Political News : पेसा के मुद्दे पर मुख्यमंत्री व आदिवासी मंत्री विधायक मूकदर्शक बने हुए हैं : ग्लैडसन

आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पिछले 24 सालों से असंवैधानिक रूप से ‘झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001’ और ‘नगरपालिका कानून 2011’ को लागू किया गया है.
रांची (संवाददाता). आदिवासी क्षेत्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि झारखंड के अनुसूचित क्षेत्रों में पिछले 24 सालों से असंवैधानिक रूप से ‘झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001’ और ‘नगरपालिका कानून 2011’ को लागू किया गया है. इसकी वजह से आदिवासियों की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों को छीना जा रहा है. श्री डुंगडुंग रविवार को हरमू में परिषद के तत्वावधान में आयोजित पेसा विमर्श को संबोधित कर रहे थे. इसमें परिषद के सदस्यों के अलावा हरमू क्षेत्र के आदिवासी बुद्धिजीवी-सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए. मौके पर श्री डुंगडुंग ने कहा कि झारखंड सरकार की प्रस्तावित पेसा नियमावली-2024 द्वारा इन्हीं कानूनों को वैध बनाते हुए लूट जारी रखने की कोशिश की जा रही है. यह दुर्भाग्य है कि आदिवासी मुख्यमंत्री, आदिवासी मंत्रीगण व आदिवासी विधायक इन मामलों पर मूकदर्शक बने हुए है. ग्लैडसन ने कहा कि ‘इंडिया गठबंधन’ के दो बड़े घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस पार्टी दोनों ने सत्ता में वापस आने पर‘पेसा कानून-1996 को लागू करने का वादा किया था. अब जब चुनावी वादा निभाने का समय है तब इन दलों के नेता मुंह नहीं खोलते हैं. परिषद की महासचिव सुषमा बिरूली ने कहा कि हम आदिवासियों को पेसा कानून के बहाने एक बार फिर से सरना-ईसाई के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि, हमें यह समझना है कि हम सभी आदिवासी अपने-अपने खूंट के हिसाब से भाई-बहन है इसलिए हमें आपस में नही लड़ना चाहिए. तभी हम अपने अधिकारों को सुरक्षित कर पायेंगे. उन्होंने कहा कि पेसा कानून-1996 अनुसूचित क्षेत्रों के लिए संविधान है, इसलिए यहां जेपीआरए-2001 को लागू नहीं किया जा सकता है. विमर्श के दौरान फ्रांसिस कंडुलना, मेरी क्लाॅडिया सोंरेग एवं लिलि बारला ने भी संबोधित किया.
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