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झारखंड स्थापना दिवस से पहले राजस्थान में पीएम मोदी को याद आये बिरसा मुंडा, बुधु भगत और तिलका मांझी

Updated at : 01 Nov 2022 8:40 PM (IST)
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झारखंड स्थापना दिवस से पहले राजस्थान में पीएम मोदी को याद आये बिरसा मुंडा, बुधु भगत और तिलका मांझी

झारखंड स्थापना दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आदिवासी वीरों ने सन् 1857 की क्रांति से पहले ही अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया था. वर्ष 1780 में संथाल परगना में तिलका मांझी के नेतृत्व में ‘दामिन सत्याग्रह’ लड़ा गया था.

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झारखंड स्थापना दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राजस्थान के मानगढ़ में झारखंड के महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा, वीर बुधु भगत और तिलका मांझी को याद दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के इतिहास में आदिवासी वीरों के योगदान को वो जगह नहीं मिली, जो मिलनी चाहिए थी. उनके संघर्ष को प्रमुखता नहीं दी गयी है. देश अब उन गलतियों को सुधार रहा है.

1857 की क्रांति से पहले अंग्रेजों के खिलाफ छेड़ा आंदोलन

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आदिवासी वीरों ने सन् 1857 की क्रांति से पहले ही अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष छेड़ दिया था. वर्ष 1780 में संथाल परगना में तिलका मांझी के नेतृत्व में ‘दामिन सत्याग्रह’ लड़ा गया था. ‘दामिन संग्राम’ लड़ा गया था. उन्होंने कहा कि 1830-32 में वीर बुधु भगत के नेतृत्व में ‘लरका आंदोलन’ चला. 1855 में आजादी की यही ज्वाला ‘सिदो कान्हू क्रांति’ के रूप में जल उठी.

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बिरसा मुंडा ने आदिवासियों में प्रज्ज्वलित की क्रांति की ज्वाला

पीएम मोदी ने कहा कि इसी तरह भगवान बिरसा मुंडा ने लाखों आदिवासियों में क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित की. वो बहुत कम आयु में इस दुनिया से चले गये, लेकिन उनकी ऊर्जा, उनकी देशभक्ति और उनका हौसला ‘टाना भगत आंदोलन’ जैसी क्रांतियों का आधार बना. पीएम मोदी ने कहा कि गुलामी की शुरुआती सदियों से लेकर 20वीं सदी तक ऐसा कोई भी कालखंड नहीं दिखेगा, जब आदिवासी समाज ने स्वाधीनता संग्राम की मशाल को थामे न रखा हो.

आदिवासी समाज के बिना पूरा नहीं होता भारत का इतिहास

पीएम ने कहा कि भारत का अतीत, भारत का इतिहास, भारत का वर्तमान और भारत का भविष्य आदिवासी समाज के बिना पूरा नहीं होता. कहा कि 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ में जो नरसंहार हुआ, वह अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता की पराकाष्ठा थी. एक ओर आजादी में निष्ठा रखने वाले भोले-भाले आदिवासी थे, तो दूसरी ओर दुनिया को गुलाम बनाने की सोच थी, मानगढ़ की इस पहाड़ी पर अंग्रेजी हुकूमत ने डेढ़ हजार से ज्यादा युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं को घेरकर मौत के घाट उतार दिया.

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इतिहास में आदिवासियों को नहीं मिली उचित जगह

पीएम मोदी ने कहा कि अंग्रेजों ने 1,500 से ज्यादा लोगों की जघन्य हत्या करने का पाप किया, लेकिन दुर्भाग्य से आदिवासी समाज के संघर्ष और बलिदान को आजादी के बाद लिखे गये देश के इतिहास में वो जगह नहीं मिली, जो उन्हें मिलनी चाहिए थी. पीएम मोदी राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ धाम में केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित समारोह ‘मानगढ़ धाम की गौरव गाथा’ में बोल रहे थे. यहां मानगढ़ नरसंहार के शहीदों को श्रद्धांजलि दी गयी. मानगढ़ धाम राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में रहने वाले आदिवासियों का पवित्र स्थान है.

15 नवंबर को मनाया जाता है झारखंड स्थापना दिवस

उल्लेखनीय है कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन झारखंड प्रदेश अस्तित्व में आया था. बिहार से कटकर झारखंड अलग राज्य बना था. 15 नवंबर को हर साल झारखंड स्थापना दिवस मनाया जाता है. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने वर्ष 2000 में तीन नये राज्यों का गठन किया था. झारखंड के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य भी इसी साल अस्तित्व में आये थे.

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एजेंसी इनपुट के साथ

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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