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Shrawani Mela 2020 : तीन जुलाई को श्रावणी मेला पर फैसला, इन लोगों ने रखा था अपना पक्ष

Updated at : 01 Jul 2020 2:56 AM (IST)
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Shrawani Mela 2020 : तीन जुलाई को श्रावणी मेला पर फैसला, इन लोगों ने रखा था अपना पक्ष

देवघर में ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई, जिसके बाद झारखंड हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.

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रांची : देवघर में ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन को लेकर दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई पूरी हुई, जिसके बाद झारखंड हाइकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. फैसले के लिए तीन जुलाई की तिथि निर्धारित की. चीफ जस्टिस डॉ रविरंजन की खंडपीठ ने वीसी के माध्यम से मामले की सुनवाई के दाैरान प्रार्थी, झारखंड सरकार व बिहार सरकार का पक्ष सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा. प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता रवि प्रकाश मिश्र और अधिवक्ता खुशबू कटारूका ने पक्ष रखा. कहा िक कोरोना को देखते हुए सरकार दिशा-निर्देश लागू कर कम से कम संख्या में भक्तों को पूजा करने की अनुमति दे सकती है.

इसके लिए अॉनलाइन व्यवस्था भी की जा सकती है. उन्होंने बताया कि श्रावणी मेला सदियों पुरानी परंपरा और संस्कृति का हिस्सा है. 19वीं शताब्दी में प्लेग महामारी के समय भी श्रावणी मेला का आयोजन हुआ था. यह आयोजन कभी बंद नहीं हुआ. बिहार सरकार की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि श्रावणी मेला का बड़ा हिस्सा झारखंड में आता है.

बाबा बैद्यनाथ का मंदिर देवघर में है, जो झारखंड के हिस्से में है. इसलिए मेला आयोजन का निर्णय झारखंड सरकार को करना है. केंद्र सरकार की अोर से अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने पक्ष रखा. ज्ञात हो कि प्रार्थी सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने कोरोना प्रोटोकॉल व दिशा-निर्देशों के साथ ऐतिहासिक श्रावणी मेला के आयोजन की अनुमति देने की मांग की है.

  • हाइकोर्ट में सुनवाई पूरी : िबहार सरकार व केंद्र ने भी रखा पक्ष

  • गोड्डा सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने जनहित याचिका दायर की है

  • सरकार ने कोरोना के खतरे का हवाला दिया

राज्य सरकार की अोर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कोविड-19 महामारी के फैलने के खतरे का हवाला देते हुए देवघर में श्रावणी मेला आयोजित करने को लेकर अनिच्छा जतायी. महाधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया कि बड़ी संख्या में श्रावणी मेला में श्रद्धालुओं की भीड़ होने से कोरोना के सामुदायिक संक्रमण का खतरा रहेगा. जनहित में लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा को देखते हुए राज्य सरकार देवघर में श्रावणी मेला का आयोजन नहीं करना चाहती है.

भक्तों में वायरस फैलने का जोखिम बहुत अधिक है, क्योंकि श्रावणी मेला में देश के कोने-कोने से भक्त देवघर पहुंचते हैं. यहां तक कि विदेशों से भी श्रद्धालु आते हैं. वायरस के फैलाव को रोकने के लिए राज्य में लॉकडाउन को भी बढ़ा कर 31 जुलाई कर दिया गया है. वैसी स्थिति में राज्य सरकार इस तरह का जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है.

कोलकाता में आज से खुलेगा कालीघाट मंदिर : ऐतिहासिक शक्तिपीठ कालीघाट मंदिर को बुधवार से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा. मंगलवार को मंदिर परिसर को सैनिटाइज िकया गया. तुलसी और नीम के पत्ते के साथ ही केमिकल का भी इस्तेमाल किया गया. नियमों के साथ मंदिर को खोला जायेगा. दर्शन-पूजन के लिए नये नियम होंगे, जिनका कड़ाई से पालन करना होगा. मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश वर्जित रहेगा.

post by : Pritish Sahay

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