झारखंड में 60% से ज्यादा बच्चे व महिलाएं एनीमिया की चपेट में, आदिवासी बहुल इलाकों में इसकी तादाद अधिक

Published by :Sameer Oraon
Published at :12 Oct 2022 10:19 AM (IST)
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झारखंड में 60% से ज्यादा बच्चे व महिलाएं एनीमिया की चपेट में, आदिवासी बहुल इलाकों में इसकी तादाद अधिक

झारखंड के 60 फीसदी से अधिक बच्चे और महिलाएं में एनिमिया की चपेट में है. इसकी जानकारी हमें नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट से मिली है. राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में 67 फीसदी बच्चे एनीमिक पाये गये हैं. जबकि महिलाओं में इसकी संख्या 65.3 फीसदी है.

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रांची: झारखंड में किशोरी बालिकाएं और महिलाओं में एनीमिया एक गंभीर समस्या बन गयी है. राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में 67 फीसदी बच्चे एनीमिक पाये गये हैं. महिलाओं में यह बीमारी 65.3 फीसदी, जबकि पुरुषों में 30 फीसदी के आसपास पायी गयी है. झारखंड देश के उन तीन राज्यों में शामिल है, जहां आयरन फोलिक एसिड की कमी से पीड़ित मरीजों की संख्या काफी अधिक है. हालांकि, यहां पर लौह अयस्क के प्रचुर भंडार हैं. पर गरीबी और सामाजिक हालात से बच्चे, महिलाएं और अन्य आयरन की कमी से ग्रसित हैं. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (एनएचएफएस) की रिपोर्ट में ये बातें सामने आयी हैं.

20 से 29 वर्ष की महिलाओं में समस्या ज्यादा : 

एनएफएचएस-5 की सर्वे रिपोर्ट की मानें, तो झारखंड में पांच वर्षों में एनीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या में तीन प्रतिशत की कमी आयी है. पर अब भी आंकड़े चौंकानेवाले हैं. वर्ष 2015-16 में एनएफएचएस-4 सर्वे में 70 प्रतिशत बच्चे एनीमिक पाये गये थे, जबकि ताजा सर्वे में 67 प्रतिशत बच्चों में यह शिकायत पायी गयी. रिपोर्ट में बताया गया है कि 20 से 29 वर्ष की महिलाओं में एनीमिया की शिकायत सबसे ज्यादा है.

ग्रामीण और आदिवासी बाहुल्य इलाकों में ऐसी महिलाओं की तादाद सबसे ज्यादा पायी गयी है. एनएफएचएस-4 में राज्य में एनीमिया पीड़ित महिलाओं की तादाद 65.2 फीसदी थी, वहीं एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 65.3 फीसदी है. 15 से 19 साल की किशोरियों में भी एनीमिया का असर पांच वर्षों में कम नहीं हुआ.

एनएफएचएस-4 में इस आयु वर्ग की 65 प्रतिशत किशोरियां एनीमिक थीं. एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 65.8 प्रतिशत पर पहुंच गया है. रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 24 में से 10 जिलों में एनीमिया के मामले बढ़ गये हैं. राज्य के आदिवासी बहुल कोल्हान और संताल परगना प्रमंडल में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है.

राज्य के पांच वर्ष से कम आयु के 45 फीसदी बच्चों में बौनापन:

एनएफएचएस के नतीजों के मुताबिक राज्य में 38 प्रतिशत महिलाएं और 32 प्रतिशत पुरुष बॉडी मास इंडेक्स के हिसाब से या तो अत्यंत दुबले हैं या अत्यधिक वजन वाले हैं.

राज्य सरकार कुपोषण से निबटने के लिए बृहत पैमाने पर कार्य योजना बनायी है. हमलोग कुपोषण को राेकने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं. हमने राज्य के प्रत्येक जिले को निर्देशित किया है कि कुपोषित बच्चों का आंकड़ा तैयार कर उनके बेहतर इलाज के व्यवस्था सुनिश्चित करें. साथ ही कुपोषण रोकने के लिए हर संभव तैयारी करने का निर्देश दिया है.

– बन्ना गुप्ता, स्वास्थ्य मंत्री झारखंड सरकार

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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