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विष्णु प्रभाकर की जयंती पर बोले सीयूजे के प्रो रत्नेश, रचनाओं में दिखती है आजादी के संघर्ष की दास्तां

Updated at : 23 Jun 2023 10:44 PM (IST)
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विष्णु प्रभाकर की जयंती पर बोले सीयूजे के प्रो रत्नेश, रचनाओं में दिखती है आजादी के संघर्ष की दास्तां

अखरावट के संयोजक और हिंदी विभाग के सहायक अध्यापक डॉ उपेंद्र कुमार 'सत्यार्थी' ने विष्णु प्रभाकर पर गांधी का प्रभाव विषय पर अपना व्याख्यान दिया. उन्होंने विष्णु प्रभाकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए 1955 में प्रकाशित उनके 'निशिकांत' नामक उपन्यास पर विस्तृत चर्चा की.

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रांची: झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के साप्ताहिक साहित्यिक कार्यक्रम ‘अखरावट’ के तहत आज शुक्रवार को हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार विष्णु प्रभाकर की जयंती मनायी गयी. इस कार्यक्रम की शुरुआत विष्णु प्रभाकर के साक्षात्कार पर दूरदर्शन द्वारा निर्मित एक डॉक्यूमेंट्री के प्रदर्शन से हुई. इस अवसर पर हिन्दी विभाग के अध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय के छात्र अधिष्ठता प्रो रत्नेश विष्वाकसेन ने कहा कि विष्णु प्रभाकर प्रेमचन्द युग के बाद के एक महत्वपूर्ण साहित्यकार थे. उनकी रचनाओं में आजादी के संघर्ष की दास्तां दिखाई देती है.

विष्णु प्रभाकर पर गांधी का प्रभाव विषय पर दिया व्याख्यान

इसके बाद अखरावट के संयोजक और हिंदी विभाग के सहायक अध्यापक डॉ उपेंद्र कुमार ‘सत्यार्थी’ ने विष्णु प्रभाकर पर गांधी का प्रभाव विषय पर अपना व्याख्यान दिया. उन्होंने विष्णु प्रभाकर के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए 1955 में प्रकाशित उनके ‘निशिकांत’ नामक उपन्यास पर विस्तृत चर्चा की. उन्होंने कहा कि इस उपन्यास में गांधी के सत्याग्रह की रचनात्मक अभिव्यक्ति दिखाई पड़ती है. इस उपन्यास का मुख्य पात्र निशिकांत, विष्णु प्रभाकर के जीवन से साम्य रखता है. विष्णु प्रभाकर गांधी के असहयोग आंदोलन से प्रभावित होकर सरकारी नौकरी छोड़कर सत्याग्रह आंदोलन में कूद पड़े थे. उसी प्रकार उपन्यास का पात्र निशिकांत भी सब कुछ छोड़ आंदोलन में कूद पड़ता है. निशिकांत उपन्यास विष्णु प्रभाकर के राजनीतिक-सामाजिक गतिविधियों को रेखांकित करता है.

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कार्यक्रम में ये थे मौजूद

इस कार्यक्रम में विभाग के अध्यक्ष प्रो रत्नेश विष्वाकसेन, सहायक आचार्य डॉ रवि रंजन, डॉ जगदीश सौरभ एवं विभाग के अनेक विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित थे. मंच संचालन शोधार्थी रवि रंजन ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन परास्नातक विद्यार्थी भुवनेश कुमार प्रधान ने किया.

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