JSSC CGL Scam: नेपाल के होटलों में रटवाए गए 120 सवाल, 70 लाख में बिकीं नौकरियां, जानिए CID की जांच में क्या-क्या आया सामने?
JSSC दफ्तर की तस्वीर
JSSC CGL परीक्षा पेपर लीक मामले में CID की जांच से बड़े खुलासे हुए हैं. कथित तौर पर अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले नेपाल और बोकारो में ठहराकर 120 सवाल रटवाए गए. इस पूरे नेटवर्क में 12 लाख से 70 लाख रुपये तक वसूले गए.
इनपुट: तन्वी झा
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा को लेकर कथित पेपर लीक और धांधली का मामले की जांच जारी है. शुरुआती पड़ताल में जांच एजेंसियों को प्रश्नपत्र लीक होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले थे. उस समय ये मामला अभ्यर्थियों से केवल प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर पैसे वसूले जाने तक ही सीमित माना जा रहा था. हालांकि बाद में हुई जांच और गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान सामने आए नये दावों के बाद जांच की दिशा बदलती नजर आई. अब CID दस्तावेजों की जांच, कॉल डिटेल खंगालने और संदिग्धों से पूछताछ के जरिये इसके नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. आज हम इस लेख में आपको बताएंगे कि अब तक इस मामले में क्या क्या कार्रवाई हुई है?वर्तमान में चल रही जांच कहां तक पहुंची है और आगे क्या हो सकता है?
परीक्षा संपन्न होने के बाद ही शुरू हो गया था विवाद
मामला साल 2024 का है. इसी साल झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने CGL परीक्षा सितंबर माह में आयोजित की थी. लेकिन परीक्षा के बाद ही प्रश्न पत्र और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप सामने आने लगे. इसके बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा में हुई अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की. धीरे-धीरे यह मामला बड़ा होता गया और केस अदालत की चौखट तक पहुंचा गया.
CID ने शुरू की जांच
मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद CID ने जांच शुरू की. इस दौरान कई संदिग्धों और अभ्यर्थियों से पूछताछ की गई और कुछ की गिरफ्तारियां भी हुईं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि कुछ लोगों ने प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसे लिये थे. हालांकि, उस समय जांच में मूल प्रश्न पत्र लीक होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले थे.
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अभय तिवारी की गिरफ्तारी से बदली जांच की दिशा
जांच में अहम मोड़ तब आया, जब TDPL के मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी से पूछताछ की गई. पूछताछ के दौरान परीक्षा से सेटिंग और अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाने से जुड़ा नया दावा सामने आया. CID जांच में ये खुलासा हुआ कि कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले 135 संभावित प्रश्न और उनके उत्तर याद कराये गये थे. जब जांच और आगे बढ़ी तो इनमें से 120 सवाल ऐसे निकले जो परीक्षा में हू-बू-हू पाए गए. इसके बाद सीआईडी ने अभ्यर्थियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों से पूछताछ की. अभ्यर्थियों से हुए सवाल जवाब के आधार पर अन्य लोगों की गिरफ्तारियां शुरू हुई.
करीब 350 अभ्यर्थियों से पूछताछ
अब तक मिली जानकारी के अनुसार, CID ने अब तक करीब 350 अभ्यर्थियों और इस मामले से जुड़े लोगों की पूछताछ कर चुकी है. रोजाना करीब 20 अभ्यर्थियों को समन भेजकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं. परीक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों को भी खंगाला जा रहा है. इसके अलावा संदिग्धों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाला जा रहा है. ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क में कौन-कौन से लोग एक-दूसरे के संपर्क में थे और पैसों के लेन-देन की कड़ियां कहां तक जुड़ी हुई हैं.
11 से अधिक आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी
जेएसएससी सीजीएल पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी ने अब तक 11 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है. जांच में पेपर लीक और अभ्यर्थियों तक सवाल-जवाब पहुंचाने वाले नेटवर्क की परतें लगातार खुल रही हैं.
JSSC कार्यालय में भी हुई थीं छापेमारी
सीआईडी की टीम ने आरोपियों से पूछताछ के आधार पर जेएसएससी कार्यालय में छापेमारी भी की थी. आयोग के नामकुम स्थित मुख्यालय पहुंचकर जांच में शामिल अधिकारियों ने डिजिटल साक्ष्य, ओएमआर शीट और चयन प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किये. इसके बाद सीआईडी ने आयोग के सचिव सुधीर गुप्ता से भी पूछताछ की. जब दफ्तर से बरामद दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ाया तो परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को को नेपाल और बोकारो में प्रश्न पत्र के उत्तर रटवाने का मामला सामने आया. सीआईडी की मानें तो परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को नेपाल के विराटनगर और बोकारो के होटलों में ठहराया गया था. वहां उन्हें परीक्षा में आने वाले करीब 65 से 135 सवालों के जवाब रटवाए गए.
12 लाख से 70 लाख रुपये तक का रेट
सीआईडी की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क में अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12 लाख से लेकर 70 लाख रुपये तक वसूले गए. इनमें से 15 अभ्यर्थियों से करीब 1.80 करोड़ रुपये लिये जाने की बात सामने आई है.
परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया
सीआईडी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य सरकार ने टीडीपीएल एजेंसी द्वारा संचालित परीक्षाओं के परिणामों पर रोक लगाते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की. इसके तुरंत बाद 22 परीक्षाओं को रद्द करने से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी गई.
मुख्य आरोपी अभय तिवारी
जांच में अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी का नाम मुख्य सूत्रधार के तौर पर सामने आया है. आरोप है कि उसने फर्जीवाड़े के जरिए खुद भी सीजीएल परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की थी.
अभय तिवारी के रिश्तेदार भी जांच के दायरे में
सीआईडी ने अपनी जांच में पाया कि अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उनकी पत्नी सुषमा कुमारी भी सेटिंग जरिये परीक्षा पास की है. इसके उन दोनों से भी पूछताछ कर उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया.
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वेबेल कंपनी से जुड़े लोगों से पूछताछ
प्रिंटिंग और प्रश्नपत्र लीक से जुड़े आरोपों की जांच के दौरान वेबेल कंपनी के संचालक मिथिलेश सिंह, राकेश सिंह और उमाकांत प्रामाणिक के भी इस खेल में शामिल होने की जानकारी मिली. जिसके बाद उनकी तलाश में सीआईडी ने पटना, दिल्ली समेत कई शहरों में छापेमारी की लेकिन वह अब भी फरार चल रहा है. हालांकि मिथलेश सिंह ने जिस निजी एजेंसी आईसीएन को प्रश्न पत्र प्रकाशित करने की जिम्मेदारी दी थी उसके दो कर्मियों सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है.
एजेंट और बिचौलियों पर भी नजर
नेपाल में अभ्यर्थियों के ठहरने और पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले एजेंटों और बिचौलियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. राम प्रवेश यादव, रघुवीर यादव, संदीप त्रिपाठी, अनिश कुमार और विनय शाह समेत अन्य लोगों से पूछताछ और उनकी धर-पकड़ के लिए कार्रवाई जारी है.
अब आगे क्या ?
JSSC CGL मामले की जांच अभी जारी है. CID दस्तावेजों, कॉल डिटेल और पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और गिरफ्तारियां या नये प्रूफ सामने आ सकते हैं. हालांकि, पेपर लीक, कथित सिंडिकेट और इसमें शामिल लोगों की भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच पूरे होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी.
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