Ranchi News : संविधान में मिले अधिकार का हर हाल में पालन होना चाहिए : रंजना अस्थाना

Updated at : 14 Oct 2025 7:57 PM (IST)
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Ranchi News : संविधान में मिले अधिकार का हर हाल में पालन होना चाहिए : रंजना अस्थाना

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना ने कहा कि संविधान में जिसको जो अधिकार मिला है, उसका हर हाल में पालन होना चाहिए.

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रिनपास में ट्रांसजेंडरों की स्थिति पर कार्यशाला

वरीय संवाददाता, रांची

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) की सदस्य सचिव रंजना अस्थाना ने कहा कि संविधान में जिसको जो अधिकार मिला है, उसका हर हाल में पालन होना चाहिए. जहां कानून के पालन में बाधा हो रही है, उनके साथ झालसा और डालसा जैसी संस्थाएं खड़ी है. ऐसे जरूरतमदों को हर हाल में कानूनी सहायता मिलेगी. ट्रांसजेंडर की समस्या अलग तरह की है. यह काफी चुनौतीपूर्ण काम भी है. झालसा और डालसा इनकी मदद के लिए भी तैयार है. सदस्य सचिव मंगलवार को रिनपास में ट्रांसजेंडर पर आयोजित कार्यशाला में बोल रही थी. इसका आयोजन रिनपास का साइकेट्रिक सोशल विभाग ने किया था. इस मौके पर डालसा के सचिव रवि कुमार भास्कर ने कहा कि ट्रांसजेंडरों को अब कानूनी अधिकार मिल गया है. 2014 से पहले तक इनके अधिकार की बात नहीं होती थी. इसी समय इनको अधिकार देने की बात हुई. 2019 में ट्रांसजेंडर के अधिकार के रक्षा लिए कानून भी बन गया है. जब विधायी संस्थाएं फेल हो जाती है, तो अदालत अधिकार देने का काम करता है. अगर कहीं भी ट्रांसजेंडर के साथ भेदभाव होगा, वहां डालसा हस्तक्षेप करता है. उनको अधिकार दिलाता है. इसके लिए ट्रांसजेंडर 15100 टॉलफ्री नंबर पर संपर्क भी कर सकते हैं. रिनपास के चिकित्सा अधीक्षक डॉ विनोद कुमार ने कहा कि सरकार और समाज मिलकर काम करें, तो ट्रांसजेंडर को भी सम्मान मिल सकता है.

रिनपास के निदेशक डॉ अमूल रंजन सिंह ने कहा कि आज भी ट्रांसजेंडरों के साथ उचित व्यवहार नहीं होता है. ट्रांसजेंडर को लेकर आज भी भ्रांतियां है. मानना चाहिए कि यह भी समाज का हिस्सा है. इनके लिए कानून है. समाज का जागरूक करने की जरूरत है.

सफर आसान नहीं, पिता ने ही घर से निकाला

जमशेदपुर से आयी ट्रांसजेंडर पूर्णिमा ने कहा कि हम लोगों का सफर आसान नहीं है. पढ़ाई के समय से ही संघर्ष शुरू हो जाती है. स्कूल में एडमिशन नहीं होता है. पढ़ाई के दौरान आधा दर्जन स्कूल बदलना पड़ा. मुश्किल से कॉलेज की पढ़ाई हुई. एक समय के बाद पिता ने ही घर से निकाल दिया. ट्रांसजेंडरों की टीम में रही. वहां भी गलत काम करने को कहा जाता था. मन करता था कि सुसाइड कर लूं. लेकिन, ऐसे वक्त में ही कुछ मददगार मिल गये. एक कंपनी में नौकरी लग गयी. वहां भी कुछ अधिकारी सम्मान के साथ खिलवाड़ करना चाहते हैं. स्थिति अच्छी नहीं है. धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के साइकेट्रिक सोशल विभाग की अध्यक्ष डॉ मनीषा किरण ने किया.

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