Jharkhand News: कैबिनेट के फैसले के बाद भी मिड डे मील में नहीं मिलेंगे 5 दिन अंडे, ये है इसकी बड़ी वजह

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Jan 2023 9:08 AM

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झारखंड में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मध्याह्न भोजन के तहत अभी सप्ताह में दो दिन अंडा दिया जाता है. झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने बच्चों को सप्ताह में पांच दिन अंडा देने का प्रस्ताव तैयार किया था

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झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों को सप्ताह में पांच दिन अंडा देने का निर्णय फिलहाल प्रभावी नहीं होगा. यानी अभी बच्चों को सप्ताह में दो दिन ही अंडा मिलेगा. कैबिनेट के निर्णय के लगभग दो माह बाद भी इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा अधिसूचना जारी नहीं की गयी है.

राज्य में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मध्याह्न भोजन के तहत अभी सप्ताह में दो दिन अंडा दिया जाता है. झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण ने बच्चों को सप्ताह में पांच दिन अंडा देने का प्रस्ताव तैयार किया था. विभागीय स्तर पर इसकी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा गया था.

कैबिनेट से स्वीकृत के लगभग दो माह बाद बीत जाने के बाद भी आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. संभावना जतायी जा रही है कि बच्चों को सप्ताह में पांच दिन अंडा देने के निर्णय की दोबारा समीक्षा हो सकती है. इसके लिए फिर से प्रस्ताव तैयार किया जायेगा. निर्णय पर रोक के लिए इसे फिर से कैबिनेट भेजना होगा. फिलहाल बच्चों को दो दिन ही अंडे मिलेंगे.

250 करोड़ खर्च का अनुमान

राज्य के सरकारी स्कूलों में बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार और 40 फीसदी राशि राज्य सरकार देती है. स्कूलों में पोषक आहार के रूप में अंडा के लिए शत-प्रतिशत राशि राज्य सरकार द्वारा दी जाती है. स्कूलों में अतिरिक्त तीन दिन अंडा देने से सालना लगभग 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आयेगा.

तीन दिन से दो दिन किया गया था

योजना की शुरुआत में राज्य के सरकारी स्कूलों के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा दिया जाता था. प्रति अंडा चार रुपये के दर से राशि आवंटित की जाती थी. अंडा के कीमत में बढ़ोतरी के बाद स्कूलों को प्रति अंडा छह रुपये की दर से राशि दी जाने लगी, लेकिन सप्ताह में तीन दिन के बदले अंडा दो दिन दिया जाने लगा. राज्य के सरकारी स्कूलों में रोजाना लगभग 30 लाख बच्चे मध्याह्न भोजन खाते हैं. जो बच्चे अंडा नहीं खाते हैं, उन्हें फल देने का प्रावधान है.

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