हेमंत सोरेन पर बरसे झारखंड के पूर्व सीएम रघुवर दास, कहा- सरकार के खिलाफ लोगों में आक्रोश

Jharkhand Political News: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि अपने परिवार और नजदीकी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार के संरक्षण में पिछले ढाई वर्ष में झारखंड के जल-जंगल और जमीन के साथ-साथ खनिज संपदा की जमकर लूट हुई है.
Jharkhand Political News: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि यह सरकार लोगों की आंख में धूल झोंक रही है. 5 लाख नौकरियों के वादे के साथ सत्ता में आयी हेमंत सोरेन सरकार की वादाखिलाफी के कारण झारखंड के युवाओं में सरकार के खिलाफ आक्रोश है.
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा कि अपने परिवार और नजदीकी लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए हेमंत सोरेन सरकार के संरक्षण में पिछले ढाई वर्ष में झारखंड के जल-जंगल और जमीन के साथ-साथ खनिज संपदा की जमकर लूट हुई है. साहिबगंज जैसा पिछड़ा जिला इसका उदाहरण है.
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रघुवर दास ने कहा कि इस एक जिले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में 1,400-1500 करोड़ रुपये के अवैध उत्खनन की बात सामने आयी है. इसमें मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि का नाम सबसे आगे है. हेमंत सोरेन सरकार के इन कारनामों के कारण झारखंड के लोग सरकार से काफी नाराज हैं.
उन्होंने कहा कि लोगों की नाराजगी और आक्रोश को दबाने और लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए हेमंत सोरेन हर रोज नयी-नयी लोक लुभावन घोषणाएं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 1932 के खतियान और आरक्षण नीति की घोषणा भी इसी का हिस्सा है.
श्री दास ने कहा कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ. राज्य गठन के बाद उस समय की सरकार ने अधिसूचना संख्या 3389, दिनांक 29.09.2001 द्वारा एकीकृत बिहार के परिपत्र संख्या 806, दिनांक 03.03.1982 को अंगीकृत किया गया, जिसमें जिला के आधार पर स्थानीय व्यक्ति की पहचान उनके नाम, जमीन, वासगीत, रिकार्ड ऑफ राइट्स के आधार पर की गयी थी.
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उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में झारखंड हाईकोर्ट ने दो याचिकाओं की सुनवाई के बाद पारित विस्तृत आदेश के जरिये स्थानीयता को परिभाषित करने संबंधी संकल्प को गलत बताया था. साथ ही स्थानीयता को परिभाषित करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये थे. इसके बाद कई सरकारें बनीं, लेकिन स्थानीय व्यक्ति को परिभाषित करने और उसकी पहचान के मापदंड को निर्धारित करने का मामला विचाराधीन रहा.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 7 अप्रैल 2015 को सर्वदलीय बैठक की. सामाजिक संगठनों से परामर्श लिया. झारखंड के बुद्धिजीवियों से भी विचार-विमर्श किया. झारखंड हाईकोर्ट के सुझावों को ध्यान में रखते हुए 7 अप्रैल 2016 को स्थानीयता को परिभाषित करते हुए, उस नीति को नियोजन की नीति से जोड़कर भारी संख्या में झारखंड के बच्चे बच्चियों को नौकरी दी.
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने स्थानीय निवासियों को इस तरह से परिभाषित किया था कि किसी भी वर्ग को किसी भी प्रकार के भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ेगा. वर्तमान सरकार ने 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता को परिभाषित करने संबंधी निर्णय लिया है और इनको भी पता है कि इसे लागू करना कोर्ट की अवमानना होगी. इसलिए इनके द्वारा इस नीति को लागू नहीं किया जायेगा, ऐसी योजना बनायी गयी है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री 23 मार्च 2022 को इसकी वैधानिकता के बारे में राज्य की सबसे बड़ी पंचायत विधानसभा में घोषणा कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 1932 वाली स्थानीयता की नीति को संविधान की 9वीं अनुसूची में सम्मिलित होने के बाद लागू किया जायेगा, जो कभी भी संभव नहीं हो पायेगा.
उन्होंने कहा कि स्थानीयता का मामला हो या आरक्षण का मामला, यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र का मामला है. साथ ही इस नीति को नियोजन से भी नहीं जोड़ा गया है. इसलिए स्पष्ट है कि सरकारी नियुक्तियों में भी वर्तमान में झारखंडवासियों को 1932 अथवा स्थानीयता का कोई लाभ नहीं मिल पायेगा. 5 लाख नौकरी देने के वादे को पूरा नहीं करने के कारण सरकार के प्रति प्रदेश के युवाओं में रोष है. इसलिए यह स्थानीय नीति लोगों को उलझाने, लटकाने और भटकाने की नीयत से घोषित की गयी है.
रघुवर दास ने कहा कि जहां तक आरक्षण में बढ़ोतरी का निर्णय है, यह निर्णय भी असंवैधानिक है. इसे लागू करना असंभव-सा प्रतीत होता है. इस तरह यहां के आदिवासी, मूलवासी और पिछड़ों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया है. उन्हें धोखा दिया गया है. किसी को भी आरक्षण देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, उस श्रेणी के छात्रों की संख्या और उनके प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना आवश्यक है.
इसी क्रम में भाजपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2019 में राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था. इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे पता चलता है कि यह रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है.
उन्होंने कहा अगर सरकार ने रिपोर्ट तैयार नहीं की है, तो आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाने में किन-किन कारकों को ध्यान में रखा गया है, यह भी सार्वजनिक करना चाहिए. लेकिन, ऐसा नहीं किया गया है. सरकार द्वारा किसी सर्वेक्षण की रिपोर्ट को ध्यान में नहीं रखा गया है, न ही आरक्षण को सही तरीके से देने के लिए जिस प्रक्रिया की आवश्यकता है, उसका पालन किया गया है.
उन्होंने कहा जिस तरह से वर्तमान सरकार अपने पद का दुरुपयोग कर खनन व्यापार में लिप्त है, उसी तरह आरक्षण को भी सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए व्यापारिक रूप देकर झारखंडवासियों को धोखा दे रही है. कहा कि मुख्यमंत्री जी यह राजतंत्र नहीं है, लोकतंत्र है. निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण किये बिना इस तरह के फैसले प्रजातंत्र में नहीं लिये जाते.
श्री दास ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में झामुमो-कांग्रेस की सरकार ने कोयला, बालू, गिट्टी की लूट, शराब के व्यापार में और ट्रांसफर-पोस्टिंग में हजारों करोड़ रुपये की उगाही की है. यहां तक कि मुख्यमंत्री ने अपने व अपने परिवार वालों के नाम पर माइनिंग लीज भी ली, जिसका परिणाम है कि मुख्यमंत्री, उनके परिवारवाले तथा सहयोगी केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर हैं. प्रेस वार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक, प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, सह मीडिया प्रभारी तारिक इमरान भी उपस्थित थे.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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