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रांची के ऐतिहासिक टैगोर हिल के ब्रह्म मंदिर मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई, झारखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Updated at : 23 Mar 2023 7:24 AM (IST)
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रांची के ऐतिहासिक टैगोर हिल के ब्रह्म मंदिर मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई, झारखंड हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

खंडपीठ ने पूछा कि ब्रह्म मंदिर के संरक्षण व राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाये गये हैं. मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी.

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झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के ऐतिहासिक टैगोर हिल के ऊपर स्थित ब्रह्म मंदिर के संरक्षण और राष्ट्रीय धरोहर घोषित कराने को लेकर दायर जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र व जस्टिस आनंद सेन की खंडपीठ ने प्रार्थी का पक्ष सुनने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण व राज्य सरकार को जवाब दायर करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने पूछा कि ब्रह्म मंदिर के संरक्षण व राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की दिशा में अब तक क्या कदम उठाये गये हैं. मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी.

इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से खंडपीठ को बताया गया कि ब्रह्म मंदिर 1910 में बना था. यह मंदिर आज जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है. मंदिर क्षतिग्रस्त भी हो रहा है. प्रार्थी ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से इस मंदिर के संरक्षण अथवा देखभाल के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सोसाइटी ऑफ प्रिजर्वेशन ऑफ ट्राइबल कल्चर एंड नेचुरल ब्यूटी की ओर से जनहित याचिका दायर की गयी है. प्रार्थी ने ब्रह्मा मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की है. प्रार्थी ने अपनी याचिका में प्रभात खबर में प्रकाशित खबरों को भी आधार बनाया है.

सेना की याचिका पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने यूनियन ऑफ इंडिया मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने सभी पक्षों को सुना. सभी पक्षों ने लिखित बहस प्रस्तुत की. मामले में सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. आदेश के लिए 29 मार्च की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व केंद्र सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार व अधिवक्ता प्रभात कुमार सिन्हा ने पैरवी की, जबकि प्रतिवादी चैलिश रीयल स्टेट की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा. ज्ञात हो कि सेना की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि दीपाटोली के पास उसकी जमीन के बगल में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनायी जा रही है. सुरक्षा की दृष्टि से सेना की जमीन से 50 मीटर दूर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का निर्माण कराने का नियम है. बहुमंजिला भवन बनाने में इस नियम की अनदेखी हो रही है.

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