झारखंड के 1.14 लाख किसानों को अब नहीं मिलेगा पीएम किसान योजना का लाभ, जानें क्या है वजह
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 13 Oct 2022 9:25 AM
झारखंड के 1.14 लाख किसान अब पीएम किसान योजना का लाभ नहीं सकेंगे. ये वो किसान हैं जिनकी जमीन एक से अधिक जिलों में थी. राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर ऐसे किसानों को चिह्नित कर रहा है.
झारखंड में 1.14 लाख किसान प्रधानमंत्री किसान योजना का दोहरा लाभ ले रहे थे. ये किसान अब पीएम किसान योजना का लाभ नहीं ले पायेंगे. ये वैसे किसान हैं, जिनकी एक से अधिक जिलों में जमीन थी. ऐसे किसान कई जिलों से पीएम किसान योजना का लाभ ले रहे थे. जांच में ऐसे किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर ऐसे किसानों को चिह्नित कर रहा है. पूरे देश में इस तरह का मामला था. किसानों को उनके लैड रिकॉर्ड के आधार पर चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू की गयी है. अब तक राज्य में 22 लाख किसानों को चिह्नित किया गया है, जो दोहरा लाभ ले रहे थे.
पहले भारत सरकार ने किसानों के नाम और उनकी जमीन के अाधार पर पीएम किसान योजना कि लिए लाभुक तय किया था. इसमें प्रावधान था कि एक किसान एक ही बार लाभ ले सकेंगे. इसके लिए जिलास्तर से लाभुक का अनुमोदन होता था. भारत सरकार ने जब डाटा की जांच की, तो पता चला कि पूरे देश में लाखों किसान कई जिलों से लाभ ले रहे हैं.
इसके बाद भारत सरकार ने सभी राज्यों को जांच का आदेश दिया. भारत सरकार ने कहा कि सभी राज्य अब जमीन की जीपीएस रिकॉर्ड, खाता व प्लॉट नंबर के आधार पर किसानों की पहचान करें. केंद्र सरकार ने डाटा की जांच उपायुक्त के स्तर से करायी है.
झारखंड में अद्यतन सर्वे रिपोर्ट नहीं है. इस कारण केंद्र सरकार से राज्य सरकार ने वंशावली को जमीन के मालिक का अाधार बनाने का आग्रह किया. इसे भारत सरकार ने स्वीकार किया था. इसके बाद कृषि विभाग ने भू राजस्व विभाग के साथ मिलकर डाटा अपडेट किया. इसका मिलान करने के लिए भारत सरकार को यहां की झारभूमि का सर्वर उपयोग करने की अनुमति दी गयी.
भारत सरकार ने इनमें से 17.60 लाख किसानों का डाटा वैलिडेट कराया है. इन किसानों को पीएम किसान योजना की 12वीं किस्त का भुगतान किया जायेगा. राज्य सरकार ने तय किया है कि 22.60 लाख में 17.60 लाख किसानों को 12वीं किस्त की राशि दे दी जायेगी. शेष किसानों का भुगतान डाटा जांच के बाद होगा. डाटा की जांच किसानों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है.
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अब जमीन के रिकॉर्ड से होगी किसानों की पहचान
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जांच में ऐसे किसानों की संख्या बढ़ने की उम्मीद
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