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रांची यूनिवर्सिटी के टीआरएल में 98वीं जयंती पर याद किए गए नागपुरी के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रफुल्ल कुमार राय

नागपुरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सविता केशरी ने प्रफुल्ल कुमार राय के साहित्यिक व सांस्कृतिक परिदृश्य को उजागर करते हुए कहा कि हम नागपुरी भाषा भाषी ऐसे महान व्यक्ति को पाकर धन्य हैं. उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए, वो सम्मान आज तक नहीं मिल पाना बहुत ही दुखद है.

रांची: रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय (टीआरएल) में नागपुरी भाषा विभाग के तत्वावाधान में नागपुरी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार प्रफुल्ल कुमार राय की 98वीं जयंती मनायी गयी. झारखंड राज्य खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो त्रिवेणी नाथ साहु ने प्रफुल्ल कुमार राय के बहुआयामी व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आज का दिन संकल्प लेने का दिन है. नागपुरी भाषा साहित्य के उतरोत्तर विकास में नागपुरी भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार प्रफुल्ल कुमार राय का बहुमूल्य योगदान रहा है. भाषा के प्रति उनकी जो श्रद्धा और सोच थी, उस सपने को हम सभी को मिलकर, बगैर किसी भेदभाव के, नि:स्वार्थ भाव के साथ साकार रूप देने की आवश्यकता है. हमारी कोशिश है कि वैश्विक स्तर पर झारखंडी भाषाओं का विकास सुनिश्चित हो. इसके लिए झारखंड राज्य खुला विश्वविद्यालय में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई शुरू की गयी है. उन्होंने कहा कि फैकल्टी की बहाली जल्द ही की जाएगी. इसके लिए रोस्टर बनाकर भेजा जा चुका है.

आज तक उचित सम्मान नहीं मिल पाया

अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवेश कराते हुए नागपुरी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ सविता केशरी ने प्रफुल्ल कुमार राय के साहित्यिक व सांस्कृतिक परिदृश्य को उजागर करते हुए कहा कि हम नागपुरी भाषा भाषी ऐसे महान व्यक्ति को पाकर धन्य हैं. उन्हें जो सम्मान मिलना चाहिए वो सम्मान आज तक नहीं मिल पाना बहुत ही दुखद है. उन्होंने झारखंड आंदोलन में भाषायी व सांस्कृतिक अगुवाई कर आंदोलन को गति प्रदान किया. संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए टीआरएल संकाय के समन्वयक डॉ हरि उरांव ने कहा कि आज का दिन अविस्मरणीय है. हम ऐसे विद्वान की जयंती मना रहे हैं जिनकी बदौलत यह टीआरएल विभाग की स्थापना संभव हो पायी और आज हम इस मुकाम पर पहुंच पाये.

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कभी-कभार जन्म लेते हैं ऐसे महापुरुष

विशिष्ट अतिथि डॉ खालिक अहमद ने प्रफुल्ल कुमार राय की कविता आब नागपुर चुप नइ रही, आब नागपुर बोली को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रफुल्ल दा जैसे शख्स का मिलना मुश्किल है. चूंकि ऐसे महापुरुष हमारे बीच कभी-कभार ही जन्म लेते हैं. उनके संघर्षों को हमारे नये पीढ़ी को जानना व समझना चाहिए. विशिष्ट अतिथि डॉ नाफर अली ने कहा कि प्रफुल्ल कुमार राय अपने आप में एक अथाह समुद्र थे. उनका मुकाबला नहीं. डॉ दिनेश कुमार दिनमणि ने प्रफुल्ल कुमार राय को याद करते हुए कहा कि जो दायित्व प्रफुल्ल दा ने सौंपा है उस दायित्व को निश्छल भाव से पूरा करना चाहिए.

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मौके पर ये थे मौजूद

संकाय के शोधार्थी नमिता पूनम ने प्रफुल्ल कुमार राय के जीवन व साहित्य पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यक्रम की शरूआत विभाग के सोनू सपवार की अगुवाई में नागपुरी भाषा के छात्र-छात्राओं के द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया. संचालन विकी मिंज व धन्यवाद डॉ रीझू नायक ने किया. इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ गीता कुमारी सिंह, मनय मुंडा, डॉ रामकिशोर भगत, डॉ. बीरेन्द्र कुमार महतो, डॉ रीझू नायक, तारकेश्वर मुंडा, डॉ किशोर सुरीन, करम सिंह मुंडा, डॉ बंदे खलखो, डॉ दिनेश कुमार दिनमणि, डॉ सरस्वती गागराई, डॉ नरेंद्र कुमार दास, जयप्रकाश उरांव, गुरुचरण पूर्ति, युगेश प्रजापति, आलोक कुमार मिश्रा, प्रवीण कुमार सिंह, रवि कुमार, युवराज साहु, श्रीकांत गोप, संदीप कुमार महतो, सुखराम उराँव, सरिता, जगदीश, चन्द्रिका कुमारी, श्यामसुंदर, बब्लू कुमार साहु, विष्णु पदा महतो, रवि कुमार, प्रवीण कुमार के अलावा बड़ी संख्या में भाषा प्रेमी, साहित्यकार, शोधार्थी और छात्र-छात्रायें मौजूद थे.

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