सीएम हेमंत सोरेन का आवास घेरने जा रहे प्राथमिक शिक्षकों को पुलिस बल ने मोरहाबादी मैदान में रोका
Published by : Raj Lakshmi Updated At : 19 Nov 2022 5:29 PM
विरोध कर रहे शिक्षकों को कुछ ही दूर आगे बैरिकेडिंग कर पुलिस ने रोक लिया. शिक्षक अखिल झारखंड प्राथमिक संघ के बैनर तले अपनी चार सूत्री मांगो को लेकर प्रर्दशन कर रहें है. इस दौरान प्रर्दशन की अध्यक्षता कर रहे बिजेंद्र चौबे ने कहा कि इस प्रर्दशन को लेकर पहले ये ही सारी तैयारी की जा चुकी थी.
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आवास घेरने जा रहे प्राथमिक शिक्षकों को पुलिस ने राजधानी रांची स्थित मोरहाबादी मैदान में ही रोक दिया. शनिवार को राज्य भर से प्राथमिक शिक्षक मोरहाबादी मैदान से सीएम आवास का घेराव करने जा रहे थे. मैदान से कुछ ही दूर वे आगे बढ़े थे कि पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग करके आगे बढ़ने से रोक दिया.
अखिल झारखंड प्राथमिक संघ के बैनर तले चार सूत्री मांगों के समर्थन में प्रर्दशन कर रहे हैं. संघ के बिजेंद्र चौबे ने कहा कि इस प्रदर्शन को लेकर पहले ही सारी तैयारी की जा चुकी थी. पुलिस ने रूट भी तय कर दिया था. फिर भी आज हमें पुलिस ने क्यों रोका, हमें नहीं मालूम. कहा कि जब तक हमारी बात खुद मुख्यमंत्री नहीं सुनते, हम यहीं डटे रहेंगे. सरकार हमारे साथ हमेशा भेदभाव करती रही है. हमारी मांगें जायज है और इससे सरकार मुंह नहीं फेर सकती है.
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मोरहाबादी मैदान में राके जाने पर प्रदेश अध्यक्ष राममूर्ति ठाकुर कहते हैं कि सरकार शिक्षकों से बच्चों को पढ़ाने के अलावा सब कुछ करवा लेती है. बाद में हमारी तुलना प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों से की जाती है. 4 शिक्षकों के सहारे एक स्कूल चलता है. बाद में उसी शिक्षक को चुनावी ड्यूटी के साथ-साथ और भी कई तरह के काम करवाती है. लेकिन, जब एमएसीपी देने की बारी आती है, तो शिक्षकों को अलग कर दिया जाता है. फिर भी हमसे यह उम्मीद की जाती है कि हम प्राइवेट स्कूल के शिक्षकों की तरह पढ़ायें.
इसके अलावा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि हम अपना 100 प्रतिशत बच्चों को देना चाहते हैं, लेकिन सरकार यह नहीं चाहती. आज जब हम अपनी बात बताने आये हैं, तो सरकार हमसे मुंह फेर रही है. यहां हमें अपनी बात रखने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है. जब तक खुद मुख्यमंत्री हमारी बात नहीं सुनेंगे, तब तक हम यहां से कहीं नहीं जायेंगे. यहां हमें अपनी बात रखने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
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