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झारखंड हाईकोर्ट ने असिस्टेंट टाउन प्लानर नियुक्ति गड़बड़ी मामले में JPSC से पूछा तीखा सवाल, दिया ये निर्देश

Updated at : 08 Dec 2021 9:39 AM (IST)
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झारखंड हाईकोर्ट ने असिस्टेंट टाउन प्लानर नियुक्ति गड़बड़ी मामले में JPSC से पूछा तीखा सवाल, दिया ये निर्देश

असिस्टेंट टाउन प्लानर नियुक्ति गड़बड़ी मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने जेपीएससी से तीखा सवाल पूछा है. उन्होंने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद अभ्यर्थियों के टाउन प्लानर मेंबरशिप सर्टिफिकेट जमा करने की तिथि बढ़ाने का आपको क्या अधिकार था.

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत ने असिस्टेंट टाउन प्लानर नियुक्ति मामले में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की. अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से पूछा कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद अभ्यर्थियों के टाउन प्लानर मेंबरशिप सर्टिफिकेट जमा करने की तिथि बढ़ाने का जेपीएससी को क्या अधिकार था.

जेपीएससी ने किस अधिकार के तहत तिथि बढ़ायी. अदालत ने उस अधिकार को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. अदालत ने माैखिक रूप से कहा कि जेपीएससी संवैधानिक संस्था है. आयोग के अध्यक्ष को भी बुला कर पूछ सकते हैं. अदालत ने जेपीएससी को अधिकार बताने का निर्देश देते हुए सुनवाई के लिए 16 दिसंबर की तिथि निर्धारित की.

जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल, अधिवक्ता राकेश रंजन व अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि 10 अगस्त 2020 की तिथि बढ़ायी गयी थी. मेंबरशिप सर्टिफिकेट जमा करने के लिए 27 अगस्त से लेकर आठ सितंबर तक विस्तार किया गया था. तिथि बढ़ाने का आयोग को अधिकार रहता है. उन्होंने अदालत से समय देने का आग्रह किया.

इससे पूर्व प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ रंजन ने पक्ष रखते हुए बताया कि 10 अगस्त 2020 को फार्म जमा करने की अंतिम तिथि थी. उस दिन तक कुछ अभ्यर्थियों के पास इंस्टीट्यूट अॉफ टाउन प्लानर से एसोसिएट मेंबरशिप का सर्टिफिकेट नहीं था. इसके बावजूद उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया तथा साक्षात्कार में भी शामिल कर लिया गया.

बाद में कई अभ्यर्थियों को सफल घोषित करते हुए नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गयी. वहीं चयनित अभ्यर्थियों की अोर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि प्रार्थी ने तिथि बढ़ाने संबंधी अधिसूचना को चुनाैती नहीं दी है. इस प्रतियोगिता में प्रार्थी सफल भी नहीं हो पाया है. यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है. कोविड-19 की वजह से टाउन प्लानर मेंबरशिप सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहा था. दिल्ली का इंस्टीट्यूट डिफंक्ट था. इस संबंध में आवेदन भी दिया गया था. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी विवेक हर्षिल, स्वप्निल म्यूरेश व पायल की अोर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी है. उन्होंने जेपीएससी की टाउन प्लानर नियुक्ति की अनुशंसा को निरस्त करने की मांग की है. जेपीएससी ने 77 टाउन प्लानर के पदों के विरुद्ध 43 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की है.

Posted by : Sameer Oraon

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