Liquor Sale News : शराब व्यापारियों से नौ साल के होलोग्राम का हिसाब मांगा गया
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 26 Dec 2024 12:23 AM
झारखंड राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) ने शराब कारोबारियों से पिछले नौ साल के होलोग्राम का हिसाब मांगा है. साथ ही होलोग्राम का हिसाब नहीं देने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी है.
रांची. झारखंड राज्य बिवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) ने शराब कारोबारियों से पिछले नौ साल के होलोग्राम का हिसाब मांगा है. साथ ही होलोग्राम का हिसाब नहीं देने पर उनके विरुद्ध कार्रवाई करने की चेतावनी दी है. कॉरपोरेशन ने महालेखाकार द्वारा ऑडिट के दौरान उठायी गयी आपत्तियों के तहत यह कदम उठाया है. महालेखाकार ने ऑडिट के दौरान शराब व्यापारियों से होलोग्राम के हिसाब नहीं लेने का मामला पकड़ा था. साथ ही इससे राजस्व के नुकसान की आशंका जतायी थी.
निजी कंपनी को मिला था होलोग्राम छापने का काम
महालेखाकार ने ऑडिट के दौरान पाया था कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में नयी उत्पाद नीति लागू की थी. इस दौरान सरकार ने शराब की बोतलों पर लगाये जानेवाले होलोग्राम की छपाई का काम निजी कंपनी ‘मेसर्स प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स प्रालि’ को दे दिया था. इसके पहले तक होलोग्राम की छपाई नासिक स्थित सरकारी प्रेस से करायी जाती थी. शराब के राजस्व की गणना होलोग्राम की संख्या के आधार पर की जाती है. ऑडिट के दौरान पाया गया नयी उत्पाद नीति लागू होने से पहले वित्तीय वर्ष 2015-16 तक की अवधि में शराब व्यापारियों को दिये गये होलोग्राम का हिसाब उनसे नहीं लिया गया था. नियमानुसार व्यापारियों को दिये गये होलोग्राम के इस्तेमाल और बचत का हिसाब लेना जरूरी है.
कंपनियों से नहीं लिया गया होलोग्राम का हिसाब
नयी शराब नीति लागू होने के बाद शराब कारोबारी मेसर्स दिशिता वेंचर प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स ओम साईं बिवरेज कॉरपोरेशन को शराब के थोक व्यापार की जिम्मेदारी दी गयी थी. हालांकि, इन कंपनियों को भी दिये गये होलोग्राम का भी हिसाब नहीं लिया गया. ऑडिट आपत्ति के बाद कॉरपोरेशन ने सभी कंपनियों को पत्र लिख कर अपने-अपने काम की अवधि के दौरान सरकार द्वारा दिये गये होलोग्राम की संख्या, उसके इस्तेमाल का ब्योरा मांगा है. यह भी निर्देश दिया है कि बचे हुए होलोग्राम का ब्योरा दें. साथ ही अब तक होलोग्राम का हिसाब नहीं दिये जाने के मद्देनजर इसके दुरुपयोग होने और इससे सरकार को राजस्व के नुकसान होने की भी आशंका जतायी है.
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