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जमशेदपुर में खुलेगा जनजातीय विश्वविद्यालय, सदन से पारित हुआ तीन महत्वपूर्ण विधेयक

Updated at : 23 Dec 2021 6:37 AM (IST)
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जमशेदपुर में खुलेगा जनजातीय विश्वविद्यालय, सदन से पारित हुआ तीन महत्वपूर्ण विधेयक

झारखंड में जनजातीय विश्व विद्यालय खुलने का रास्ता साफ हो गया है, जो कि जमशेदपुर में होगा. विधानसभा में कल तीन प्रमुख बिल पास हो गये. जिसमें कोर्ट की फीस बढ़ा दी गयी है, आईये जानते हैं वो कौन कौन से बिल हैं.

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रांची : झारखंड में जनजातीय विवि खुलने का मार्ग प्रशस्त हो गया. इस विवि का मुख्यालय पूर्वी सिंहभूूम के जमशेदपुर में होगा. विधानसभा से बुधवार को पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय विधेयक 2021 पारित किया गया. हालांकि पक्ष और विपक्ष के कई विधायकों ने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की मांग की. इस विधेयक पर भाजपा विधायक अनंत ओझा और आजसू विधायक लंबोदर महतो ने संशोधन प्रस्ताव लाया था.

दोनों विधायकों ने इस विधेयक में स्पीकर द्वारा नामित विधायकों को भी विवि के कार्यकारी परिषद में सदस्य बनाने का आग्रह किया. भाजपा विधायकों का साथ कांग्रेस के बंधु तिर्की, प्रदीप यादव और झामुमो के लोबिन हेम्ब्रम ने भी किया. विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की ने विवि में विज्ञान संकाय नहीं रहने पर आपत्ति जतायी और आग्रह किया कि जनजातीय विवि में विज्ञान संकाय में भी शोध की व्यवस्था हो.

विवि की स्थापना में क्या है खास :

इस विश्वविद्यालय का मुख्यालय जमशेदपुर में होगा. इसके अलावा विश्वविद्यालयउचित समझे, तो क्षेत्रीय केंद्र और परिसर खोल सकता है. इस विवि की स्थापना का मुख्य उद्देश्य जनजातीय आबादी के लिए जनजातीय अध्ययन अौर अनुसंधान को बढ़ावा देना है.

इसके माध्यम से जनजातीय केंद्रित सामाजिक विज्ञान, कला-संस्कृति, भाषा अौर भाषा विज्ञान, विज्ञान, वन आधारित आर्थिक गतिविधियां अादि पर शिक्षण अौर अनुसंधान की सुविधाएं प्रदान की जायेगी. इसके अलारा दूसरे विवि के साथ आदिवासी आबादी पर सांस्कृतिक अध्ययन अौर अनुसंधान करने के लिए सहयोग करना, आदिवासी केंद्रित विकास मॉडल तैयार करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है.

इसके सभी विभाग च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम से चलेंगे. इसका क्षेत्राधिकार पूरे झारखंड में होगा. इस विवि में सभी वर्ग, जाति, धर्म, पंथ के लोग नामांकन ले सकेंगे.

वीसी या प्रोवीसी की नियुक्ति तीन साल के लिए

कुलपति व प्रतिकुलपति की नियुक्ति तीन वर्ष या उम्र सीमा 70 वर्ष (जो पहले हो) तक के लिए होगी, जो राज्य सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल करेंगे.

अन्य सामान्य विवि की तरह प्रतिकुलपति, रजिस्ट्रार, डीएसडब्ल्यू, प्रॉक्टर, एफअो, एफए, डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार, डीन, परीक्षा नियंत्रक, पुस्कालयाध्यक्ष, निदेशक आदि की नियुक्ति होगी.

विभागों में चक्रानुक्रम पद्धति से दो वर्ष के लिए वरीयता के आधार पर विभागाध्यक्ष की नियुुक्ति होगी.

रजिस्ट्रार की नियुक्ति पांच वर्ष के लिए या उम्र सीमा 62 वर्ष (जो पहले हो) के तहत होगी.

विवि में होंगे ये विभाग

कला व मानविकी संकाय में नौ जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा के साथ हिंदी, अंग्रेजी अौर अन्य विदेशी भाषा, दर्शनशास्त्र के विभाग होंगे. विज्ञान संकाय में अौषधीय, सुगंधित तथा कृषि पौधों एवं पारंपरिक चिकित्सा विभाग होगा. ग्रामीण तथा वन प्रबंधन एवं पर्यावरण विज्ञान व कानून विभाग होंगे. प्रबंधन संकाय में पर्यटन, आतिथ्य अौर होटल प्रबंधन विभाग होंगे.

कंप्यूटर विज्ञान अौर सूचना प्रौद्योगिकी विभाग होंगे. जनजातीय अध्ययन संकाय में जनजातीय कला, लोक साहित्य अौर संस्कृति विभाग, लोक अध्ययन विभाग इतिहास तथा संग्रहालय विज्ञान, जनजातीय तथा तुलनात्मक भाषा विज्ञान विभाग होंगे. इसके अलावा विवि में ललित कला संकाय, मंच कला संकाय, शारीरिक शिक्षा संकाय, विधि संकाय भी होंगे. विवि द्वारा स्नातक, स्नातकोत्तर डिग्री कोर्स, डिप्लोमा कोर्स, सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई होगी. दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के माध्यम से भी सुविधाएं प्रदान की जायेंगी.

कोर्ट फीस बढ़ी, सदन से विधेयक पास

रांची. सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को कोर्ट फीस संशोधन विधेयक 2021 पेश किया. सदन ने इसे पारित कर दिया. इससे न्यायालयों में विभिन्न तरह के मुकदमों और कार्यों के लिए पूर्व निर्धारित फीस में वृद्धि की गयी है. इसका उद्देश्य राज्य के राजस्व में वृद्धि करना है. संसदीय कार्य मंत्री ने विधेयक पेश किया़ माले विधायक विनोद सिंह ने विधेयक को प्रवर समिति को भेजे जाने का प्रस्ताव दिया़ श्री आलम ने कहा कि 21 साल से कोर्ट फीस नहीं बढ़ी है़

कैप्टिव पावर प्लांट पर लगेगा विद्युत शुल्क

रांची. झारखंड में उद्योगों या खनन परियोजनाओं द्वारा लगाये गये कैप्टिव पावर प्लांट को अब 50 पैसे प्रति यूनिट की दर से विद्युत शुल्क का भुगतान करना होगा. पूर्व में कैप्टिव पावर प्लांट को शुल्क नहीं देना पड़ता था. सदन में विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक 2021 पारित हो गया है. खनन, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक इकाइयों द्वारा जेनरेटर सेट लगाये जाने पर किसी प्रकार का कर नहीं लगेगा. लेकिन पावर स्टेशन की स्थापना की गयी है, तो उन्हें 50 पैसे प्रति यूनिट की दर से शुल्क देना होगा.

Posted By : Sameer Oraon

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