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झारखंड में मौसम एक बार फिर बदलेगी करवट, अगले 4 दिनों तक इन जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की बन रही संभावना

आज और कल कई जगह भारी बारिश का अनुमान. बंगाल की खाड़ी में बन रहा चक्रवात. कई जिलों में सक्रिय रहा मॉनसून, राजधानी में बादल छाये रहेंगे. राज्य के कई इलाकों में पिछले 24 घंटे में अच्छी बारिश हुई

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
झारखंड में अगले 4 दिनों तक भारी बारिश का अनुमान
झारखंड में अगले 4 दिनों तक भारी बारिश का अनुमान
फाइल फोटो.

jharkhand weather forecast, jharkhand weather News रांची : झारखंड में मॉनसून सक्रिय है. राज्य के कई इलाकों में पिछले 24 घंटे में अच्छी बारिश हुई. मौसम केंद्र के वरीय वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार अगले पांच-छह दिनों तक झारखंड में अच्छी बारिश होगी. उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में चक्रवात बन रहा है. इसके अगले 24 घंटे में निम्न दबाव में बदलने की उम्मीद है. इससे 28 और 29 अगस्त को राज्य के कई इलाकों भारी बारिश भी हो सकती है. 28 और 29 अगस्त को राजधानी में बादल छाये रहेंगे. 30 और 31 अगस्त को भी कई इलाकों में एक बार मध्यम दर्जे की बारिश हो सकती है.

कहां होगा ज्यादा असर :

28 अगस्त को ज्यादा असर राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्सों (देवघर, धनबाद, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ व साहिबगंज) में हो सकता है. कहीं-कहीं वज्रपात की भी संभावना है. 29 अगस्त को राज्य के उत्तर-पश्चिमी इलाकों (पलामू,गढ़वा, चतरा, कोडरमा, लातेहार व लोहरदगा) में इसका विशेष असर दिखेगा.

अड़की में 106 मिमी बारिश :

पिछले 24 घंटे में सबसे अधिक बारिश खूंटी जिले के अड़की प्रखंड में हुई. यहां 106 मिमी बारिश रिकार्ड की गयी. वहीं राजमहल में 90 तथा जमशेदपुर में करीब 73 मिमी के आसपास बारिश हुई. वहीं, राजधानी में शुक्रवार को करीब 12 मिमी के आसपास बारिश हुई.

परती जमीन पर कुल्थी और सरगुजा लगा सकते हैं किसान :

बीएयू के कृषि परामर्श सेवा ने किसानों को सलाह दी है कि अगर खेत परती रह गयी है, तो इसमें कुल्थी और सरगुजा लगा सकते हैं. अगर सिंचाई की सुविधा हो तो किसान सब्जी की खेती भी कर सकते हैं. शहर के नजदीक रहनेवाले किसान फूलों की खेती शुरू कर सकते हैं. अगर सिंचाई की सुविधा हो तो आलू या हरा मटर की खेती शुरू कर सकते हैं. अभी धान की फसल में गंधीबग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है. यह फूलों का रस चूस लेता है. इससे दाने नहीं बन पाते हैं. इसके बचने के लिए कृषि वैज्ञानिक की सलाह से दवा का छिड़काव करते रहें.

Posted By : Sameer Oraon

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