छठ पूजा पर झारखंड के 1000 साल पुराने सूर्य मंदिर में उमड़ती है भीड़, जानें इसकी खासियत

मंदिर में स्थित भगवान सूर्य की प्रतिमा, Pic Credit- आनंद राम महतो
Sun Temple Bundu Ranchi: झारखंड के बुंडू प्रखंड स्थित हेठ बूढ़ाड़ीह का प्राचीन सूर्य मंदिर छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को आकर्षित करता है. 1000 साल से अधिक पुराना यह मंदिर भगवान सूर्य की भव्य मूर्ति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए प्रसिद्ध है.
Sun Temple Bundu Ranchi, आनंद राम महतो: झारखंड के धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों में से एक बुंडू प्रखंड स्थित हेठ बूढ़ाड़ीह गांव का प्राचीन सूर्य मंदिर अपनी जीवंत आस्था के लिए प्रसिद्ध है. कांची नदी के तट पर नीम के पेड़ के नीचे स्थित यह मंदिर, भगवान सूर्य को सात घोड़ों पर विराजमान दर्शाता है.
सच्चे दिल से मन्नत मांगा जाई तो वह पूरी होती है
स्थानीय ग्रामीण घासीराम महतो और वृंदावन महतो के अनुसार यह मंदिर सातवीं शताब्दी का प्राचीन धाम है. यहां 1000 साल से अधिक समय से कलाकृतियों से भव्य रूप में पूजा-अर्चना होती आ रही है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां सच्चे दिल से कोई भी मन्नतें मांगी जाए तो वह पूरी होती हैं और श्रद्धालुओं की इस मंदिर से विशेष आस्था है.
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मंदिर को विशाल रूप देने का हुआ प्रयास लेकिन सब असफल
चंद्रशेखर महतो और संमल राम महतो बताते हैं कि कई सामाजिक संगठनों ने यहां विशाल सूर्य मंदिर बनाने का प्रयास किया, लेकिन स्थानीय सहयोग नहीं मिलने के कारण यह परियोजना पूरी तरह सफल नहीं हो सकी.
छठ पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़
छठ पर्व के अवसर पर श्रद्धालु कांची नदी में स्नान कर प्रसाद ग्रहण करते हैं. गांव के मगनसाय मुंडा और धर्मेंद्र महतो के अनुसार, स्थानीय लोगों के सहयोग से मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है. साथ ही, प्रतिवर्ष सूर्य चंडी महायज्ञ का आयोजन भी किया जाता है. चंद्रशेखर महतो की अगुवाई में महापर्व छठ के अवसर पर प्रसाद भोग का वितरण भी नियमित रूप से किया जाता है.
भगवान सूर्य की मूर्ति श्रद्धालुओं को करता है आकर्षित
ग्रामीण बताते हैं कि मंदिर परिसर में प्राचीन काल का भगवान सूर्य की मूर्ति श्रद्धालुओं और दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इसके अलावा, कांची नदी के पार एक किलोमीटर दूर स्थित प्राचीन महामाया मंदिर भी प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. झारखंड के अतीत की सांस्कृतिक धरोहरों की पुस्तकों में इसे प्रमुख स्थान दिया गया है.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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