Mahatma Gandhi Death Anniversary : महात्मा गांधी की राह पर चल रहे झारखंड के डॉ मधुसूदन, ग्रामीण इलाकों में देते हैं नि:शुल्क परामर्श

Mahatma Gandhi Death Anniversary, Ranchi News, रांची न्यूज : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज शनिवार (30 जनवरी) को पुण्यतिथि है. झारखंड में इन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है. छोटा मूरी स्थित धनवन्तरी आयुर्वेदिक शोध संस्थान के डॉ मधुसूदन मिश्रा ने गांधी के व्यक्तित्व व जीवनशैली को अपने प्रोफेशन में शामिल किया है. प्राकृतिक जड़ी-बूटी व साग को दवा के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. ग्रामीण इलाके में नि:शुल्क परामर्श देते हैं.
Mahatma Gandhi Death Anniversary, Ranchi News, रांची न्यूज : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज शनिवार (30 जनवरी) को पुण्यतिथि है. झारखंड में इन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है. छोटा मूरी स्थित धनवन्तरी आयुर्वेदिक शोध संस्थान के डॉ मधुसूदन मिश्रा ने गांधी के व्यक्तित्व व जीवनशैली को अपने प्रोफेशन में शामिल किया है. प्राकृतिक जड़ी-बूटी व साग को दवा के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं. ग्रामीण इलाके में नि:शुल्क परामर्श देते हैं.
धनवन्तरी आयुर्वेदिक शोध संस्थान के डॉ मधुसूदन मिश्रा सबको एक दिन उपवास करने की सलाह देते हैं. सरल भाषा में लोगों को बताते हैं कि शरीर मशीन की तरह है. खाद्य पदार्थ के रूप में ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो विपरीत प्रभाव पड़ेगा. डॉ मिश्रा ने बताया कि गांधी का प्राकृतिक संसाधन से काफी लगाव व विश्वास था. प्रकृति से जुड़कर खुद स्वस्थ रखना उनकी प्राथमिकता थी. इसके लिए अपनी दिनचर्या, आहार व विकार को संयमित कर रखा था. एक दिन शरीर को आराम देने के लिए उपवास रखते थे, ताकि आंतरिक संतुलन कायम रहे.
डॉ मधुसूदन मिश्रा कहते हैं कि गांधी जी ने अपने जीवन में प्राकृतिक आहार यानी कंद-मूल,फल, जड़ी-बूटी को शामिल किया. संतुलित आहार व संतुलित जीवनशैली के कारण ही कम वस्त्र धारण करने के बाद भी वह मौसमी बीमारी से बचे रहते थे. प्राकृतिक खाद्य पदार्थ को शामिल कर ही वह स्वस्थ रहे. यही कारण है कि गांधीजी ने देसी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा दिया.
मैं गांधी जी के आदर्शों से काफी प्रेरित हूं. यही कारण है कि नेचुरोपैथी को फॉलो करता हूं. मरीजों की सेवा के लिए गांधीजी के नक्शे कदम पर योग और प्राकृतिक चिकित्सा पर जोर देता हूं. बापू मिट्टी और हर्बल चिकित्सा पर विश्वास करते थे. प्राचीन काल से ही प्राकृतिक चिकित्सा को महत्व दिया गया है. ऋषि-मुनियों ने आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाया. हालांकि बीच में यह पद्धति गौण हो गयी थी. एक बार फिर इसके प्रति विश्वास बढ़ने लगा है. हम चिकित्सक भी लोगों को इन सबके के प्रति जागरूक कर रहे हैं. गांधीजी का स्वास्थ्य दर्शन हमें प्राकृतिक चिकित्सा के लिए प्रेरित करता है.
Posted By : Guru Swarup Mishra
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