Ranchi news : हाइकोर्ट ने पत्नी व बच्चे का मासिक गुजारा भत्ता बढ़ा कर 90 हजार रुपये किया

इसमें उसके नाबालिग बेटे के भरण-पोषण के लिए 40 हजार रुपये भी शामिल है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है.
रांची. झारखंड हाइकोर्ट ने एक महिला को फैमिली कोर्ट द्वारा दिये गये स्थायी गुजारा भत्ते को बढ़ा कर 90 हजार रुपये प्रति माह कर दिया है. इसमें उसके नाबालिग बेटे के भरण-पोषण के लिए 40 हजार रुपये भी शामिल है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद व जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने उक्त फैसला सुनाया. खंडपीठ ने कहा कि अपीलकर्ता पत्नी के भरण-पोषण के लिए प्रति माह 50,000 रुपये की राशि उचित है, जिसके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है, बल्कि उसे अपने बेटे की देखभाल में खुद को व्यस्त रखना पड़ता है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है. बेटे की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और आजीविका, भरण-पोषण, उपचार व पढ़ाई के लिए प्रति माह 40,000 रुपये की राशि उचित होगी. अपीलकर्ता पत्नी व बेटे दोनों को दिये जानेवाले स्थायी गुजारा भत्ते में मुद्रास्फीति आदि को ध्यान में रखते हुए हर दो वर्ष में पांच प्रतिशत की वृद्धि की जायेगी. खंडपीठ ने पति की नौकरी पर भी ध्यान दिया, जिसमें कहा गया कि वह प्रतिमाह 2,31,294 रुपये कमाता है. खंडपीठ ने उक्त फैसला रांची के अतिरिक्त फैमिली कोर्ट द्वारा मूल मुकदमे में पारित निर्णय व डिक्री से उत्पन्न प्रथम अपील में दिया गया. ट्रायल कोर्ट ने तलाक के आदेश को स्वीकार कर लिया तथा पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता के रूप में 12 लाख रुपये व बेटे के लिए आठ हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था, जिसे अपीलकर्ता ने चुनाैती दी थी. अपीलकर्ता का विवाह वर्ष 2010 में हुआ था तथा 2012 में उनका एक बेटा पैदा हुआ था. अपीलकर्ता पत्नी ने कहा कि उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद पति ने उसे छोड़ दिया. उससे और बच्चे से सभी तरह के संपर्क समाप्त कर दिया. उसने यह भी आरोप लगाया कि उसके ससुरालवालों ने उसे भोपाल में रहने की सलाह दी, जबकि प्रतिवादी मुंबई में कमाता रहा. पति के बेरोजगारी वाले दावे का सच सामने लाने के लिए अपीलकर्ता पत्नी ने एक आरटीआइ का आवेदन दिया, जिससे पता चला कि उसकी सालाना आय 27 लाख रुपये है. अपीलकर्ता ने गुजारा भत्ता बढ़ाने का आग्रह किया, जिसे खंडपीठ ने स्वीकार कर लिया.
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