रांची में ऑनलाइन रजिस्टर-2 से छेड़छाड़ कर अवैध जमाबंदी, कांके सीओ ने साइबर थाने में दर्ज कराई एफआईआर

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रांची के कांके स्थित प्रखंड एवं अंचल कार्यालय. फाइल फोटो.

Ranchi News: रांची के कांके अंचल में ऑनलाइन रजिस्टर-2 से कथित छेड़छाड़ कर अवैध जमाबंदी का मामला सामने आया है. सीओ अमित भगत ने साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर झारभूमि पोर्टल से जुड़े सॉफ्टवेयर डेवलपरों सहित सभी संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है.

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कांके से गुलाम रब्बानी की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में ऑनलाइन भूमि अभिलेखों से छेड़छाड़ कर अवैध जमाबंदी कायम करने का बड़ा मामला सामने आया है. कांके अंचल के सुकुरहुटू और गारू मौजा की जमीन से जुड़े मामले में कांके के अंचल अधिकारी (सीओ) अमित भगत ने साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. एफआईआर में ऑनलाइन पंजी-2 में कथित छेड़छाड़ कर अवैध तरीके से जमाबंदी कायम करने का आरोप लगाया गया है. साथ ही झारभूमि पोर्टल से जुड़े सॉफ्टवेयर डेवलपरों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है.

ऑनलाइन पंजी-2 में अवैध जमाबंदी का आरोप

एफआईआर के अनुसार, कांके अंचल के सुकुरहुटू मौजा के खाता संख्या 41 के विभिन्न प्लॉटों, जिनमें प्लॉट संख्या 70डी, 2511 के 24डी, 2475 के 06डी, 2484 के 5.5डी और 2485 के 15.5डी शामिल हैं, से संबंधित भाग एवं पृष्ठ संख्या 9/30 और 11/96 में ऑनलाइन पंजी-2 में अवैध रूप से जमाबंदी कायम कर दी गई. इसी प्रकार, गारू मौजा के खाता संख्या 56 के प्लॉट संख्या 732, 733 और 736 की लगभग 1.28 एकड़ जमीन की भी कथित रूप से अवैध जमाबंदी ऑनलाइन दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है.

फर्जी तरीके से कराया गया दाखिल-खारिज

सीओ अमित भगत ने अपनी शिकायत में बताया है कि गारू मौजा से संबंधित नामांतरण वाद संख्या 10651 और 10652 (वर्ष 2025-26) में भी कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज करा लिया गया. उनका कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह आशंका सामने आई है कि रिकॉर्ड में डिजिटल स्तर पर छेड़छाड़ कर भूमि का नामांतरण कराया गया है.

सॉफ्टवेयर डेवलपरों की भूमिका पर भी उठे सवाल

प्राथमिकी में कांके सीओ ने रैयतों, उनके उत्तराधिकारियों तथा झारभूमि पोर्टल से जुड़े उन सभी सॉफ्टवेयर डेवलपरों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है, जिन्होंने पोर्टल की शुरुआत से अब तक इस प्रणाली पर काम किया है. उन्होंने आशंका जताई है कि तकनीकी स्तर पर मिलीभगत के बिना ऑनलाइन पंजी-2 में इस तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं हो सकती. इसलिए पूरे मामले की गहन तकनीकी और प्रशासनिक जांच आवश्यक है.

दाखिल-खारिज के दौरान सामने आया मामला

सीओ अमित भगत ने बताया कि यह पूरा मामला दाखिल-खारिज की प्रक्रिया के दौरान सामने आया. दस्तावेजों की जांच के समय ऑनलाइन रिकॉर्ड और वास्तविक अभिलेखों में अंतर मिलने पर संदेह गहराया, जिसके बाद विस्तृत जांच शुरू की गई. प्राथमिक जांच में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद साइबर थाना में एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया गया.

भू-माफियाओं पर लगाया गंभीर आरोप

सीओ ने आरोप लगाया कि कुछ भू-माफिया फर्जी वंशावली तैयार कर सरकारी और निजी जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में झारभूमि पोर्टल से जुड़े कंप्यूटर ऑपरेटरों या तकनीकी कर्मियों की मिलीभगत से ऑनलाइन पंजी-2 में छेड़छाड़ कर गलत तरीके से जमाबंदी कायम कराई जा रही है. उनके अनुसार, इस तरह की गतिविधियां भूमि रिकॉर्ड प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं.

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पूरे राज्य में खुल सकते हैं बड़े मामले

कांके सीओ अमित भगत का मानना है कि यह मामला केवल कांके अंचल तक सीमित नहीं हो सकता. यदि इस दिशा में व्यापक जांच कराई जाती है तो रांची के अन्य अंचलों के साथ-साथ झारखंड के कई जिलों में भी ऑनलाइन पंजी-2 में छेड़छाड़ और अवैध जमाबंदी के ऐसे मामले सामने आ सकते हैं. उन्होंने संबंधित एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में डिजिटल भूमि अभिलेखों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर भी नए सवाल खड़े हो गए हैं.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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