी जाती है. दूसरे स्थान पर यीशु के कंधे पर क्रूस लादा जाता है. तीसरा स्थान जब यीशु पहली बार क्रूस के नीचे गिरते हैं. चौथा स्थान यीशु और उनकी दुखी मां की मुलाकात होती है. पांचवां स्थान सिरनी सिमोन नामक व्यक्ति क्रूस ढोने में यीशु की मदद करते हैं. छठा स्थान पर वेरोनिका नामक स्त्री यीशु का चेहरा पोंछती है. सातवें स्थान में यीशु दूसरी बार गिरते हैं. आठवां स्थान यरूशलेम की स्त्रियां यीशु के लिए कलपती हैं. नौवें स्थान पर यीशु तीसरी बार गिरते हैं. 10वें स्थान पर यीशु के कपड़े उतारे जाते हैं. 11वें स्थान पर यीशु क्रूस पर ठोंके जाते हैं. 12वां स्थान जहां यीशु की क्रूस पर मृत्यु हो जाती है. 13वां स्थान यीशु क्रूस पर से उतारे जाते हैं और 14्रवां स्थान जहां यीशु कब्र में रखे जाते हैं. पूरी आराधना के दौरान विश्वासी मानव जाति के उद्धार और पापों से मुक्ति के लिए प्रभु यीशु मसीह की क्रूस मृत्यु की घटनाओं पर मनन करते हैं.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

