वेल्लोर में फंसे झारखंड के लोगों ने लगायी गुहार, कहा - साहब ! हमारा पंजीकरण कराकर गांव भेज दीजिये

Published by :Pritish Sahay
Published at :05 May 2020 12:16 AM (IST)
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वेल्लोर में फंसे झारखंड के लोगों ने लगायी गुहार, कहा - साहब ! हमारा पंजीकरण कराकर गांव भेज दीजिये

झारखंड से वेल्लोर जाकर इलाज करानेवाले सैंकड़ों लोगों का सब्र करीब दो महीने बाद सोमवार को जवाब दे गया. 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही ये लोग मरीजों के साथ वहां फंसे हैं. प्रशासन से सहयोग नहीं मिल पाने के बाद ये सभी बड़ी तादाद में डीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गये.

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रांची : झारखंड से वेल्लोर जाकर इलाज करानेवाले सैंकड़ों लोगों का सब्र करीब दो महीने बाद सोमवार को जवाब दे गया. 24 मार्च को लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद से ही ये लोग मरीजों के साथ वहां फंसे हैं. प्रशासन से सहयोग नहीं मिल पाने के बाद ये सभी बड़ी तादाद में डीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गये. इलाज कराने गये विश्वजीत सिंह और उत्तम गोप नामक युवक ने इस पूरे घटना काे रिकाॅर्ड कर उसे साेशल मीडिया के जरिये साझा किया है, जो तेजी से वायरल हो रहा है. महज आठ घंटे में ही इसे 1.7 हजार व्यू मिले हैं. साथ ही स्थानीय लोग उनके इस दर्द में साझीदार बनते हुए इसे 41 लोगों के साथ शेयर भी किया है.

कैंसर-हार्ट जैसी गंभीर बीमारी वाले मरीज भी फंसेकोरोना वायरस महामारी का प्रकोप कम होने का इंतजार कर रहे मरीज यहां कैंसर, किडनी तथा हृदय संबंधी रोगों एवं ऐसी अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आये थे. लॉकडाउन के कारण राज्य के कोने-कोने से आये ऐसे सैकड़ों लोग असहाय स्थिति में फंसे हुए हैं. यह सभी महामारी का प्रकोप कम होने का इंतजार कर रहे थे.अब लॉज का खर्च भी नहीं उठा पा रहे हैं इलाज कराने यहां आये गरीब मरीजों की पीड़ा अब गूंजने लगी है. इनमें से अधिकतर झारखंड, बिहार, बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश के रहनेवाले हैं. लॉकडाउन की अवधि लंबी खींच जाने के बाद ये अब लॉज का खर्च नहीं उठा सकते.

ऐसी ही एक महिला ने आपबीती बताते हुए कहा कि हम एक ग्रुप हैं, जिसमें पुरुलिया और नजदीक के झारखंड के लोग शामिल हैं. उन्होंने कहा कि हमें इजाजत मिल जाये, तो हम यहां से निकल जायेंगे. कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें भाषा की भी परेशानी हो रही है.विधायक से लेकर प्रशासन तक से लगा चुके हैं गुहारगिरिडीह के एक व्यक्ति ने कहा कि लॉज मालिक परेशान कर रहे हैं, बार-बार पुलिस बुलानी पड़ रही है. ऐसे में क्या किया जाये. सरकार से उम्मीद है कि किसी तरह कोई इंतजाम करे और हम लोगों को यहां से वापस अपने राज्य ले जाये.

वीडियो वायरल करने वाले विश्वजीत सिंह कहते हैं कि विधायक को 150 लोगों की लिस्ट भेजी है. प्रशासन तक से गुहार लगा चुके हैं, पर कहीं से कोई मदद नहीं मिल रही है.वेल्लोर से स्पेशल ट्रेन चलाने का आग्रहराज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने तमिलनाडु के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर वेल्लोर में फंसे झारखंड के मरीजों को वापस लाने की व्यवस्था करने का आग्रह किया है. उन्होंने लिखा है कि झारखंड से कई मरीज वेल्लोर में फंसे हुए हैं. वे काफी संकट में हैं. ऐसे में उनको स्पेशल ट्रेन से भेजने की व्यवस्था की जाये. इसके लिए संबंधित डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर को आवश्यक निर्देश देने को कहा है. यह भी लिखा है कि ट्रेन की व्यवस्था कटपड़ी (वेल्लोर ) से रांची के लिए करायें.

ओड़िशा से जबरन भेजा, बॉर्डर पर घंटों भूखे बैठे रहे 60 मजदूर : विशाखापट्टनम से सुंदरगढ़ में आकर फंसे झारखंड के 60 प्रवासी मजदूरों को आज सुबह जबरन उनके राज्य झारखंड भेज दिया गया. ओड़िशा और झारखंड की सीमा बिरमित्रापुर के पास उन्हें ले जाकर छोड़ दिया गया और कह दिया गया कि वे गढ़वा चले जायें. क्वारेंटाइन सेंटर से सीमा तक जाने का उन्हें किराया भी देना पड़ा. सभी मजदूर घंटों बिरमित्रपुर में सड़क पर भूखे-प्यासे बैठे रहे और गढ़वा से गाड़ी आने का इंतजार करते रहे.

इधर, देर शाम में गढ़वा से चार बसें आयीं, तो सारे मजदूर इसमें बैठ कर अपने गांव के लिये निकले. गढ़वा के सारे मजदूर विशाखापट्टनम में काम करते थे. लॉकडाउन होने के बाद सभी लोग भोजन के अभाव में वहां से निकलकर अपने गांव के लिए चल दिये थे. इस बीच झारखंड सीमा से 15 किमी पहले सुंदरगढ़ में उन्हें पकड़ लिया गया था. वहां एक स्कूल में सारे को क्वारेंटाइन के लिए रखा गया था. एक अप्रैल से सारे मजदूर सुंदरगढ़ में ही फंसे हुए थे.

गुजरात से वाहन आ सकते हैं : अविनाश कुमारगुजरात से झारखंड आ रहे वाहनों को झाबुआ (मध्य प्रदेश) में रोक दिया गया था. कारण एमपी में ऐसे वाहनों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी. ग्रामीण विकास सचिव अविनाश कुमार ने ट्वीट करके यह जानकारी दी है कि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार से बात कर समाधान निकाल लिया है. सभी अधिकृत वाहन अब छत्तीसगढ़ होकर झारखंड आ सकते हैं.

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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