कच्ची उम्र में तंबाकू की लत

Updated at : 31 May 2024 12:49 AM (IST)
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कच्ची उम्र में तंबाकू की लत

तंबाकू कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी काे जन्म देता है, बाजवूद लोग इसका धड़ल्ले से उपयोग करते है. चिंता की बात यह है कि झारखंड में तंबाकू का उपयोग 13 से 15 साल के किशोरों में तेजी से बढ़ा है.

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तंबाकू निषेध दिवस पर विशेष

रांची (राजीव पांडेय). तंबाकू कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी काे जन्म देता है, बाजवूद लोग इसका धड़ल्ले से उपयोग करते है. चिंता की बात यह है कि झारखंड में तंबाकू का उपयोग 13 से 15 साल के किशोरों में तेजी से बढ़ा है. ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार झारखंड में 5.1 फीसदी स्कूल गोइंग बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन कर रहे हैं. इसमें सात फीसदी किशोर और 3.3 फीसदी किशोरी शामिल हैं. इधर, किशोरावस्था में तंबाकू के बढ़ते उपयोग को लेकर डब्लूएचओ भी गंभीर है. इसलिए विश्व तंबाकू निषेध दिवस-2024 का थीम है : बच्चों को तंबाकू उद्याेग के हस्तक्षेप से बचाना.

झारखंड में 38.9 फीसदी लोग करते हैं तंबाकू का सेवन

ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे के अनुसार झारखंड में भी 38.9 फीसदी लोग तंबाकू का किसी ने किसी रूप में उपयोग कर रहे हैं. इसमें पुरुष 59.7 फीसदी और महिलाएं 17 फीसदी हैं. वहीं, धुआं रहित तंबाकू का उपयोग 35.4 फीसदी होता है. इधर, एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 15 साल से ऊपर की उम्र वाले 47.4 फीसदी पुरुष तंबाकू का उपयोग करते है. इसमें ग्रामीण इलाकों के 51 फीसदी और शहरी क्षेत्र के 37.2 फीसदी पुरुष शामिल हैं. इसी उम्र में ग्रामीण इलाके की 9.6 और शहरी क्षेत्र में 4.8 फीसदी महिलाएं तंबाकू का सेवन करती हैं.

यहां जानिए तंबाकू का किस रूप में सेवन करते हैं किशो

र ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे के अनुसार झारखंड में 1.1 फीसदी स्कूली विद्यार्थी सिगरेट का उपयोग करते हैं, जिसमें 1.3 फीसदी किशोर और 0.8 फीसदी किशोरी शामिल हैं. वहीं, 1.7 फीसदी विद्यार्थी बीड़ी का उपयोग करते हैं, जिसमें 2.3 किशोर और 1.2 फीसदी किशोरी शामिल हैं. इसके अलावा 7.5 फीसदी विद्यार्थी धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें 06 फीसदी किशोर और 8.9 फीसदी किशोरी शामिल हैं.

शरीर पर पड़ता है नकारात्मक असर

रिम्स के फिजिशियन डॉ संजय कुमार ने बताया कि तंबाकू के उपयोग का शरीर पर नकारात्मक असर पड़ता है. इसका उपयोग करने से तत्काल शरीर में उत्तेजना आती है, लेकिन इसका दुष्प्रभाव यह पड़ता है कि यह धीरे-धीरे मानसिक रूप से व्यक्ति को बीमार बनाता है.

शिक्षण संस्थानों के 100 गज की परिधि में बिक्री पर प्रतिबंध

शिक्षण संस्थानों की 100 गज की परिधि में तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध है. इसका उल्लंघन करने वालों पर 200 रुपये के जुर्माना का प्रावधान है, लेकिन राजधानी में इस नियम का पालन नहीं होता. क्याेंकि स्कूल के आसपास में ही तंबाकू की दुकानें है. इधर, फूड एंड सेफ्टी विभाग अभियान द्वारा सिर्फ नाम के लिए एक-दो दुकानों पर छापेमारी कर जुर्माना लगा दिया जाता है.

यह भी जानकारी उपयोगी

झारखंड ने तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम में एक नयी पहचान बनायी है. खासतौर पर बच्चों और युवाओं को तंबाकू की लत से दूर रखने के लिए राज्य सरकार ने सभी शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त क्षेत्र घोषित करते हुए इसको लागू कराने के लिए मार्गदर्शिका का प्रकाशन किया है. सभी नगर निकायों में तंबाकू उत्पाद बेचनेवाले दुकानदारों के लिए लाइसेंस का प्रावधान भी है. तंबाकू नियंत्रण अधिनियम 2003 को संशोधित करते हुुए नाबालिग की उम्र को 18 साल से बढ़ाकर 21 साल कर दी गयी है. इस अधिनियम को केंद्र सरकार को भेजा गया है.

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