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अब दाखिल-खारिज का हर काम ऑनलाइन, रहेगी पूरी पारदर्शिता

Updated at : 31 Jul 2020 1:25 AM (IST)
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अब दाखिल-खारिज का हर काम ऑनलाइन, रहेगी पूरी पारदर्शिता

राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने दाखिल-खारिज में गड़बड़ी रोकने के लिए नया आदेश जारी किया है. मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद जारी इस आदेश के अनुसार अब छोटी त्रुटियों पर आवेदन अस्वीकार्य नहीं किया जायेगा

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रांची : राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव केके सोन ने दाखिल-खारिज में गड़बड़ी रोकने के लिए नया आदेश जारी किया है. मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद जारी इस आदेश के अनुसार अब छोटी त्रुटियों पर आवेदन अस्वीकार्य नहीं किया जायेगा, बल्कि संबंधित आवेदक से दस्तावेजों में सुधार या अन्य छूटे हुए आवश्यक दस्तावेज के लिए लॉगइन में फिर से इंट्री करायी जायेगी.

अंचल अधिकारी यदि आवेदन अस्वीकृत करते हैं, तो फिर से इसे स्वीकार करने की व्यवस्था नहीं होगी तथा दो दिनों के अंदर आदेश की प्रति भूमि सुधार उप समाहर्ता के लॉगिन में डालनी होगी और आवेदक सीओ के आदेश के विरुद्ध डीसीएलआर के न्यायालय में ऑनलाइन अपील कर सकेंगे. पहले सीओ के आदेश की नकल लेने के बाद डीसीएलआर के पास अपील की व्यवस्था थी.

माना जा रहा है कि नयी व्यवस्था से दाखिल-खारिज और अपील की प्रक्रिया पहले से अधिक पारदर्शी, तार्किक और विवाद रहित होगी. नयी ऑनलाइन व्यवस्था के तहत यदि लगे की दाखिल-खारिज के लिए कुछ कागजात की जरूरत है, तो वे मामले की जांच कर जरूरी कागजात संबंधित विवरणी के साथ ऑनलाइन संलग्न कर सकेंगे.

यानी विवाद या आपत्ति होने पर कागजात को संलग्न करने की व्यवस्था होगी. सभी कागजात आवेदक सहित आपत्ति करनेवाला पक्ष और कर्मी सब ऑनलाइन देख सकेंगे. समय सीमा के अंदर करना होगा सारा काम : सचिव ने आदेश दिया है कि आपत्ति रहित मामले 30 दिनों में और आपत्ति वाले मामले को 90 दिनों में निबटाना होगा.

इसका उल्लेख राइट टू सर्विस एक्ट में भी है. विभाग ने आवेदन स्वीकार करने से लेकर इसके निबटारे तक के लिए हर स्तर के कर्मियों के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी है. वहीं, डीसीएलआर के पास अपील में मामला जाने पर अधिकतम 45 दिनों में आदेश पारित कर दिया जायेगा.

अब क्या होती थी गड़बड़ी : यह शिकायत सामान्य है कि मामूली कारणों से भी अंचल अधिकारी दाखिल-खारिज के आवेदन अस्वीकार कर देते हैं. बाद में इसे दुरुस्त करने के नाम पर अंचल कार्यालय में आवेदक से राशि वसूलने की शिकायतें मिलती थी. पैसे मिल जाने पर पुनः ऑनलाइन आवेदन स्वीकार कर लिया जाता था और इसका निबटारा भी कर दिया जाता था. इस व्यवस्था से लोग परेशान थे. लोगों को अंचल कार्यालयों का चक्कर भी लगाना पड़ता था.

मूल खतियान एवं पंजी-2 में केवल टंकण त्रुटियां सुधारें : सचिव ने अंचलाधिकारियों को यह भी लिखा है कि मूल खतियान एवं पंजी-2 के डिजिटाइजेशन में किसी प्रकार का सुधार नहीं किया जायेगा. ऐसा होने पर उन्हें पूरी तरह दोषी माना जायेगा तथा उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जायेगी. केवल डिजिटाइजेशन में हुई टंकण त्रुटियों के निराकरण के लिए पोर्टल खोला गया है.

  • सीओ द्वारा अस्वीकृत आवेदन की डीसीएलआर के पास हो सकेगी अपील

  • मुख्यमंत्री की सहमति के बाद भूमि सुधार विभाग का नया आदेश जारी

कल से बढ़ सकती है ग्रामीण जमीन की दर : राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की जमीन दर एक अगस्त से बढ़ सकती है. निबंधन विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है. जमीन दर में वृद्धि पांच से 10 फीसदी तक हो सकती है. पर यह दर 10 फीसदी से अधिक नहीं होगी. विभागीय सूत्रों के अनुसार सुदूर ग्रामीण इलाकों में जमीन की दर में पांच फीसदी वृद्धि की जा रही है. वहीं, प्रखंड मुख्यालय से सटे या थोड़ा महत्व वाले स्थानों की जमीन का रेट 10 फीसदी तक बढ़ाया जा रहा है. रांची अरबन के तहत शहर से सटे इलाकों की जमीन दर में वृद्धि अगले वर्ष होगी.

Post by : Pritish Sahay

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