6 साल में बिना परीक्षा लिये बदल गयी JTET की दो नियमावली, अब फिर होगा बदलाव
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 15 Feb 2023 7:14 AM
वैसे राज्य में वर्ष 2011 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जेटेट के लिए तीन नियमावली बनीं. पहली नियमावली 2012 में बनी थी, जिसके तहत दो परीक्षाएं हुईं. इसके बाद 2019 में फिर नयी नियमावली बनी
झारखंड में पिछले 12 वर्ष में मात्र दो जेटेट हुई. जबकि, ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के तहत हर वर्ष एक परीक्षा लेने का प्रावधान है. राज्य में पिछले छह साल से एक भी जेटेट आयोजित नहीं हुई. जबकि, इस दौरान दो नियमावली बदल गयी. लेकिन इसमें अब फिर से बदलाव करना होगा.
वैसे राज्य में वर्ष 2011 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जेटेट के लिए तीन नियमावली बनीं. पहली नियमावली 2012 में बनी थी, जिसके तहत दो परीक्षाएं हुईं. इसके बाद 2019 में फिर नयी नियमावली बनी. इसके तहत परीक्षा नहीं हुई, लेकिन इसमें बदलाव हो गया. इसके बाद फिर वर्ष 2022 में नियमावली में संशोधन किया गया. इसके तहत भी परीक्षा नहीं हो सकी.
वर्ष 2022 की नियमावली में अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए झारखंड से मैट्रिक, इंटर परीक्षा पास होना अनिवार्य कर दिया गया था. झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की नियमावली में इस प्रावधान को झारखंड हाइकोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया. ऐसे में नियमावली में फिर बदलाव करना होगा.
पहली से आठवीं कक्षा तक में शिक्षक नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का जेटेट पास होना अनिवार्य है. यह परीक्षा पास नहीं होने पर अभ्यर्थी निजी स्कूल में भी शिक्षक नहीं बना पाते हैं. राज्य में पिछली जेटट वर्ष 2016 में आयोजित हुई थी. इसके बाद से करीब एक लाख अभ्यर्थी प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण परीक्षा पास कर चुके हैं. जेटेट पास नहीं होने के कारण उनके प्रशिक्षण की डिग्री भी बेकार है.
राज्य में वर्ष 2016 में हुई जेटेट में लगभग 55 हजार अभ्यर्थी सफल हुए थे. इन्हें अब तक एक भी शिक्षक नियुक्ति में शामिल होने का अवसर नहीं मिला है. शिक्षा विभाग तैयारी कर रहा था कि पहले इन अभ्यर्थियों को एक नियुक्ति परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाये, इसके बाद फिर पात्रता परीक्षा ली जाये. शिक्षा विभाग न तो शिक्षक की नियुक्ति कर सका न ही पात्रता परीक्षा हो सकी.
जेटेट के लिए अब फिर नियमावली में संशोधन करना होगा. इसमें से मैट्रिक-इंटर की परीक्षा झारखंड से पास होने का प्रावधान हटाना होगा. इसके लिए शिक्षा विभाग को फिर से नियमावली में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करनी होगी.
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