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मास्टरमाइंड सहित बिहार के तीन साइबर फ्रॉड रांची से गिरफ्तार

Updated at : 06 Jul 2025 1:02 AM (IST)
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मास्टरमाइंड सहित बिहार के तीन साइबर फ्रॉड रांची से गिरफ्तार

नामकुम थाना और साइबर थाना की पुलिस ने संयुक्त रूप से महुआटोली स्थित एक घर में छापेमारी कर साइबर फ्रॉड के मास्टरमाइंड बिहार निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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रांची. नामकुम थाना और साइबर थाना की पुलिस ने संयुक्त रूप से महुआटोली स्थित एक घर में छापेमारी कर साइबर फ्रॉड के मास्टरमाइंड बिहार निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में नवादा जिला के ग्राम हिसुआडिह निवासी 31 वर्षीय अतुल राज, नालंदा के जवाहर चक निवासी 25 वर्षीय मिथिलेश कुमार और 21 वर्षीय अमरजीत कुमार का नाम शामिल है. यह जानकारी शनिवार शाम अपने कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर ने दी. उन्होंने बताया कि सूचना मिली थी कि नामकुम थाना क्षेत्र अंतर्गत महुआटोली स्थित एक घर में कुछ बाहर के साइबर अपराधी रह रहे हैं. त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम गठित कर वहां छापेमारी की गयी. महुआटोली के आसपास के लोगों से पूछताछ में बताया गया कि अमित कुमार, पिता-शालिग्राम यादव के घर में कुछ बाहर के लड़के आकर रह रहे हैं. इसके बाद टीम ने उक्त घर को घेर लिया. घर के अंदर तीन युवक मौजूद थे. पुलिस को देखकर उन्होंने छत की ओर भागने का प्रयास किये, लेकिन पुलिस ने तीनों को धर दबोचा. घर की तलाशी में मोबाइल, स्टाम्प, आधार कार्ड, डेबिट कार्ड, ग्लोबल कार्ड, चेक बुक, 15 हजार कूपन, बैंक पासबुक, रजिस्टर, कूपन, प्रिंटर, कैश व स्कूटी मिली. आरोपियों ने पूछताछ करने पर बताया कि इन लोगों के द्वारा चोरी का मोबाइल फोन, दूसरे व्यक्ति के नाम से निर्गत सिम कार्ड एवं बैंक खाता को फर्जी तरीके से प्राप्त करते हैं.

साइबर अपराधी कैसे करते थे आम लोगों के साथ फ्रॉड

ग्रामीण एसपी के अनुसार आरोपी फर्जी नंबर का प्रयोग कर बनाये गये फेसबुक अकाउंट से ये लोग फेसबुक पेज बनाते थे. इसके बाद फेसबुक व गूगल पर लोन का विज्ञापन चलाते थे, जिस पर गूगल फार्म का लिंक होता है. उक्त फार्म में व्यक्ति का निजी विवरण, मोबाइल नंबर व बैंक खातों का विवरण मांगा जाता था. फार्म भरने पर विवरणी इन लोगों को एक्सेल सीट में मिलती थी. ग्राहक द्वारा दिये गये मोबाइल नंबर पर ये अपने फर्जी सिम से फोन करते हैं और लोन अप्रूवल हेतु प्रोसेसिंग चार्ज, जीएसटी, एसजीएसटी आदि का बहाना बनाकर लोगों को गुमराह कर पैसे की ठगी करते थे. आरोपी तुलसी आयुर्वेद फार्मा का फर्जी लॉटरी कूपन, पंपलेट बनाकर एक लिफाफा में बंद कर तुलसी आयुर्वेद के ग्राहकों को साधारण डाक के माध्यम से उनके पते पर भेजते हैं. उक्त पंपलेट में लॉटरी का इनाम पाने हेतु अपने पास बनाये हुए फर्जी स्टांप से अपने विभिन्न व्हाट्सऐप नंबर पर संपर्क करने के लिए मुहर लगाकर भेजते हैं. जब किसी के द्वारा लॉटरी कूपन स्क्रैच कर लोग इनाम की राशि पाने के लिए आरोपी पक्ष से संपर्क करते थे, तब लॉटरी का इनाम पाने के लिए प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर गुमराह कर पैसे ठगते हैं. आरोपी किसी को विश्वास में लेने के लिए भारतीय स्टेट बैंक का चंद्रप्रभा हेल्थकेयर के नाम से जारी फर्जी चेक में इनाम में पाये गये पैसे का इंट्री कर और उस पर एसबीआइ और पीएनबी का फर्जी चेक, डिपोजिट स्टांप का मुहर लगाकर भेजते थे. ग्रामीण एसपी ने आगे बताया कि पकड़े गये अपराधियों से पूछताछ और छानबीन के क्रम में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कई लोगों को स्कैनर भेजकर पैसा मंगवाया है. जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने तेलंगाना सहित अन्य राज्यों के लोगों से ठगी की है. क्योंकि आरोपियों के द्वारा प्रयोग किये जा रहे मोबाइल नंबर के खिलाफ दूसरे राज्यों में भी मामला दर्ज है. आरोपियों ने अभी तक 50-60 लाख रुपये की ठगी की है. ग्रामीण एसपी के अनुसार मास्टरमाइंड पहले तुलसी आयुर्वेदिक में काम करता था. वह इसी कंपनी का डाटाबेस लेकर ठगी कर रहा था. आरोपी यह काम पिछले तीन-चार वर्षों से कर रहे थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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