शराब घोटाला: नुकसान का आकलन किए बिना किसके कहने पर बनी थी नीति, पूर्व उत्पाद आयुक्त से ACB का सवाल
सांकेतिक तस्वीर | AI Image
झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में ACB ने जांच तेज कर दी है. तीन पूर्व अधिकारियों से घंटों चली पूछताछ में उत्पाद नीति बनाने की प्रक्रिया, टेंडर शर्तों में बदलाव और राज्य को हुए कथित राजस्व नुकसान से जुड़े अहम सवाल पूछे गए. क्या जल्दबाजी में निर्णय लिए गए?
रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जांच तेज कर दी है. मंगलवार को एसीबी मुख्यालय में तीन पूर्व अधिकारियों से घंटों पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान एसीबी ने उत्पाद नीति बनाने की प्रक्रिया, टेंडर शर्तों में बदलाव, बैंक गारंटी और राज्य को हुए कथित राजस्व नुकसान से जुड़े कई अहम सवाल पूछे.
पूछताछ के लिए पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, तत्कालीन संयुक्त आयुक्त (उत्पाद) गजेंद्र सिंह और झारखंड स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) के तत्कालीन महाप्रबंधक (वित्त) सुधीर कुमार दास एसीबी मुख्यालय पहुंचे. सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई पूछताछ शाम तक चली. इसके बाद तीनों अधिकारी अपने-अपने घर लौट गए.
जल्दबाजी में किसके निर्देश पर लिया गया निर्णय
सूत्रों के अनुसार, एसीबी अधिकारियों ने पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश से पूछा कि नई उत्पाद नीति बनाते समय यह आकलन क्यों नहीं किया गया कि इससे राज्य को कितना लाभ या नुकसान होगा. जांच टीम ने यह भी जानना चाहा कि महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किए बिना नीति को जल्दबाजी में लागू करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया.
पूछताछ के दौरान एसीबी ने जांच में मिले दस्तावेज अधिकारियों को दिखाए और उनसे उनकी सत्यता तथा निर्णय प्रक्रिया को लेकर स्पष्टीकरण मांगा.
टेंडर प्रक्रिया और बैंक गारंटी पर भी सवाल
सूत्रों के मुताबिक एसीबी ने अधिकारियों से टेंडर प्रक्रिया में किए गए बदलाव, बैंक गारंटी की जांच और सत्यापन, भुगतान प्रक्रिया तथा फाइलों की मंजूरी से जुड़े सवाल भी पूछे. जांच टीम ने यह जानने की कोशिश की कि टेंडर की शर्तों में बदलाव किस स्तर पर हुआ, किस अधिकारी ने उसे मंजूरी दी और बैंक गारंटी के सत्यापन में नियमों का पूरी तरह पालन हुआ या नहीं.
इसके अलावा शराब आपूर्ति से जुड़े भुगतान और राज्य सरकार को हुए कथित राजस्व नुकसान के संबंध में भी अधिकारियों का पक्ष लिया गया.
दस्तावेजों से किया गया बयानों का मिलान
एसीबी अधिकारियों ने पहले दर्ज बयानों और जांच के दौरान मिले दस्तावेजों का मिलान किया. कुछ मामलों में अधिकारियों से अलग-अलग निर्णयों और दस्तावेजों पर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया. हालांकि एसीबी ने पूछताछ के दौरान पूछे गए सवालों और जवाबों का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है.
जरूरत पड़ने पर फिर बुलाया जा सकता है
सूत्रों के अनुसार, जांच में यदि नए तथ्य सामने आते हैं या अतिरिक्त स्पष्टीकरण की आवश्यकता होती है तो इन अधिकारियों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.
बुधवार को फिर होगी पूछताछ, तीन और लोगों को समन
एसीबी ने जांच के अगले चरण में पूर्व सीएसएमसीएल (छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड) के एमडी अरुणपति त्रिपाठी, कारोबारी श्यामजी शरण और नेक्सजेन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अरुण कुमार सिंह को छह अगस्त को पूछताछ के लिए दोबारा समन जारी किया है.
श्यामजी शरण पहले जारी समन पर उपस्थित नहीं हुए थे. एसीबी अब दस्तावेजी, वित्तीय और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का तीनों के पूर्व बयानों से मिलान करेगी. जांच के दौरान अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका तथा नेक्सजेन सॉल्यूशन के अनुबंध और वित्तीय लेन-देन पर विशेष रूप से सवाल पूछे जाएंगे.
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